Bengaluru Traffic Viral Video: बेंगलुरु के ट्रैफिक को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। एक फाइनेंस इन्फ्लुएंसर ने वीडियो शेयर कर बताया कि शहर से एयरपोर्ट पहुंचने में उन्हें करीब 3 घंटे लग गए, जबकि बेंगलुरु से कोलकाता की फ्लाइट लगभग 2 घंटे 20 मिनट में पहुंच जाती है। उनका यह अनुभव सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
बेंगलुरु, जिसे भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है, अपनी आईटी इंडस्ट्री, स्टार्टअप कल्चर और तेज आर्थिक विकास के लिए जाना जाता है। लेकिन शहर का ट्रैफिक और खराब कनेक्टिविटी लंबे समय से लोगों की बड़ी परेशानी बनी हुई है। अब एक वायरल वीडियो ने इस समस्या को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
HSR लेआउट से एयरपोर्ट तक पहुंचने में लगा 3 घंटे का समय
फाइनेंस इन्फ्लुएंसर मनीष कुमार सिंह ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने बेंगलुरु के ट्रैफिक अनुभव को बताया। उन्होंने कहा कि वह कोलकाता जाने के लिए HSR लेआउट से केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर जा रहे थे।
उन्होंने बताया कि करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय करने में उन्हें लगभग 2.5 से 3 घंटे का समय लग गया। वहीं, इसी दौरान उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि बेंगलुरु से कोलकाता जैसी करीब 2,000 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली फ्लाइट भी करीब 2 घंटे 20 मिनट में पहुंच जाती है।
वीडियो में उन्होंने कहा, “बेंगलुरु शहर से एयरपोर्ट पहुंचने में जितना समय लगता है, उतने समय में आप एक दूसरे शहर तक पहुंच सकते हैं। क्या किसी शहर की प्लानिंग ऐसी होनी चाहिए?”
बेंगलुरु ट्रैफिक और सिटी प्लानिंग पर उठे सवाल
मनीष कुमार सिंह ने अपने वीडियो में सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं बताई, बल्कि शहर की योजना को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई बड़े शहरों में एयरपोर्ट शहर के मुख्य हिस्से से दूर बनाए जाते हैं, लेकिन वहां बेहतर सड़क नेटवर्क और सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध होती है।
उन्होंने न्यूयॉर्क और शिकागो जैसे शहरों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी आबादी और ट्रैफिक की समस्या है, लेकिन एयरपोर्ट तक पहुंचने में लोगों को इतना ज्यादा समय नहीं लगता।
उनके मुताबिक, समस्या एयरपोर्ट के शहर से दूर होने की नहीं है, बल्कि समस्या बेहतर कनेक्टिविटी की है।
एयरपोर्ट दूर हो सकता है, लेकिन कनेक्टिविटी मजबूत होनी चाहिए
दुनिया के कई विकसित शहरों में एयरपोर्ट अक्सर शहर के बाहर बनाए जाते हैं ताकि जमीन की उपलब्धता, सुरक्षा और विस्तार की संभावनाएं बनी रहें। लेकिन इन शहरों में एक्सप्रेसवे, मेट्रो, एयरपोर्ट ट्रेन और बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम लोगों को जल्दी एयरपोर्ट तक पहुंचाने में मदद करते हैं।
मनीष कुमार सिंह ने भारत में बन रहे नए एयरपोर्ट्स का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के साथ उसकी कनेक्टिविटी पर पहले से ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि सिर्फ एयरपोर्ट बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां तक पहुंचने के लिए मजबूत ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी जरूरी है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने दी प्रतिक्रिया
इस वायरल वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने बेंगलुरु की ट्रैफिक समस्या और शहर की प्लानिंग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
एक यूजर ने लिखा कि बेंगलुरु की सिटी प्लानिंग लंबे समय से बड़ी समस्या बनी हुई है। वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि शहर का विकास तेजी से हुआ, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर उसी गति से नहीं बढ़ पाया।
एक अन्य यूजर ने लिखा कि कई बार एयरपोर्ट तक पहुंचने में लगने वाला समय फ्लाइट के सफर से ज्यादा हो जाता है।
कुछ लोगों ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर विकल्प बताया। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के विस्तार से ट्रैफिक दबाव को कम किया जा सकता है।
बेंगलुरु की बढ़ती आबादी बनी बड़ी चुनौती
बेंगलुरु पिछले कुछ दशकों में भारत के सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में शामिल हुआ है। आईटी कंपनियों, स्टार्टअप्स और रोजगार के अवसरों की वजह से यहां देशभर से लोग आकर बसे हैं।
लेकिन शहर की सड़क व्यवस्था, सार्वजनिक परिवहन और शहरी योजना पर बढ़ती आबादी का दबाव साफ दिखाई देता है। ट्रैफिक जाम, लंबा कम्यूट टाइम और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी जैसी समस्याएं लगातार चर्चा में रहती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरों के लिए सिर्फ नए प्रोजेक्ट बनाना काफी नहीं है, बल्कि लंबे समय की योजना, बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट और स्मार्ट अर्बन प्लानिंग जरूरी है।
वायरल वीडियो ने फिर छेड़ी शहरों की प्लानिंग पर बहस
बेंगलुरु एयरपोर्ट ट्रैफिक वाला यह वीडियो सिर्फ एक व्यक्ति के अनुभव तक सीमित नहीं रहा। इसने भारत के बड़े शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास की रणनीति पर नई बहस शुरू कर दी है।
तेजी से बढ़ते महानगरों के लिए आने वाले समय में यह जरूरी होगा कि नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के साथ सड़क, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को भी प्राथमिकता दी जाए।


