Farm Loan Waiver Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए कृषि कर्जमाफी योजना के नियमों में अहम बदलाव किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में घोषणा की कि अब कर्जमाफी के लिए बकाया कृषि ऋण पर 2 लाख रुपये की अधिकतम सीमा लागू नहीं होगी। इस फैसले से हजारों ऐसे किसानों को राहत मिलेगी, जो पहले सिर्फ सीमा से अधिक बकाया होने के कारण योजना का लाभ नहीं ले पा रहे थे।
किसानों के लिए बड़ी राहत, खत्म हुई 2 लाख रुपये की शर्त
महाराष्ट्र विधानसभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि सरकार की नई ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर कृषि कर्जमाफी योजना’ के तहत अब किसानों के बकाया कृषि ऋण पर 2 लाख रुपये की अधिकतम सीमा नहीं रहेगी। पहले यदि किसी किसान का बकाया कर्ज 2 लाख रुपये से एक रुपये भी अधिक होता था, तो वह पूरी योजना से बाहर हो जाता था।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से हजारों किसानों को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा और अधिक किसानों को संस्थागत बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में मदद मिलेगी।
अब 2026-27 तक के बकाया कृषि ऋण होंगे शामिल
सरकार ने कर्जमाफी योजना के दायरे को भी बढ़ा दिया है। पहले यह योजना केवल वित्त वर्ष 2025-26 तक के बकाया कृषि ऋण पर लागू होने वाली थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर वित्त वर्ष 2026-27 तक कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार यह राज्य में पहली बार है जब किसी कर्जमाफी योजना का दायरा इस तरह आगे बढ़ाया गया है।
56 लाख किसानों को मिलेगा 36,000 करोड़ रुपये का लाभ
सरकार का दावा है कि इस योजना के तहत राज्य के लगभग 56 लाख किसानों को कुल 36,000 करोड़ रुपये की कर्जमाफी सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि केवल सीमित संख्या में किसानों को ही लाभ मिलेगा। सरकार के अनुसार योजना तैयार करने से पहले बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों से भी चर्चा की गई।
कृषि क्षेत्र पर सरकार का बड़ा निवेश
राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ाने का भी ऐलान किया है।
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार—
- पहले वर्ष कृषि क्षेत्र पर लगभग 20,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
- दूसरे वर्ष यह राशि बढ़ाकर 22,000 करोड़ रुपये की जाएगी।
- इसके बाद इसे बढ़ाकर 25,000 करोड़ रुपये तक ले जाने की योजना है।
पुरानी महात्मा फुले कर्जमाफी योजना से कैसे अलग है नई योजना?
साल 2019 की महात्मा ज्योतिराव फुले कर्जमाफी योजना में केवल 2 लाख रुपये तक के ओवरड्यू कृषि ऋण वाले किसान ही पात्र थे। यदि किसी किसान का बकाया इस सीमा से थोड़ा भी अधिक होता था, तो उसे पूरी तरह योजना से बाहर कर दिया जाता था।
नई योजना में यह शर्त समाप्त कर दी गई है, जिससे पहले वंचित रह गए किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा सरकार ने यह भी घोषणा की है कि महात्मा फुले कर्जमाफी योजना के पात्र किसानों को भी अब 2 लाख रुपये तक का कर्जमाफी लाभ दिया जाएगा।
हालांकि सरकार ने 50,000 रुपये के प्रोत्साहन भुगतान (इंसेंटिव) से जुड़ी शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार यदि यह शर्त हटाई जाती तो राज्य पर लगभग 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता।
पुराने लाभार्थियों को लेकर सरकार का क्या फैसला?
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सरकार ने इस बात पर विचार किया था कि पहले कर्जमाफी का लाभ ले चुके किसानों को नई योजना में शामिल किया जाए या नहीं। लेकिन बैंकिंग व्यवस्था और किसानों दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि इससे पहले भी ऐसी व्यवस्था लागू रही है—
- वर्ष 2017 की कर्जमाफी के लाभार्थियों को 2019 की महात्मा फुले योजना से बाहर रखा गया था।
- इसी तरह वर्ष 2008 की राष्ट्रीय कृषि कर्जमाफी योजना के लाभार्थियों को महाराष्ट्र सरकार की 2009 की योजना में शामिल नहीं किया गया था।
किसानों को साहूकारों से बचाने के लिए जरूरी है कर्जमाफी
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्जमाफी का उद्देश्य किसानों को अमीर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक संकट से निकालकर दोबारा बैंकों से ऋण लेने योग्य बनाना है। इससे किसान निजी साहूकारों के चंगुल में फंसने से बच सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चुनावी लाभ के लिए नहीं बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लेकर आई है।
बिजली सब्सिडी और कृषि योजनाओं पर भी बड़ा खर्च
मुख्यमंत्री के अनुसार महाराष्ट्र सरकार किसानों को हर वर्ष लगभग 25,000 करोड़ रुपये की बिजली सब्सिडी देती है। वहीं कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं और सब्सिडी पर राज्य का कुल वार्षिक व्यय लगभग 95,000 करोड़ रुपये है।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र सरकार द्वारा कृषि कर्जमाफी योजना में किए गए नए बदलाव राज्य के लाखों किसानों के लिए राहत भरे साबित हो सकते हैं। 2 लाख रुपये की सीमा हटने और 2026-27 तक के बकाया ऋण को शामिल किए जाने से पहले वंचित रह गए किसानों को भी योजना का लाभ मिलने की संभावना बढ़ गई है। सरकार का दावा है कि यह कदम किसानों को आर्थिक संकट से उबारने और उन्हें दोबारा बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।


