नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में विनिवेश (Disinvestment) के जरिए रिकॉर्ड 20,272 करोड़ रुपये जुटाकर पिछले तीन वित्त वर्षों का आंकड़ा पीछे छोड़ दिया है। सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए 80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा है और वित्त मंत्रालय को उम्मीद है कि यह लक्ष्य पार भी हो सकता है।
सरकार की इस तेज रफ्तार विनिवेश रणनीति के पीछे एक बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी संकट भी माना जा रहा है। खाद, गैस और अन्य जरूरी आयात पर बढ़े खर्च के कारण सरकारी राजस्व पर दबाव बढ़ा, जिसकी भरपाई के लिए सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में हिस्सेदारी बेचने की गति तेज की गई।
पहली तिमाही में ही तीन साल का रिकॉर्ड ध्वस्त
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 20,272 करोड़ रुपये का विनिवेश किया जा चुका है। यह पिछले तीन वर्षों के पूरे साल के आंकड़ों से भी अधिक है।
पिछले वर्षों का विनिवेश
| वित्त वर्ष | विनिवेश से प्राप्त राशि |
|---|---|
| 2026-27 (अप्रैल-जून) | ₹20,272 करोड़ |
| 2025-26 | ₹16,885 करोड़ |
| 2024-25 | ₹10,163 करोड़ |
| 2023-24 | ₹16,507 करोड़ |
इन आंकड़ों से साफ है कि सरकार ने इस बार शुरुआती तीन महीनों में ही रिकॉर्ड प्रदर्शन किया है।
सबसे ज्यादा कमाई Coal India से
सरकार को सबसे अधिक राजस्व कोल इंडिया में अपनी 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने से मिला। ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए सरकार ने 5,542 करोड़ रुपये जुटाए। इस बिक्री के बाद कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी घटकर 61.13 प्रतिशत रह गई।
इसके अलावा एनएचपीसी में 6.01 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर सरकार ने 4,357 करोड़ रुपये हासिल किए।
इन 7 सरकारी कंपनियों से हुई बड़ी कमाई
पहली तिमाही में सरकार ने कुल 7 सार्वजनिक कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर राजस्व जुटाया।
| कंपनी | प्राप्त राशि |
|---|---|
| Coal India | ₹5,542 करोड़ |
| NHPC | ₹4,357 करोड़ |
| General Insurance Corporation of India | ₹3,090.47 करोड़ |
| Central Bank of India | ₹2,266.13 करोड़ |
| Indian Railway Finance Corporation (IRFC) | ₹2,081.27 करोड़ |
| Cochin Shipyard | ₹1,711 करोड़ |
| NLC India | ₹1,223.57 करोड़ |
सिर्फ विनिवेश ही नहीं, दूसरे स्रोतों से भी बढ़ी आय
सरकार को चालू वित्त वर्ष में विनिवेश के अलावा अन्य स्रोतों से भी अच्छी आय हुई है।
- लाभांश (Dividend): ₹2,025 करोड़
- एसेट मोनेटाइजेशन: ₹6,367 करोड़
इन स्रोतों से मिले राजस्व ने सरकारी वित्तीय स्थिति को और मजबूत किया है।
क्यों बढ़ाई गई विनिवेश की रफ्तार?
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण खाद, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात पर सरकार का खर्च अनुमान से अधिक बढ़ गया। इससे सब्सिडी का बोझ भी बढ़ा। ऐसे में अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की रणनीति को तेज किया।
आगे और बढ़ सकता है विनिवेश
सूत्रों के मुताबिक सरकार चालू वित्त वर्ष में कई अन्य सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों में भी अपनी हिस्सेदारी कम करने की तैयारी कर रही है।
वर्तमान में सरकार की:
- 68 सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों में हिस्सेदारी है, जिनका बाजार मूल्य 23 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
- 19 सूचीबद्ध बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में सरकार की हिस्सेदारी का अनुमानित मूल्य करीब 19 लाख करोड़ रुपये है।
ऐसे में आने वाले महीनों में भी बड़े पैमाने पर OFS और अन्य विनिवेश सौदे देखने को मिल सकते हैं, जिससे सरकार अपने 80,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य को आसानी से हासिल करने या उससे आगे निकलने की स्थिति में पहुंच सकती है।


