नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) एक बार फिर निवेशकों के बीच चर्चा का केंद्र बन गई है। अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 49% तक गिरने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या बिटकॉइन ने अपना सबसे खराब दौर देख लिया है और क्या यहां से नई तेजी की शुरुआत हो सकती है। बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा स्थिति पिछले बड़े क्रिप्टो साइकल जैसी दिखाई दे रही है, जहां लंबी गिरावट के बाद मजबूत रिकवरी देखने को मिली थी।
क्या है ‘बॉटमिंग जोन’ और क्यों है यह अहम?
क्रिप्टो बाजार में ‘बॉटमिंग जोन’ उस दौर को कहा जाता है जब किसी बड़ी गिरावट के बाद कीमतें एक सीमित दायरे में स्थिर होने लगती हैं। यह वह चरण होता है जहां कमजोर निवेशक बाजार से बाहर निकल जाते हैं और लंबी अवधि के निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी शुरू करते हैं।
बिटकॉइन का पिछला बड़ा बॉटमिंग जोन 2022 के आखिर में 15,500 से 16,000 डॉलर के आसपास बना था। इसके बाद बिटकॉइन ने शानदार वापसी करते हुए 1.26 लाख डॉलर से ऊपर का नया रिकॉर्ड बनाया।
क्या इतिहास खुद को दोहरा सकता है?
क्रिप्टो एक्सचेंज ज़ेबपे (ZebPay) के ट्रेड हेड हरीश जी. वतनानी के मुताबिक, मौजूदा प्राइस स्ट्रक्चर 2021-22 के मार्केट साइकल से काफी मिलता-जुलता है। उनका कहना है कि पिछले साइकल में बिटकॉइन ने अपने उच्चतम स्तर से 60% से 80% तक की गिरावट झेली थी और उसके बाद लंबी अवधि की रिकवरी शुरू हुई थी।
इस बार भी लगभग 49% की गिरावट के बाद बाजार ऐसे स्तर पर पहुंच रहा है, जहां ऐतिहासिक रूप से लंबी अवधि के निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती रही है।
फिलहाल कैसी है बिटकॉइन की स्थिति?
10 जुलाई की शुरुआती ट्रेडिंग में बिटकॉइन की कीमत 64,000 डॉलर के ऊपर कारोबार करती दिखी। पिछले 24 घंटों में इसमें 0.33% और पिछले एक सप्ताह में लगभग 2.95% की बढ़त दर्ज की गई।
हालांकि, यह अभी भी 6 अक्टूबर 2025 को बने 126,198 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से करीब 49% नीचे है।
रिकवरी की वजह क्या है?
हालिया तेजी के पीछे वैश्विक बाजारों में बेहतर रिस्क सेंटिमेंट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ संभावित समझौते के संकेत मिलने के बाद तेल की कीमतों में नरमी आई, जिससे जोखिम वाले एसेट्स में खरीदारी बढ़ी।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रिकवरी अभी पूरी तरह मजबूत नहीं कही जा सकती। अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड करीब 4.6% तक पहुंचने से सख्त वित्तीय परिस्थितियों की चिंता बनी हुई है, जिसका असर क्रिप्टो समेत जोखिम वाले निवेशों पर पड़ सकता है।
आगे किन संकेतों पर रहेगी नजर?
विशेषज्ञों के अनुसार बिटकॉइन की अगली दिशा तय करने में कई बड़े फैक्टर अहम होंगे, जिनमें शामिल हैं—
- संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की भागीदारी
- स्पॉट Bitcoin ETF में निवेश का प्रवाह
- वैश्विक मैक्रो-इकोनॉमिक परिस्थितियां
- मजबूत ट्रेडिंग वॉल्यूम
- डेरिवेटिव बाजार की पोजिशनिंग
- प्रमुख रेजिस्टेंस लेवल के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट
यदि इन संकेतकों में मजबूती दिखाई देती है, तो बिटकॉइन में नई तेजी का दौर शुरू हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संदेश?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तर बिटकॉइन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, लेकिन केवल कीमत में मामूली उछाल को नई बुल रन की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी। निवेशकों को बाजार की दिशा स्पष्ट होने, मजबूत वॉल्यूम और संस्थागत खरीदारी जैसे संकेतों का इंतजार करना चाहिए। क्रिप्टोकरेंसी अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाला निवेश है, इसलिए किसी भी निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी है।


