Vedanta Aluminium Metal Share Price: वेदांता लिमिटेड से अलग होकर हाल ही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई Vedanta Aluminium Metal पर ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल ने कवरेज की शुरुआत ‘Buy’ रेटिंग के साथ की है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी एल्युमीनियम सेक्टर की मजबूत मांग, लागत में कमी और उत्पादन क्षमता बढ़ने के दम पर आने वाले वर्षों में शानदार प्रदर्शन कर सकती है।
₹540 का बेस टारगेट, बुल केस में ₹680 तक पहुंचने की संभावना
मोतीलाल ओसवाल ने Vedanta Aluminium Metal के शेयर के लिए ₹540 प्रति शेयर का बेस प्राइस टारगेट दिया है, जो मौजूदा क्लोजिंग प्राइस से करीब 21% अधिक है। वहीं, बुल केस सिनेरियो में ब्रोकरेज ने ₹680 प्रति शेयर का लक्ष्य तय किया है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 53% की संभावित तेजी दर्शाता है।
ब्रोकरेज के अनुसार, कंपनी कमाई (Earnings) के एक अहम मोड़ पर खड़ी है और वित्त वर्ष 2026-28 के दौरान इसके EBITDA में 18% से अधिक CAGR की वृद्धि देखने को मिल सकती है।
तीन बड़े फैक्टर देंगे कमाई को रफ्तार
मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि कंपनी की कमाई में सुधार के पीछे तीन प्रमुख वजहें रहेंगी—
- उत्पादन (Volume) में लगातार बढ़ोतरी
- लागत (Cost) में स्थायी कमी
- वैल्यू-एडेड एल्युमीनियम उत्पादों की बिक्री में वृद्धि
इन तीनों कारकों से कंपनी की ऑपरेटिंग मार्जिन और मुनाफे में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद जताई गई है।
वैश्विक एल्युमीनियम बाजार से भी मिलेगा फायदा
ब्रोकरेज के मुताबिक, वैश्विक एल्युमीनियम बाजार में सप्लाई की कमी बनी हुई है। इसके पीछे कई कारण हैं—
- चीन में उत्पादन सीमा (Production Cap)
- यूरोप और रूस में सप्लाई बाधाएं
- चीन के बाहर लंबे समय से नए निवेश की कमी
साथ ही भारत में एल्युमीनियम की बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता कम करने की नीति भी Vedanta Aluminium Metal के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है।
बुल केस में क्यों दिख रहा है 53% तक उछाल?
ब्रोकरेज के बुल केस अनुमान के अनुसार, यदि वैश्विक बाजार में एल्युमीनियम की कीमतें FY27-FY29 के दौरान 3,000 डॉलर प्रति टन के आसपास बनी रहती हैं और कंपनी अपनी योजनाओं को समय से पहले पूरा कर लेती है, तो इसका प्रदर्शन और मजबूत हो सकता है।
बुल केस के प्रमुख अनुमान—
- कैप्टिव कोयला खदानों की क्षमता समय से पहले बढ़ेगी।
- बॉक्साइट खदानों के जरिए फुल बैकवर्ड इंटीग्रेशन होगा।
- FY28 तक हॉट मेटल उत्पादन लागत घटकर 1,640 डॉलर प्रति टन रह सकती है।
- झारसुगुडा प्लांट की बाधाएं दूर होने से उत्पादन बढ़कर 2.9 मिलियन टन (MT) तक पहुंच सकता है।
- EBITDA प्रति टन करीब 1,650 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान।
- FY28 तक EBITDA बढ़कर लगभग ₹43,400 करोड़ हो सकता है।
- कंपनी की बैलेंस शीट समय से पहले नेट-डेट-फ्री स्थिति के करीब पहुंच सकती है।
किन जोखिमों का भी रखना होगा ध्यान?
मोतीलाल ओसवाल ने कुछ प्रमुख जोखिमों का भी उल्लेख किया है, जिनमें शामिल हैं—
- परियोजनाओं के क्रियान्वयन (Execution) में देरी
- एल्युमीनियम की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव
- कच्चे माल एवं इनपुट लागत में बढ़ोतरी
- वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक चुनौतियां
शेयर लाल निशान में बंद
गुरुवार, 9 जुलाई को BSE पर Vedanta Aluminium Metal का शेयर 1.6% की गिरावट के साथ ₹444.45 पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप ₹1.73 लाख करोड़ से अधिक है। मार्च 2026 के अंत तक प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 56.38% रही। वेदांता लिमिटेड से डीमर्जर के बाद कंपनी 15 जून 2026 को शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थी।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए निवेश संबंधी विचार संबंधित ब्रोकरेज/विश्लेषकों के हैं। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


