E20 Petrol News: सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने एक बार फिर साफ किया है कि एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लेकर फैलाई जा रही कई आशंकाएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E20 पेट्रोल से माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसके साथ कई ऐसे फायदे भी हैं जो वाहन की परफॉर्मेंस और पर्यावरण दोनों के लिए बेहतर साबित होते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वालों के इंश्योरेंस क्लेम पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
E20 पेट्रोल पर सरकार ने दिया बड़ा जवाब
Seen some wild claims about #E20 petrol on your feed lately? @PetroleumMin has a clear message: Don't fall for the ragebait.
✳️Fuel-grade ethanol used for petrol blending is produced through fermentation and distillation processes that eliminate residual sugars from the final… pic.twitter.com/iuCOEoS1IM
— PIB India (@PIB_India) July 3, 2026 पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ लोग इसे वाहनों के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं तो कुछ का कहना है कि इससे माइलेज काफी घट जाता है। इन दावों के बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि E20 पेट्रोल के बारे में फैलाई जा रही कई बातें गलतफहमी पर आधारित हैं और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर ही सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है।
सरकार ने बताईं E20 पेट्रोल की 3 बड़ी खूबियां
1. गाड़ी की एक्सीलरेशन बेहतर होती है
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एथेनॉल की ऑक्टेन वैल्यू अधिक होती है, जिससे इंजन की नॉकिंग कम होती है और वाहन की एक्सीलरेशन बेहतर होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया भर में कई रेसिंग कारों में भी एथेनॉल आधारित ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इससे इंजन की परफॉर्मेंस बेहतर मिलती है।
2. इंजन में नॉकिंग कम होती है
मंत्री के अनुसार E20 पेट्रोल इंजन में “नॉकिंग” यानी असामान्य कंपन और आवाज को कम करने में मदद करता है। इससे इंजन का संचालन अधिक स्मूद हो सकता है और दहन प्रक्रिया भी बेहतर होती है।
3. इंश्योरेंस क्लेम पर नहीं पड़ेगा कोई असर
सरकार ने सबसे ज्यादा जोर इस बात पर दिया कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों का इंश्योरेंस क्लेम किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि यदि वाहन में E20 पेट्रोल इस्तेमाल किया गया तो दुर्घटना की स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है। इस पर मंत्री ने साफ कहा कि इंश्योरेंस कंपनियां पहले ही इस तरह की अफवाहों का खंडन कर चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी कोई नीति नहीं है जिसके तहत केवल E20 पेट्रोल के उपयोग की वजह से इंश्योरेंस क्लेम अस्वीकार किया जाए।
क्या E20 पेट्रोल से माइलेज कम होता है?
मंत्री ने स्वीकार किया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में हल्की कमी महसूस हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह अंतर बहुत मामूली होता है और वाहन की स्थिति, ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की परिस्थितियों तथा इंजन तकनीक जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से थोड़ी कम होती है। इसी कारण कुछ मामलों में ईंधन दक्षता पर सीमित असर देखा जा सकता है, लेकिन आधुनिक E20-कम्पैटिबल वाहनों में यह अंतर काफी कम रहता है।
20% से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग पर क्या बोले मंत्री?
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि फिलहाल भारत 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य तक पहुंच चुका है। यदि भविष्य में 22%, 25% या उससे अधिक ब्लेंडिंग की दिशा में कदम बढ़ाया जाता है तो उससे पहले सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण और मानकों का पालन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन, हाइब्रिड वाहन, CNG और बायोफ्यूल आधारित वाहन सभी भारत के ऊर्जा भविष्य का हिस्सा हैं और सरकार किसी एक तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय बहु-आयामी रणनीति अपना रही है।
BIS ने पहले ही जारी किए हैं नए मानक
सरकार ने पहले 22%, 25%, 27% और 30% एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के तकनीकी मानकों की घोषणा की थी। साथ ही इन ईंधनों पर एक्साइज ड्यूटी में भी छूट दी गई थी।
हालांकि बाद में पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह केवल नियामकीय तैयारी का हिस्सा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को तत्काल बाजार में लॉन्च किया जा रहा है।
E20 पेट्रोल को बढ़ावा क्यों दे रही है सरकार?
भारत हर साल कच्चे तेल के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करता है। ऐसे में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के जरिए सरकार पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है। इसके अलावा इस पहल से गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से जुड़े किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
निष्कर्ष
E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि इस ईंधन के फायदे नुकसान की तुलना में अधिक हैं। सरकार के अनुसार माइलेज में हल्की कमी संभव है, लेकिन बेहतर एक्सीलरेशन, कम इंजन नॉकिंग और इंश्योरेंस क्लेम पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़ना इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। साथ ही सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि भविष्य में यदि अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन लाए जाते हैं तो वे सभी आवश्यक परीक्षणों और सुरक्षा मानकों के बाद ही बाजार में उपलब्ध कराए जाएंगे।


