नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, मिडिल ईस्ट में सप्लाई संबंधी चुनौतियों और ऊर्जा सुरक्षा की बढ़ती चिंताओं के बीच भारत ने कच्चे तेल की खरीद में नया रिकॉर्ड बना दिया है। जून 2026 में भारत ने प्रतिदिन औसतन 4.93 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात किया, जो जून महीने के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आयात है। इस रिकॉर्ड खरीदारी में रूस सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा, जिसने भारत की कुल आयातित मात्रा का आधे से अधिक हिस्सा उपलब्ध कराया।
Highlights
- जून 2026 में भारत ने प्रतिदिन रिकॉर्ड 4.93 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात किया।
- रूस से प्रतिदिन 2.6 मिलियन बैरल तेल की खरीद हुई।
- मई के मुकाबले रूस से आयात में 36.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- जून में कुल लगभग 147.9 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात हुआ।
- ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए भारत ने कई नए देशों से भी आयात बढ़ाया।
जून में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भारत का कच्चे तेल का आयात
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत ने औसतन 4.93 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD) कच्चा तेल आयात किया। यह किसी भी जून महीने में अब तक का सर्वाधिक आयात है।
पूरे महीने के हिसाब से देखें तो भारत ने करीब 147.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा। यह रिकॉर्ड ऐसे समय में बना है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई संबंधी जोखिम लगातार बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिफाइनरियों ने समय रहते खरीदारी बढ़ाकर संभावित सप्लाई संकट से खुद को सुरक्षित रखने की रणनीति अपनाई।
रूस बना भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता
जून महीने में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल निर्यातक बना रहा। आंकड़ों के मुताबिक भारत ने रूस से प्रतिदिन लगभग 2.6 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात किया।
इस तरह जून में कुल मिलाकर लगभग 78 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल भारत पहुंचा। यह भारत के कुल मासिक आयात का आधे से अधिक हिस्सा है।
सबसे खास बात यह रही कि मई की तुलना में जून में रूस से आयात 36.5% बढ़ गया। इससे साफ है कि भारतीय रिफाइनरियों ने डिस्काउंटेड रूसी तेल का भरपूर लाभ उठाया।
भारतीय रिफाइनरों की रणनीति रही सफल
Kpler में रिफाइनिंग सप्लाई एंड मॉडलिंग के लीड एनालिस्ट सुमित रिटोलिया के अनुसार, भारत ने एक साथ दो बड़े लक्ष्य हासिल किए—
- रिकॉर्ड स्तर पर तेल आयात बनाए रखा।
- सप्लाई के स्रोतों में विविधता भी बढ़ाई।
उनके अनुसार पिछले करीब 100 दिनों में भारत दुनिया के उन बड़े आयातकों में शामिल रहा जिसने बदलते वैश्विक हालात के बावजूद अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सफलतापूर्वक सुरक्षित रखा।
भारतीय कंपनियों ने केवल सस्ती कीमतों का लाभ नहीं उठाया बल्कि संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग देशों से खरीदारी जारी रखी।
यूक्रेन युद्ध के बाद बदली तस्वीर
फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए। इसके बाद रूस ने एशियाई देशों, खासकर भारत और चीन को रियायती दरों पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया।
भारत ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए रूस से तेल खरीद बढ़ाई। पिछले चार वर्षों में रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
इस रणनीति से भारत को दो बड़े फायदे मिले—
- आयात लागत कम हुई।
- घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव सीमित रखने में मदद मिली।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत की मजबूत तैयारी
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी अनिश्चितता ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया।
हालांकि भारत ने पहले से ही वैकल्पिक सप्लाई चैनल तैयार कर लिए थे। इसी कारण संभावित संकट का असर भारत पर अपेक्षाकृत कम देखने को मिला।
विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लाई के स्रोत बढ़ाने की रणनीति ने भारत को ऊर्जा सुरक्षा के मामले में मजबूत स्थिति में ला दिया है।
अब सिर्फ रूस पर निर्भर नहीं भारत
हालांकि रूस सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, लेकिन भारत ने अन्य देशों से भी तेल आयात बढ़ाया है।
भारत वर्तमान में इन देशों से कच्चा तेल खरीदता है—
- रूस
- अमेरिका
- ब्राजील
- ओमान
- वेनेज़ुएला
- अंगोला
- पश्चिम अफ्रीकी देश
- दक्षिण अमेरिकी उत्पादक देश
इससे किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम हुई है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों जरूरी है विविधता?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एक देश या क्षेत्र में युद्ध, प्रतिबंध या सप्लाई बाधित होती है तो दूसरे स्रोतों से आयात जारी रखा जा सकता है।
भारत की यही रणनीति भविष्य में भी उसे वैश्विक ऊर्जा बाजार के झटकों से बचाने में मदद करेगी।
इसके अलावा विभिन्न देशों के बीच प्रतिस्पर्धा होने से बेहतर कीमतों पर तेल खरीदने का अवसर भी मिलता है।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता भी बनी बड़ी ताकत
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ताओं में शामिल है। देश की बड़ी रिफाइनिंग कंपनियां—
- इंडियन ऑयल
- भारत पेट्रोलियम
- हिंदुस्तान पेट्रोलियम
- रिलायंस इंडस्ट्रीज
- नायरा एनर्जी
लगातार अलग-अलग ग्रेड के कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता विकसित कर चुकी हैं। यही कारण है कि भारत कई देशों से आने वाले विभिन्न प्रकार के क्रूड ऑयल का प्रभावी उपयोग कर पा रहा है।
आगे क्या रहेगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक बाजार में भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है तो भारत आने वाले महीनों में भी सप्लाई के स्रोतों में विविधता बनाए रख सकता है।
यदि रूस डिस्काउंट पर तेल उपलब्ध कराता रहा तो भारतीय रिफाइनरियां वहां से खरीद जारी रख सकती हैं। वहीं अमेरिका, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से आयात बढ़ाकर भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगा।
निष्कर्ष
जून 2026 के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने केवल रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल आयात नहीं किया, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपनी ऊर्जा रणनीति को भी सफलतापूर्वक लागू किया है। रूस से रिकॉर्ड खरीदारी के साथ-साथ अन्य देशों से आयात बढ़ाकर भारत ने यह साबित किया है कि वह अब केवल एक स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान दे रहा है। आने वाले समय में यही रणनीति भारत को वैश्विक तेल बाजार के उतार-चढ़ाव से बेहतर तरीके से बचाने में मदद कर सकती है।


