Coal India Production: देश में बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India) के कोयला उत्पादन में चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.5% की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि राहत की बात यह रही कि कंपनी की कोयला आपूर्ति (ऑफटेक) में बढ़ोतरी हुई, जिससे बिजली संयंत्रों के लिए ईंधन उपलब्ध कराने में कोई बड़ी बाधा नहीं आई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मांग लगातार बढ़ रही है तो उत्पादन आखिर क्यों घटा?
HighLights
- अप्रैल-जून तिमाही में कोयला उत्पादन 7.5% घटकर 16.96 करोड़ टन।
- जून महीने में भी उत्पादन 0.6% कम रहा।
- कोयला आपूर्ति (ऑफटेक) में 3.5% की बढ़ोतरी।
- बिजली क्षेत्र की मांग रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है।
- अगले वर्ष 300 गीगावाट बिजली मांग की तैयारी।
पहली तिमाही में 7.5% घटा उत्पादन
सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 16.96 करोड़ टन कोयले का उत्पादन किया। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का उत्पादन 18.33 करोड़ टन था। इस तरह सालाना आधार पर उत्पादन में करीब 7.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
कोल इंडिया देश के कुल कोयला उत्पादन में 80 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी रखती है। ऐसे में इसके उत्पादन में गिरावट का असर पूरे ऊर्जा क्षेत्र पर नजर रखा जाता है।
जून महीने में भी उत्पादन रहा कमजोर
जून 2026 के दौरान भी कंपनी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। इस महीने उत्पादन 5.74 करोड़ टन रहा, जबकि जून 2025 में यह 5.78 करोड़ टन था। यानी जून में उत्पादन में 0.6 फीसदी की मामूली गिरावट आई।
हालांकि सभी अनुषंगी कंपनियों का प्रदर्शन समान नहीं रहा।
जिन कंपनियों का उत्पादन घटा:
- भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL)
- महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL)
जिन कंपनियों का उत्पादन बढ़ा:
- साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL)
- ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL)
- सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL)
- वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL)
राहत की बात: कोयला आपूर्ति बढ़ी
उत्पादन घटने के बावजूद कंपनी ने ग्राहकों को अधिक मात्रा में कोयला उपलब्ध कराया। जून महीने में कोयला आपूर्ति (ऑफटेक) 7.5 फीसदी बढ़कर 6.58 करोड़ टन पहुंच गई, जबकि पिछले साल जून में यह 6.12 करोड़ टन थी।
वहीं अप्रैल-जून तिमाही में कुल कोयला आपूर्ति 3.5 फीसदी बढ़कर 19.77 करोड़ टन रही। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी ने उपलब्ध स्टॉक और बेहतर लॉजिस्टिक्स के जरिए बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया।
बिजली की मांग लगातार बढ़ रही
देश में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। केंद्रीय बिजली मंत्रालय के अनुसार मई 2026 में भारत ने 271 गीगावाट की अब तक की सबसे अधिक बिजली मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया।
सरकार का अनुमान है कि अगले वर्ष बिजली की मांग में करीब 30 गीगावाट की और बढ़ोतरी हो सकती है। इसी को देखते हुए 300 गीगावाट तक की मांग पूरी करने की तैयारी की जा रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां, तेज गर्मी, एयर कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली की मांग लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है।
उत्पादन घटने की संभावित वजह क्या रही?
हालांकि कंपनी ने उत्पादन में गिरावट के लिए विस्तृत कारण नहीं बताए हैं, लेकिन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं।
- कुछ प्रमुख खदानों में उत्पादन प्रभावित होना।
- मानसून के कारण खनन गतिविधियों पर असर।
- कुछ सहायक कंपनियों का कमजोर प्रदर्शन।
- परिचालन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियां।
- पर्यावरण और भूमि संबंधी स्वीकृतियों में देरी।
इसके बावजूद कंपनी ने आपूर्ति बढ़ाकर बिजली क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश की है।
पिछले वित्त वर्ष में भी रहा था दबाव
वित्त वर्ष 2025-26 में भी कोल इंडिया का कुल उत्पादन 1.7 फीसदी घटकर 76.81 करोड़ टन रहा था। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 78.11 करोड़ टन कोयले का उत्पादन किया था।
यानी लगातार दूसरे वर्ष उत्पादन वृद्धि की रफ्तार कमजोर दिखाई दे रही है, जबकि देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है।
देश की ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका
भारत में आज भी लगभग 70 फीसदी बिजली उत्पादन कोयले पर आधारित है। ऐसे में कोल इंडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कंपनी ताप विद्युत संयंत्रों के लिए सबसे बड़ी ईंधन आपूर्तिकर्ता है।
आने वाले वर्षों में यदि बिजली की मांग लगातार बढ़ती है, तो कोल इंडिया के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाना, नई खदानों का विकास करना और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना बड़ी चुनौती होगी।


