HighLights
- तेलंगाना सरकार चावल निर्यात बढ़ाने के लिए विशेष नीति तैयार कर रही है।
- नई नीति से राइस मिलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक आसान पहुंच मिलेगी।
- राज्य के धान किसानों को बेहतर कीमत और नए खरीदार मिलने की उम्मीद।
- तेलंगाना में करीब 3 करोड़ टन चावल का उत्पादन, जबकि खपत केवल 36 लाख टन।
नई दिल्ली। देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल तेलंगाना अब चावल निर्यात (Rice Export) को नई रफ्तार देने की तैयारी में है। राज्य सरकार एक विशेष चावल निर्यात नीति (Rice Export Policy) तैयार कर रही है, जिसका उद्देश्य राज्य के राइस मिल उद्योग को घरेलू और वैश्विक बाजारों से जोड़ना है। इस नीति के जरिए निर्यात प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा ताकि चावल मिलों के साथ-साथ लाखों धान किसानों को भी इसका सीधा लाभ मिल सके।
राज्य सरकार का मानना है कि तेलंगाना में चावल का उत्पादन घरेलू जरूरतों से कई गुना अधिक है। ऐसे में निर्यात को बढ़ावा देकर अतिरिक्त उत्पादन का बेहतर उपयोग किया जा सकता है और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
क्यों बनाई जा रही है नई Rice Export Policy?
तेलंगाना के नागरिक आपूर्ति मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने हाल ही में आयोजित ‘Unlocking Market Potential: Advancing Fortified Rice in Telangana and Andhra Pradesh’ सम्मेलन में बताया कि सरकार चावल निर्यात को आसान बनाने के लिए नई नीति पर तेजी से काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में हर साल लगभग 3 करोड़ टन चावल का उत्पादन होता है, जबकि राज्य की घरेलू खपत केवल 36 लाख टन के आसपास है। यानी कुल उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा अतिरिक्त बच जाता है। इस अतिरिक्त उत्पादन को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
नई नीति के तहत निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा, जिससे राइस मिलों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और उन्हें नए विदेशी बाजारों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
किसानों को कैसे होगा फायदा?
यदि चावल निर्यात बढ़ता है तो इसका सबसे बड़ा लाभ धान उत्पादक किसानों को मिलने की संभावना है।
इसके प्रमुख फायदे इस प्रकार हो सकते हैं—
- धान की मांग बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है।
- अतिरिक्त उत्पादन की खरीद आसान होगी।
- किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- स्थानीय बाजार पर दबाव कम होगा।
- राइस मिलों की क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब निर्यात मजबूत होता है तो घरेलू बाजार में भी खरीद गतिविधियां बढ़ती हैं, जिससे कृषि क्षेत्र को सकारात्मक समर्थन मिलता है।
राइस मिल उद्योग को मिलेगा नया बाजार
नई नीति का एक बड़ा उद्देश्य तेलंगाना के राइस मिल उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
सरकार मिलों को निर्यात प्रक्रिया, लॉजिस्टिक्स, बाजार संपर्क और अन्य आवश्यक सुविधाओं में सहायता देने की तैयारी कर रही है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के राइस मिल संचालकों को भी विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने में आसानी होगी।
राज्य सरकार जल्द ही इस नीति के मसौदे (Draft Policy) को अंतिम रूप देकर लागू करने की तैयारी कर रही है।
फिलीपींस समेत कई देशों को शुरू हो चुका है निर्यात
उत्तम कुमार रेड्डी ने बताया कि तेलंगाना ने पहले ही फिलीपींस जैसे देशों को चावल का निर्यात शुरू कर दिया है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में अन्य देशों में भी तेलंगाना के चावल की पहुंच बढ़ाना है।
सरकार का कहना है कि निर्यात बढ़ाने के लिए उद्योगों को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा, जिससे राज्य कृषि निर्यात का बड़ा केंद्र बन सके।
भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक
भारत वैश्विक स्तर पर चावल निर्यात में पहले स्थान पर बना हुआ है। विभिन्न उद्योग रिपोर्टों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है।
देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी मात्रा में बासमती और गैर-बासमती चावल का निर्यात किया जाता है। ऐसे में तेलंगाना की नई निर्यात नीति लागू होने के बाद राज्य की हिस्सेदारी भी बढ़ने की संभावना है।
क्या होगा इस नीति का असर?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि नीति प्रभावी तरीके से लागू होती है तो इसके कई सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं—
- चावल निर्यात में तेजी आएगी।
- किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
- राइस मिल उद्योग का कारोबार मजबूत होगा।
- विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिलेगी।
- तेलंगाना कृषि निर्यात के प्रमुख राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।
सरकार फिलहाल इस नीति के अंतिम मसौदे पर काम कर रही है। इसके लागू होने के बाद राज्य के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.


