नई दिल्ली। लंबे समय बाद टाटा समूह की कंपनी टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals) के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। गुरुवार को कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर 6% से अधिक उछल गया। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी) से जुड़े नियमों में किया गया बदलाव माना जा रहा है। बाजार का मानना है कि नए नियमों से टाटा संस (Tata Sons) के संभावित IPO की संभावना फिर मजबूत हुई है, जिसका सीधा फायदा टाटा केमिकल्स जैसी कंपनियों को मिल सकता है।
RBI के फैसले से क्यों बढ़ी Tata Sons IPO की चर्चा?
RBI ने 24 जून को सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण NBFCs (Systemically Important NBFCs) की नई परिभाषा जारी की। केंद्रीय बैंक ने ‘अपर लेयर’ (Upper Layer) NBFCs के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की एसेट लिमिट तय की है।
इन नियमों के तहत जिन NBFCs की कुल संपत्ति (Assets) 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक होगी, उन्हें अपर लेयर कैटेगरी में रखा जाएगा। इस श्रेणी की कंपनियों पर अधिक सख्त नियामकीय नियम लागू होंगे।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों के बाद टाटा संस पर भविष्य में लिस्टिंग को लेकर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि निवेशकों ने टाटा केमिकल्स के शेयरों में जोरदार खरीदारी की।
टाटा केमिकल्स को कैसे होगा फायदा?
टाटा केमिकल्स के पास टाटा संस में करीब 3% हिस्सेदारी है, जिसकी अनुमानित वैल्यू लगभग 20,000 करोड़ रुपये बताई जाती है।
यदि भविष्य में टाटा संस का IPO आता है, तो इस हिस्सेदारी का वास्तविक बाजार मूल्य सामने आएगा। इसे बाजार की भाषा में Value Unlocking कहा जाता है।
विश्लेषकों के अनुसार इससे:
- टाटा केमिकल्स की बैलेंस शीट मजबूत हो सकती है।
- कंपनी की नेटवर्थ में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
- निवेशकों का भरोसा और बढ़ सकता है।
- शेयर की वैल्यूएशन को भी समर्थन मिल सकता है।
इसी उम्मीद के चलते गुरुवार को शेयर में तेज खरीदारी देखने को मिली।
RBI के नए नियम क्या कहते हैं?
RBI के अनुसार:
- जिन NBFCs की कुल एसेट 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक होगी, उन्हें Upper Layer में रखा जाएगा।
- इस श्रेणी की कंपनियों पर अतिरिक्त निगरानी और सख्त रेगुलेटरी नियम लागू होंगे।
- सरकारी NBFCs के लिए भी नई व्यवस्था लागू होगी।
- एसेट लिमिट और वर्गीकरण की समीक्षा हर तीन साल में की जाएगी।
केंद्रीय बैंक का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य वित्तीय प्रणाली की स्थिरता बनाए रखना और बड़े NBFCs पर प्रभावी निगरानी रखना है।
निवेशकों की नजर अब Tata Sons पर
टाटा संस लंबे समय से बाजार में सबसे चर्चित अनलिस्टेड कंपनियों में शामिल रही है। यदि भविष्य में इसका IPO आता है, तो इससे केवल टाटा केमिकल्स ही नहीं बल्कि टाटा समूह की अन्य शेयरधारक कंपनियों को भी फायदा मिल सकता है।
हालांकि, फिलहाल कंपनी की ओर से IPO को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए निवेशकों को केवल अटकलों के आधार पर निवेश का फैसला लेने से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


