नई दिल्ली। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। चीन ने अमेरिका के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए 10 अमेरिकी कंपनियों को अपनी एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट में शामिल कर लिया है। इस फैसले के बाद इन कंपनियों को चीन से कई महत्वपूर्ण और दोहरे उपयोग (Dual-Use) वाले उत्पादों की आपूर्ति नहीं मिल सकेगी।
चीन का यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने हाल ही में दर्जनों चीनी कंपनियों को अपनी “Chinese Military Companies” सूची में शामिल किया था। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई उसी का सीधा जवाब है और इससे दोनों देशों के बीच चल रहा व्यापार और तकनीकी संघर्ष और गहरा सकता है।
अमेरिका के कदम का चीन ने दिया जवाब
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा करते हुए कहा कि देश के एक्सपोर्ट कंट्रोल कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों के तहत 10 अमेरिकी कंपनियों को एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट में जोड़ा गया है। मंत्रालय के अनुसार यह फैसला 22 जून से प्रभावी हो गया है।
इसका मतलब यह है कि अब चीन की कंपनियां इन अमेरिकी संस्थाओं को ऐसे उत्पाद, तकनीक या सामग्री नहीं बेच पाएंगी जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका द्वारा 8 जून को उठाए गए फैसले के जवाब में लिया गया है। उस समय पेंटागन ने 54 नई चीनी कंपनियों को अपनी सैन्य कंपनियों की सूची में शामिल किया था, जिसके बाद इस सूची में कुल कंपनियों की संख्या बढ़कर 188 हो गई थी।
किन अमेरिकी कंपनियों पर लगा प्रतिबंध?
चीन द्वारा एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट में शामिल की गई कंपनियों में रक्षा, ड्रोन, एयरोस्पेस और रेयर अर्थ सेक्टर से जुड़ी कई प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं।
इन कंपनियों में शामिल हैं:
- Aveox Inc.
- Red Cat Holdings Inc.
- Teal Drones Inc.
- IMSAR
- Jaia Robotics Inc.
- Ball Aerospace & Technologies Corp.
- Oshkosh Defense
- L3Harris Maritime Services Inc.
- MP Materials Corp.
- USA Rare Earth Inc.
चीन का कहना है कि इन कंपनियों को संवेदनशील तकनीक और सामग्रियों की आपूर्ति रोकना राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा का दिया हवाला
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है। इसके अलावा चीन ने यह भी कहा कि वह परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे मुख्य वजह अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक और तकनीकी टकराव है।
अमेरिका ने चीनी कंपनियों के साथ क्या किया था?
अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने जून की शुरुआत में जिन 54 नई चीनी कंपनियों को अपनी सूची में जोड़ा था, उनमें कई बड़ी और चर्चित कंपनियां शामिल हैं।
इस सूची में शामिल प्रमुख नामों में:
- Alibaba
- BYD
- Tencent से जुड़ी इकाइयां
- एयरोस्पेस और टेक्नोलॉजी सेक्टर की कई कंपनियां
अमेरिकी कानून के तहत 30 जून से पेंटागन और उससे जुड़े विभाग इन सूचीबद्ध कंपनियों से सीधे उत्पाद या सेवाएं नहीं खरीद सकेंगे।
यही वजह मानी जा रही है कि चीन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी कंपनियों को निशाने पर लिया है।
46 अमेरिकी कंपनियों के उत्पाद खरीदने पर भी रोक
चीन ने सिर्फ एक्सपोर्ट कंट्रोल तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है। चीनी वित्त मंत्रालय ने एक अलग आदेश जारी कर सरकारी एजेंसियों को 46 अमेरिकी कंपनियों के उत्पाद खरीदने से भी रोक दिया है।
इन कंपनियों में दुनिया की कई बड़ी रक्षा कंपनियां शामिल हैं, जैसे:
- Lockheed Martin
- Raytheon
- Boeing की रक्षा इकाइयां
- अन्य अमेरिकी डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स
इस फैसले का असर रक्षा उपकरणों, एयरोस्पेस तकनीक और रणनीतिक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।
क्या बढ़ेगा US-China Trade War?
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ते प्रतिबंध वैश्विक सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर असर डाल सकते हैं। अमेरिका और चीन पहले ही सेमीकंडक्टर, एआई, रेयर अर्थ मिनरल्स और रक्षा तकनीक को लेकर आमने-सामने हैं।
अब चीन की नई कार्रवाई से यह संकेत मिल रहा है कि दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच आर्थिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में और तेज हो सकती है। इसका असर वैश्विक व्यापार, निवेश और शेयर बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है।


