नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। दिनभर उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और रुपये की मजबूती ने बाजार की धारणा को मजबूत बनाए रखा।
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 254.36 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,409.98 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 82.30 अंक यानी 0.34 प्रतिशत उछलकर 24,168 अंक पर बंद हुआ। यह लगातार पांचवां दिन रहा जब दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए।
बाजार में रही व्यापक खरीदारी
बाजार की चौड़ाई सकारात्मक रही। बीएसई पर कारोबार करने वाले लगभग 2,280 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि 1,772 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। करीब 169 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
निफ्टी के टॉप गेनर्स में मैक्स हेल्थकेयर, इंटरग्लोब एविएशन, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और अदाणी एंटरप्राइजेज शामिल रहे। दूसरी ओर इंफोसिस, मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, टाटा कंज्यूमर और टीसीएस जैसे शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।
सेक्टोरल इंडेक्स में कैसी रही चाल?
आईटी और एनर्जी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। मीडिया, फार्मा, पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक और रियल्टी इंडेक्स में करीब 0.5 प्रतिशत तक की मजबूती दर्ज की गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 0.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।
बाजार को किन वजहों से मिला सहारा?
1. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 1.66 प्रतिशत गिरकर 78.23 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देश के लिए राहत की खबर मानी जाती है क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होता है।
एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पलविया के मुताबिक, कच्चे तेल में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है और इससे महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
2. भू-राजनीतिक तनाव में कमी
वैश्विक निवेशकों की चिंता का एक बड़ा कारण रहे पश्चिम एशिया के तनाव में भी कमी देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की खबरों ने बाजार की धारणा को मजबूत किया। निवेशकों को उम्मीद है कि इससे ऊर्जा आपूर्ति पर किसी बड़े व्यवधान की आशंका कम होगी।
3. रुपये में लगातार मजबूती
भारतीय रुपया भी लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपया 20 पैसे की मजबूती के साथ 84.33 के स्तर पर बंद हुआ। मजबूत रुपया विदेशी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है और इससे आयात लागत भी कम होती है।
क्या कहते हैं बाजार विशेषज्ञ?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि घरेलू शेयर बाजार फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार करते हुए भी सकारात्मक रुख बनाए हुए हैं।
उनके अनुसार, अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर शुरुआती उत्साह देखने को मिला, लेकिन अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क भी किया है। यदि ऊर्जा कीमतों से महंगाई का दबाव बढ़ता है तो केंद्रीय बैंक वर्ष की दूसरी छमाही में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकते हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट और भारतीय बॉन्ड यील्ड में नरमी भविष्य में महंगाई संबंधी चिंताओं को कम कर सकती है। साथ ही मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और आकर्षक वैल्यूएशन के कारण बैंकिंग शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
आगे क्या रहेगा बाजार का फोकस?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की चाल, अमेरिकी फेड की नीतियों और विदेशी निवेशकों के रुख पर बनी रहेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है और वैश्विक तनाव कम रहता है तो भारतीय बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


