नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड बनने की तैयारी है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंजों में से एक National Stock Exchange (NSE) ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) के लिए बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (SEBI) के पास दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं। बाजार सूत्रों के अनुसार इस आईपीओ का आकार करीब ₹30,000 करोड़ हो सकता है, जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू साबित हो सकता है।
यदि यह इश्यू तय अनुमान के मुताबिक आता है तो यह अक्टूबर 2024 में आए Hyundai Motor India के ₹27,870 करोड़ के रिकॉर्ड आईपीओ को भी पीछे छोड़ देगा।
पूरी तरह OFS आधारित होगा NSE का IPO
दाखिल दस्तावेजों के अनुसार प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) पर आधारित होगा। यानी इस इश्यू के जरिए कंपनी कोई नया शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।
इस इश्यू में कुल 14.89 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे, जो NSE की लगभग 6 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है।
सबसे बड़े विक्रेताओं में शामिल हैं:
- State Bank of India (SBI) – 2.48 करोड़ शेयर
- एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड – 1.60 करोड़ शेयर
- कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड – 1.19 करोड़ शेयर
- अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) – 1.12 करोड़ शेयर
- Bank of Baroda – 1.10 करोड़ शेयर
- स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया – 1.09 करोड़ शेयर
दिलचस्प बात यह है कि Life Insurance Corporation of India (LIC) के पास NSE में सबसे बड़ी 10.72 फीसदी हिस्सेदारी है, लेकिन वह इस इश्यू में कोई शेयर नहीं बेच रही है।
भारत के 10 सबसे बड़े IPO
| रैंक | कंपनी | IPO साइज |
|---|---|---|
| 1 | NSE* | ₹30,000 करोड़ (अनुमानित) |
| 2 | Hyundai Motor India | ₹27,870 करोड़ |
| 3 | LIC | ₹21,008 करोड़ |
| 4 | Paytm (One97 Communications) | ₹18,300 करोड़ |
| 5 | Tata Capital | ₹15,512 करोड़ |
| 6 | Coal India | ₹15,199 करोड़ |
| 7 | HDB Financial Services | ₹12,500 करोड़ |
| 8 | Reliance Power | ₹11,700 करोड़ |
| 9 | LG Electronics India | ₹11,607 करोड़ |
| 10 | Swiggy | ₹11,327 करोड़ |
*NSE IPO का आकार बाजार अनुमानों पर आधारित है।
करीब एक दशक बाद खुला लिस्टिंग का रास्ता
NSE की लिस्टिंग योजना पिछले लगभग 10 वर्षों से अटकी हुई थी। एक्सचेंज ने पहली बार 2016 में करीब ₹10,000 करोड़ जुटाने के लिए आईपीओ दस्तावेज दाखिल किए थे, लेकिन को-लोकेशन विवाद और अन्य नियामकीय मुद्दों के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
इस साल जनवरी में SEBI से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिलने के बाद आईपीओ प्रक्रिया को फिर से गति मिली। NSE के बोर्ड ने 6 फरवरी को आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
को-लोकेशन विवाद क्या था?
को-लोकेशन मामले में कुछ ब्रोकरों पर NSE की ट्रेडिंग प्रणाली तक विशेष और तेज पहुंच हासिल करने के आरोप लगे थे। इस मामले के चलते वर्षों तक एक्सचेंज की लिस्टिंग प्रक्रिया रुकी रही।
मामले के निपटारे के लिए NSE ने 2025 में लगभग ₹1,388 करोड़ के भुगतान का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद लिस्टिंग की राह आसान होती दिखाई दी।
5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यूएशन
गैर-सूचीबद्ध बाजार में NSE का मूल्यांकन ₹5 लाख करोड़ से अधिक आंका जा रहा है। एक्सचेंज के करीब 1.8 लाख शेयरधारक हैं और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास की सबसे चर्चित लिस्टिंग में से एक हो सकता है।
NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और इसके सूचीबद्ध होने से निवेशकों को भारत के तेजी से बढ़ते पूंजी बाजार में सीधे हिस्सेदारी लेने का मौका मिलेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। NewsJagran किसी भी प्रकार की निवेश सलाह नहीं देता। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


