HighLights
- मई 2026 में भारत का चांदी आयात 81.6% घटकर 76 मिलियन डॉलर रह गया।
- सरकार ने चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया।
- DGFT ने चांदी को प्रतिबंधित श्रेणी में डालकर लाइसेंस अनिवार्य किया।
- भारत-यूएई व्यापार समझौते के कारण बने टैरिफ अंतर को रोकने के लिए उठाया गया कदम।
नई दिल्ली: भारत में चांदी (Silver) की रिकॉर्ड खरीदारी के बाद अब इसके आयात पर अचानक ब्रेक लग गया है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की ओर से आयात शुल्क बढ़ाने और लाइसेंसिंग नियम सख्त करने के बाद मई 2026 में चांदी का आयात 81.6 फीसदी तक गिर गया है। यह गिरावट इतनी बड़ी है कि अप्रैल के मुकाबले मई में चांदी का आयात लगभग पांच गुना कम हो गया।
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 में भारत ने 411 मिलियन डॉलर की चांदी आयात की थी, जबकि मई में यह घटकर केवल 76 मिलियन डॉलर रह गई। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब कुछ सप्ताह पहले ही केंद्र सरकार ने चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था और इसके आयात पर अतिरिक्त नियंत्रण भी लागू किए थे।
सरकार ने क्यों उठाया यह बड़ा कदम?
पिछले कुछ वर्षों में भारत में चांदी की मांग तेजी से बढ़ी है। निवेश, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और औद्योगिक उपयोग के कारण चांदी का आयात लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा था।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चांदी आयात 149.6 फीसदी की भारी बढ़ोतरी के साथ 12.05 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे पहले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा केवल 4.83 अरब डॉलर था। इतनी तेज वृद्धि ने सरकार की चिंता बढ़ा दी क्योंकि इससे व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता था।
इसी वजह से सरकार ने आयात को नियंत्रित करने के लिए चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने और लाइसेंसिंग सिस्टम लागू करने का फैसला लिया।
भारत-यूएई व्यापार समझौते से पैदा हुई नई चुनौती
GTRI की रिपोर्ट में बताया गया है कि आयात शुल्क बढ़ाने के बाद एक नई समस्या सामने आ गई थी। भारत और यूएई के बीच लागू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत यूएई से आने वाली कुछ वस्तुओं को शुल्क में रियायत मिलती है।
जब सामान्य आयात शुल्क 15 फीसदी तक बढ़ा, तब यूएई से आयात होने वाली चांदी को अपेक्षाकृत बड़ा टैरिफ लाभ मिलने लगा। इससे व्यापारियों के लिए यूएई के रास्ते चांदी भारत भेजना अधिक लाभदायक हो गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति जारी रहती तो बड़ी मात्रा में चांदी यूएई के जरिए भारत पहुंच सकती थी, जिससे सरकार के राजस्व और आयात नियंत्रण दोनों पर असर पड़ता।
DGFT ने तुरंत बंद किया ‘लूपहोल’
सरकार ने इस संभावित रास्ते को बंद करने के लिए तेजी से कार्रवाई की। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 16 मई 2026 को चांदी को ‘प्रतिबंधित श्रेणी’ (Restricted Category) में डाल दिया।
इस फैसले के बाद अब कोई भी व्यापारी बिना सरकारी अनुमति के चांदी आयात नहीं कर सकता। प्रत्येक आयातक को DGFT से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
यानी अब केवल शुल्क बढ़ाना ही नहीं बल्कि आयात की मात्रा पर भी सीधा नियंत्रण स्थापित कर दिया गया है।
एक महीने में दिख गया असर
सरकार की इस दोहरी रणनीति का असर बेहद तेजी से देखने को मिला। एक तरफ आयात शुल्क 15 फीसदी तक पहुंच गया और दूसरी तरफ लाइसेंसिंग की अनिवार्यता लागू हो गई।
इसके परिणामस्वरूप मई महीने में चांदी का आयात घटकर 76 मिलियन डॉलर रह गया। अप्रैल की तुलना में यह लगभग 82 फीसदी की गिरावट है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आयातकों ने नई व्यवस्था को समझने और लाइसेंस प्रक्रिया पूरी होने तक खरीदारी कम कर दी।
घरेलू बाजार पर क्या होगा असर?
चांदी का आयात कम होने से घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। यदि मांग मजबूत बनी रहती है और आयात सीमित रहता है, तो आने वाले महीनों में चांदी की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।
विशेष रूप से सोलर पैनल उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता और ज्वेलरी सेक्टर को कच्चे माल की लागत बढ़ने का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि सरकार का मानना है कि नियंत्रित आयात से अनावश्यक खरीदारी पर अंकुश लगेगा और व्यापार संतुलन बेहतर होगा।
आगे क्या रहेगी स्थिति?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में चांदी आयात का भविष्य पूरी तरह DGFT द्वारा जारी किए जाने वाले लाइसेंसों पर निर्भर करेगा।
यदि पर्याप्त लाइसेंस जारी किए जाते हैं तो आयात धीरे-धीरे सामान्य हो सकता है। वहीं सीमित लाइसेंस जारी होने की स्थिति में आयात दबाव में रह सकता है।
आयातक दो विकल्पों के साथ आगे बढ़ सकते हैं—
- यूएई से व्यापार समझौते के तहत उपलब्ध रियायतों का उपयोग करें।
- अन्य देशों से 15% आयात शुल्क चुकाकर चांदी मंगाएं।
दोनों ही मामलों में सरकारी अनुमति अब अनिवार्य रहेगी।
सोने पर क्यों नहीं लागू हुई ऐसी सख्ती?
दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने सोने (Gold) पर चांदी जैसी सख्त लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू नहीं की है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत-यूएई व्यापार समझौते के तहत सोने पर मिलने वाला टैरिफ लाभ काफी सीमित है। इसलिए सोने के मामले में व्यापारियों के लिए बड़े पैमाने पर शुल्क बचाने या वैकल्पिक मार्ग अपनाने की संभावना कम रहती है।
यही कारण है कि फिलहाल सरकार ने चांदी पर अधिक सख्त नियंत्रण लागू किए हैं जबकि सोने के लिए ऐसी आवश्यकता महसूस नहीं की गई।
निष्कर्ष
भारत में चांदी के आयात में आई 82 फीसदी की गिरावट केवल बाजार की मांग का परिणाम नहीं है, बल्कि सरकार की नई आयात नीति का सीधा असर है। बढ़ी हुई इंपोर्ट ड्यूटी और DGFT लाइसेंसिंग नियमों ने आयात को अचानक धीमा कर दिया है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार कितने लाइसेंस जारी करती है और इसका घरेलू चांदी बाजार तथा कीमतों पर क्या प्रभाव पड़ता है।


