नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। पिछले सप्ताह जहां ब्रेंट क्रूड दो महीने के निचले स्तर तक फिसल गया था, वहीं सोमवार सुबह इसमें करीब 4 फीसदी की और कमजोरी दर्ज की गई। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई राहत नहीं मिली है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 15 जून 2026 के लिए भी ईंधन के खुदरा दामों में कोई बदलाव नहीं किया।
दिलचस्प बात यह है कि मई महीने में पेट्रोल और डीजल के दाम चार बार बढ़ाए गए थे, लेकिन अब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल तेजी से सस्ता हो रहा है, तब उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल रही। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर क्रूड ऑयल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम क्यों नहीं घट रहे हैं?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्यों टूट रहा है कच्चा तेल
कमोडिटी बाजार के जानकारों के अनुसार पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने और संभावित कूटनीतिक समझौते की उम्मीदों ने कच्चे तेल पर दबाव बढ़ाया है। वैश्विक निवेशकों को लग रहा है कि यदि क्षेत्र में तनाव कम होता है तो तेल की सप्लाई बाधित नहीं होगी।
सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड लगभग 4.03 प्रतिशत गिरकर 83.81 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 4.68 प्रतिशत टूटकर 80.91 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों में यह गिरावट तेल आयात करने वाले देशों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत क्यों नहीं घटते
कई उपभोक्ताओं को लगता है कि जैसे ही कच्चा तेल सस्ता होगा, पेट्रोल और डीजल भी सस्ते हो जाएंगे। लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।
ईंधन की खुदरा कीमत केवल कच्चे तेल की लागत पर निर्भर नहीं करती। इसमें रिफाइनिंग लागत, फ्रेट चार्ज, डीलर कमीशन, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, राज्य सरकारों का वैट और अन्य कर भी शामिल होते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि तेल कंपनियां आमतौर पर कुछ समय तक अंतरराष्ट्रीय कीमतों के रुझान को देखती हैं। यदि गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है तभी खुदरा कीमतों में कटौती की संभावना बनती है।
इसके अलावा मई महीने में लगातार बढ़ोतरी के दौरान कंपनियों का तर्क था कि ऊंचे कच्चे तेल के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में कंपनियां पहले अपने मार्जिन को स्थिर करने की कोशिश भी कर सकती हैं।
मई में चार बार बढ़े थे दाम
विधानसभा चुनावों के बाद मई 2026 में तेल कंपनियों ने 11 दिनों के भीतर चार बार पेट्रोल और डीजल महंगा किया था।
15 मई को पेट्रोल में 3 रुपये और डीजल में 3.29 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई।
इसके बाद 19 मई को पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हुआ। फिर 23 मई को भी समान बढ़ोतरी की गई।
25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा किया गया। इसके बाद से कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल का ताजा रेट
| शहर | पेट्रोल का भाव (₹/लीटर) | डीजल का भाव (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹102.12 | ₹95.20 |
| कोलकाता | ₹113.51 | ₹99.82 |
| मुंबई | ₹111.21 | ₹97.83 |
| चेन्नई | ₹107.77 | ₹99.55 |
| नोएडा | ₹102.12 | ₹97.56 |
| चंडीगढ़ | ₹101.51 | ₹89.47 |
| लखनऊ | ₹101.89 | ₹95.36 |
| पटना | ₹113.37 | ₹99.36 |
| रांची | ₹105.26 | ₹100.49 |
| भोपाल | ₹114.57 | ₹99.64 |
दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है।
मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर है।
चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
चंडीगढ़ में पेट्रोल 101.51 रुपये और डीजल 89.47 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
लखनऊ में पेट्रोल 101.89 रुपये और डीजल 95.36 रुपये प्रति लीटर है।
पटना में पेट्रोल 113.37 रुपये और डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर है।
भोपाल में पेट्रोल 114.57 रुपये और डीजल 99.64 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
क्रूड ऑयल सस्ता होने से आम आदमी को क्या फायदा होगा
यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका फायदा कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है।
सबसे पहले तेल विपणन कंपनियों का आयात बिल कम होगा। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की संभावना बढ़ेगी।
दूसरा, ट्रांसपोर्ट लागत घटने से खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
तीसरा, सरकार का आयात बिल घटने से चालू खाते के घाटे और रुपये पर दबाव कम हो सकता है।
चौथा, महंगाई दर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव कम होगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है कच्चा तेल
भारत हर साल अरबों डॉलर का कच्चा तेल आयात करता है। जब तेल महंगा होता है तो देश का आयात बिल बढ़ जाता है और रुपये पर दबाव आता है। वहीं तेल सस्ता होने पर विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक दोनों ही कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार नजर रखते हैं क्योंकि इसका असर महंगाई, व्यापार घाटे और आर्थिक विकास पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड 80-85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है तो भारत के लिए यह अपेक्षाकृत आरामदायक स्तर माना जा सकता है।
ऐसे चेक करें अपने शहर का पेट्रोल-डीजल रेट
देश की प्रमुख तेल कंपनियां रोजाना सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए रेट अपडेट करती हैं।
इंडियन ऑयल के ग्राहक RSP लिखकर शहर का कोड जोड़ते हुए 9224992249 पर SMS भेज सकते हैं।
बीपीसीएल ग्राहक 9223112222 नंबर पर SMS भेजकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
एचपीसीएल उपभोक्ता HPPRICE लिखकर 9222201122 पर संदेश भेजकर अपने शहर का ताजा रेट जान सकते हैं।
आगे क्या है उम्मीद
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट बनी रहती है तो आने वाले दिनों में भारतीय उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल तेल कंपनियां कीमतों में किसी बदलाव के मूड में नहीं दिख रही हैं। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे टिकता है या नहीं। यदि ऐसा होता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की मांग और तेज हो सकती है।


