नई दिल्ली: वैश्विक बाजारों में पिछले कई सप्ताह से जारी अनिश्चितता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े बयान ने निवेशकों का भरोसा लौटा दिया है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हो सकता है तथा प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई फिलहाल रोक दी गई है। इसके बाद दुनिया भर के शेयर बाजारों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा।
शुक्रवार को कारोबार शुरू होते ही बीएसई सेंसेक्स 876 अंकों की बढ़त के साथ 74,709 के स्तर पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 250 अंक मजबूत होकर 23,412 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली और निवेशकों का रुझान जोखिम वाले एसेट्स की ओर बढ़ता नजर आया।
ट्रंप के बयान से क्यों बदला बाजार का मूड?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और सप्ताहांत तक किसी तरह की प्रगति देखने को मिल सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई फिलहाल स्थगित कर दी गई है।
पिछले तीन महीनों से मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को दबाव में रखा था। निवेशकों को डर था कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ट्रंप के बयान ने इन आशंकाओं को काफी हद तक कम किया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव की तुलना में शांति समझौते की संभावना को अधिक महत्व दे रहे हैं। यही कारण है कि वैश्विक इक्विटी बाजारों में तेजी देखने को मिली।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
मध्य पूर्व में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के बड़े हिस्से की आवाजाही इसी रास्ते से होती है।
यदि यह मार्ग बंद हो जाता है तो तेल की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है। पिछले कुछ महीनों में इसी आशंका के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई थी।
अब यदि तनाव कम होता है और यह मार्ग पूरी तरह सुरक्षित बना रहता है, तो तेल आपूर्ति सामान्य रहने की उम्मीद बढ़ जाएगी। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए क्यों अच्छी खबर?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में कमी सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक मानी जाती है।
तेल सस्ता होने से:
- आयात बिल कम होता है।
- चालू खाते का घाटा नियंत्रित रहता है।
- रुपये पर दबाव घटता है।
- महंगाई कम रखने में मदद मिलती है।
- सरकार पर ईंधन सब्सिडी का बोझ घट सकता है।
इसके अलावा एविएशन, पेंट, केमिकल, टायर और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनियों को भी लागत में राहत मिल सकती है।
किन सेक्टरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी?
बाजार खुलते ही बैंकिंग, ऑटो, आईटी और मेटल शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों ने उन कंपनियों में ज्यादा रुचि दिखाई जो वैश्विक आर्थिक माहौल बेहतर होने से फायदा उठा सकती हैं।
बैंकिंग शेयरों में तेजी का कारण यह माना जा रहा है कि यदि वैश्विक तनाव कम होता है तो विदेशी निवेशकों का भरोसा उभरते बाजारों में बढ़ सकता है। इससे भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पूंजी प्रवाह मजबूत हो सकता है।
ऑटो और उपभोक्ता कंपनियों के शेयरों को भी तेल कीमतों में नरमी से समर्थन मिला क्योंकि कम ईंधन लागत उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा दे सकती है।
विदेशी निवेशकों के लिए क्या संकेत?
मध्य पूर्व संकट के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने कई बाजारों में सतर्क रुख अपनाया था। अब यदि भू-राजनीतिक जोखिम कम होते हैं तो भारत जैसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले बाजारों में निवेश बढ़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिर बैंकिंग व्यवस्था और बढ़ते कॉरपोरेट मुनाफे विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में FII प्रवाह बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
क्या यह तेजी लंबे समय तक टिक सकती है?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार ट्रंप के बयान को सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है। हालांकि वास्तविक स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।
यदि शांति समझौते की दिशा में ठोस प्रगति होती है तो बाजार में तेजी का रुख जारी रह सकता है। वहीं किसी भी नकारात्मक घटनाक्रम से निवेशकों की धारणा फिर बदल सकती है।
इसलिए निवेशकों को केवल एक दिन की तेजी देखकर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय वैश्विक घटनाक्रम और कॉरपोरेट नतीजों पर भी नजर रखनी चाहिए।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान तेजी को लेकर उत्साहित होने के साथ-साथ सावधानी भी जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश जारी रखना बेहतर रणनीति हो सकती है।
तेल कीमतों, डॉलर इंडेक्स, विदेशी निवेश प्रवाह और मध्य पूर्व की स्थिति पर नजर रखना आने वाले दिनों में बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। यदि वैश्विक तनाव वास्तव में कम होता है तो भारतीय बाजार को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप के शांति संबंधी बयान ने वैश्विक बाजारों में राहत की लहर पैदा कर दी है। भारतीय शेयर बाजार ने भी इसका सकारात्मक स्वागत किया और निफ्टी तथा सेंसेक्स मजबूत बढ़त के साथ खुले। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को लेकर कम होती चिंताओं ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। अब बाजार की अगली दिशा अमेरिका-ईरान वार्ता की वास्तविक प्रगति और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी।


