नई दिल्ली: नेपाल द्वारा भारतीय आमों के आयात पर कथित प्रतिबंध लगाए जाने की खबरों के बीच भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि नेपाल ने भारतीय आमों के आयात पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया है और दोनों देशों के बीच आम का व्यापार सामान्य रूप से जारी है।
HighLights
- नेपाल सरकार ने भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध की खबरों को गलत बताया।
- जनवरी 2026 से अब तक 2005 टन भारतीय आम नेपाल भेजे जा चुके हैं।
- जून 2026 में ही 266 टन आम की 18 खेपों का निर्यात हुआ।
- हॉट वॉटर ट्रीटमेंट सहित कुछ नई आयात शर्तें लागू की गई हैं।
- भारत ने नए फाइटो-सैनिटरी नियमों पर अपनी चिंता भी जताई है।
मंत्रालय ने उन मीडिया रिपोर्टों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है जिनमें दावा किया गया था कि नेपाल ने भारत से आम के आयात पर रोक लगा दी है। भारत सरकार के अनुसार नेपाल सरकार ने स्वयं आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि भारतीय आमों का आयात निर्धारित नियमों के तहत बिना किसी रुकावट के जारी है।
नेपाल के ‘प्लांट क्वारंटाइन एंड पेस्टिसाइड मैनेजमेंट सेंटर’ ने 10 जून 2026 को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि भारतीय आमों पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं किया गया है। आयातकों को केवल निर्धारित फाइटो-सैनिटरी आवश्यकताओं का पालन करना होगा, जिसके बाद आयात परमिट और रिलीज ऑर्डर जारी किए जा रहे हैं।
नेपाल को भारतीय आमों का निर्यात लगातार जारी
भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार नेपाल भारतीय आमों का एक महत्वपूर्ण निर्यात बाजार बना हुआ है। वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक भारतीय आमों की बड़ी मात्रा नेपाल भेजी जा चुकी है।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक जनवरी 2026 से जून 2026 तक कुल 149 खेपों में लगभग 2005 टन आम नेपाल निर्यात किए गए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार सामान्य रूप से चल रहा है।
सिर्फ जून 2026 की बात करें तो अब तक 18 अलग-अलग खेपों के माध्यम से 266 टन भारतीय आम नेपाल पहुंच चुके हैं। यदि वास्तव में किसी प्रकार का प्रतिबंध लागू होता तो इस स्तर का निर्यात संभव नहीं होता।
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल भारतीय फलों और कृषि उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा और मजबूत व्यापारिक संबंधों के कारण दोनों देशों के बीच कृषि वस्तुओं का आदान-प्रदान लगातार बढ़ रहा है।
फाइटो-सैनिटरी प्रमाण पत्र क्यों है जरूरी?
नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय आमों के आयात के लिए वैध फाइटो-सैनिटरी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यह प्रमाण पत्र भारत सरकार के अधिकृत विभागों द्वारा जारी किया जाता है।
फाइटो-सैनिटरी प्रमाण पत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि निर्यात किए जा रहे कृषि उत्पाद किसी प्रकार के कीट, रोग या जैविक संक्रमण से मुक्त हों। यह अंतरराष्ट्रीय कृषि व्यापार का एक सामान्य नियम है जिसका पालन लगभग सभी देश करते हैं।
नेपाल के अधिकारियों के अनुसार निर्धारित मानकों का पालन करने वाले आयातकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है और आयात प्रक्रिया पहले की तरह जारी है।
हॉट वॉटर ट्रीटमेंट की नई शर्त क्या है?
हाल ही में नेपाल ने आमों के आयात से संबंधित कुछ तकनीकी शर्तों में बदलाव किया है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हॉट वॉटर ट्रीटमेंट (Hot Water Treatment – HWT) की आवश्यकता है।
हॉट वॉटर ट्रीटमेंट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें फलों को निर्धारित तापमान वाले गर्म पानी में कुछ समय तक रखा जाता है। इसका उद्देश्य संभावित कीटों और रोगों को समाप्त करना होता है ताकि आयातित फल स्थानीय कृषि उत्पादन के लिए खतरा न बनें।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रक्रिया दुनिया के कई देशों में पहले से लागू है और इसे कृषि सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, इस तरह के नए नियमों को लागू करते समय व्यापारिक साझेदार देशों के साथ पूर्व परामर्श को बेहतर माना जाता है।
भारत ने क्यों जताई चिंता?
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह नेपाल द्वारा लागू की गई नई फाइटो-सैनिटरी आवश्यकताओं का सम्मान करती है और निर्यातकों को इन नियमों का पालन करने में सहयोग भी दे रही है।
हालांकि भारत ने यह भी कहा है कि बिना पूर्व परामर्श के नए फाइटो-सैनिटरी उपाय लागू किए जाने को लेकर उसकी कुछ चिंताएं हैं। इस मुद्दे को दोनों देशों के बीच उचित राजनयिक और तकनीकी माध्यमों से उठाया जा रहा है।
भारत का मानना है कि कृषि व्यापार से जुड़े ऐसे बदलावों पर पहले से चर्चा होने पर व्यापारियों और निर्यातकों को तैयारी का पर्याप्त समय मिल सकता है।
WTO और IPPC नियमों का क्या संबंध है?
भारत इस मामले को विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सैनिटरी और फाइटो-सैनिटरी (SPS) समझौते तथा इंटरनेशनल प्लांट प्रोटेक्शन कन्वेंशन (IPPC) के ढांचे के अंतर्गत देख रहा है।
WTO का SPS समझौता देशों को खाद्य सुरक्षा और पौधों की सुरक्षा के लिए आवश्यक नियम बनाने की अनुमति देता है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करता है कि ऐसे नियम अनावश्यक व्यापार बाधा न बनें।
वहीं IPPC एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है जिसका उद्देश्य देशों के बीच सुरक्षित कृषि व्यापार को बढ़ावा देना और पौधों में फैलने वाले रोगों एवं कीटों को नियंत्रित करना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और नेपाल दोनों ही इन अंतरराष्ट्रीय ढांचों का हिस्सा हैं, इसलिए किसी भी तकनीकी मुद्दे का समाधान बातचीत और पारस्परिक सहयोग के माध्यम से निकाला जा सकता है।
किसानों और व्यापारियों के लिए क्या है संदेश?
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने किसानों, निर्यातकों, व्यापारियों और आम जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।
मंत्रालय के अनुसार भारतीय आमों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने की खबरों से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जबकि वास्तविकता यह है कि निर्यात प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत दुनिया के प्रमुख आम उत्पादक देशों में शामिल है और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में इसकी मजबूत मांग बनी हुई है। ऐसे में अफवाहों की बजाय आधिकारिक सूचनाओं को महत्व देना आवश्यक है।
नेपाल सरकार और भारत सरकार दोनों के ताजा बयानों से यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय आमों के आयात पर किसी प्रकार की रोक नहीं है। निर्धारित फाइटो-सैनिटरी मानकों और नई तकनीकी आवश्यकताओं का पालन करते हुए दोनों देशों के बीच आम का व्यापार पहले की तरह जारी रहेगा।


