नई दिल्ली। देश में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने और आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार लगातार पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क का विस्तार कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में कई शहरों और कस्बों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे लाखों घरों तक पाइप गैस पहुंची है।
इसी बीच सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर ऐसी खबरें सामने आई हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि सरकार लोगों को एलपीजी (LPG) सिलेंडर सरेंडर करने के लिए नोटिस भेजने वाली है। इस तरह के दावों ने उपभोक्ताओं के बीच भ्रम पैदा कर दिया है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि सरकार की वास्तविक नीति क्या है और PNG को लेकर उसकी प्राथमिकताएं क्या हैं।
भारत में घरेलू रसोई गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के जरिए करोड़ों परिवारों को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। वहीं दूसरी ओर, सरकार शहरों में PNG नेटवर्क का भी विस्तार कर रही है ताकि उपभोक्ताओं को गैस की लगातार आपूर्ति मिल सके और सिलेंडर बुकिंग जैसी परेशानियों से राहत मिले।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि PNG का सबसे बड़ा फायदा इसकी निरंतर उपलब्धता है। उपभोक्ताओं को सिलेंडर खत्म होने की चिंता नहीं रहती और गैस सीधे पाइपलाइन के जरिए घर तक पहुंचती है। इसके अलावा कई शहरों में PNG की कीमत भी एलपीजी की तुलना में प्रतिस्पर्धी मानी जाती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि जिन लोगों के पास PNG उपलब्ध है उन्हें अनिवार्य रूप से LPG कनेक्शन छोड़ना ही होगा। भारत में अभी भी बड़ी आबादी ऐसी है जहां पाइप गैस का नेटवर्क नहीं पहुंचा है। इसलिए एलपीजी आने वाले वर्षों में भी घरेलू ईंधन का महत्वपूर्ण स्रोत बना रहेगा।
सरकार का फोकस मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में PNG के उपयोग को बढ़ावा देना है जहां गैस पाइपलाइन नेटवर्क पहले से मौजूद है। इससे ऊर्जा वितरण व्यवस्था अधिक कुशल बन सकती है और सिलेंडर आधारित आपूर्ति प्रणाली पर दबाव कम हो सकता है।
PNG के विस्तार से उपभोक्ताओं को क्या फायदा होगा?
PNG उपयोगकर्ताओं को कई सुविधाएं प्रदान करती है। सबसे पहले, गैस की आपूर्ति लगातार बनी रहती है। दूसरे, उपभोक्ताओं को सिलेंडर की डिलीवरी का इंतजार नहीं करना पड़ता। तीसरे, मीटर आधारित बिलिंग होने से जितनी गैस उपयोग होती है, उसी के अनुसार भुगतान करना पड़ता है।
इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से भी आधुनिक PNG नेटवर्क में कई सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है। गैस वितरण कंपनियां नियमित निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था भी रखती हैं।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि भारत जैसे बड़े देश में एलपीजी और PNG दोनों की भूमिका बनी रहेगी। जहां पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है वहां PNG बेहतर विकल्प साबित हो सकती है, जबकि दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी की आवश्यकता बनी रहेगी।
आने वाले वर्षों में सरकार का लक्ष्य घरेलू ऊर्जा क्षेत्र को अधिक आधुनिक और कुशल बनाना है। इसी रणनीति के तहत सिटी गैस नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। हालांकि किसी भी नीति परिवर्तन को लेकर उपभोक्ताओं को केवल आधिकारिक सरकारी अधिसूचना और मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए।
निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि PNG को बढ़ावा देना सरकार की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। लेकिन LPG उपभोक्ताओं के लिए किसी भी अनिवार्य कार्रवाई या कनेक्शन सरेंडर से संबंधित दावों की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से करना आवश्यक है। इसलिए किसी भी वायरल संदेश या अपुष्ट रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेने से बचना चाहिए।
सोर्स: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय प्रेस रिलीज


