EPFO News: नौकरी बदलने, PF निकासी, EPS पेंशन और ग्रेच्युटी से जुड़े हर सवाल का जवाब
नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) देश के करोड़ों कर्मचारियों के रिटायरमेंट और सामाजिक सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार माना जाता है। हर महीने कर्मचारियों की सैलरी से PF कटता है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग आज भी यह नहीं जानते कि नौकरी बदलने के बाद PF का क्या करना चाहिए, वर्तमान कंपनी में रहते हुए कितना पैसा निकाला जा सकता है, EPS पेंशन फंड कैसे काम करता है और ग्रेच्युटी नहीं मिलने पर क्या अधिकार हैं।
इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए जागरण बिजनेस ने पर्सनल सीएफओ कंसल्टेंट एलएलपी के फाउंडर एवं सीईओ सुशील जैने से बातचीत की। उन्होंने EPFO से जुड़े 10 महत्वपूर्ण सवालों का विस्तार से जवाब दिया। आइए समझते हैं कि PF, EPS और ग्रेच्युटी से जुड़े नियम वास्तव में क्या कहते हैं।
नौकरी बदलने के बाद पुराना PF कब निकाल सकते हैं?
विशेषज्ञ के अनुसार यदि कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ने के बाद लगातार दो महीने तक बेरोजगार रहता है तो वह अपने PF खाते की पूरी राशि निकाल सकता है। हालांकि इसके लिए EPFO रिकॉर्ड में Date of Exit अपडेट होना जरूरी है।
कर्मचारी एक महीने की बेरोजगारी के बाद PF बैलेंस का 75 प्रतिशत निकाल सकता है, जबकि दो महीने पूरे होने पर शेष 25 प्रतिशत भी निकालने की अनुमति मिल जाती है।
ऑनलाइन क्लेम करने के लिए UAN, बैंक खाता और आधार से जुड़ी जानकारी अपडेट होना आवश्यक है। EPFO पोर्टल पर लॉगिन कर Online Services सेक्शन में जाकर क्लेम दायर किया जा सकता है।
क्या वर्तमान कंपनी में नौकरी करते हुए PF निकाला जा सकता है?
बहुत से कर्मचारियों को लगता है कि नौकरी के दौरान PF निकालना संभव नहीं है, जबकि ऐसा नहीं है। EPFO कुछ विशेष परिस्थितियों में आंशिक निकासी की अनुमति देता है।
यदि कर्मचारी को मेडिकल इमरजेंसी, शादी, उच्च शिक्षा, घर की मरम्मत या मकान खरीदने जैसी जरूरत हो तो वह नियमों के अनुसार अपने PF का एक हिस्सा निकाल सकता है।
मेडिकल या शादी के लिए कर्मचारी अपने योगदान और उस पर मिले ब्याज का 50 प्रतिशत तक निकाल सकता है। वहीं घर की मरम्मत जैसे मामलों में 90 प्रतिशत तक राशि निकालने की अनुमति मिल सकती है।
एक साल में कितनी बार PF निकाला जा सकता है?
EPFO ने आंशिक निकासी की कुल संख्या पर कोई सामान्य सीमा निर्धारित नहीं की है, लेकिन प्रत्येक उद्देश्य के लिए अलग-अलग नियम लागू होते हैं।
उदाहरण के तौर पर:
- शादी के लिए जीवनकाल में पांच बार निकासी की जा सकती है।
- उच्च शिक्षा के लिए दस बार तक निकासी की अनुमति है।
- घर खरीदने या निर्माण के लिए सामान्यतः एक बार निकासी की अनुमति मिलती है।
- मेडिकल इमरजेंसी में आवश्यकता के अनुसार कई बार निकासी संभव है।
इसलिए निकासी की संख्या पूरी तरह उद्देश्य और पात्रता पर निर्भर करती है।
EPS पेंशन फंड क्या है और इसे कब निकाला जा सकता है?
EPF खाते में कंपनी के योगदान का एक हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जमा होता है। यही राशि भविष्य में मासिक पेंशन का आधार बनती है।
यदि किसी कर्मचारी की कुल सेवा अवधि 10 साल से कम है तो वह EPS में जमा राशि एकमुश्त निकाल सकता है।
लेकिन यदि कर्मचारी ने 10 साल या उससे अधिक सेवा पूरी कर ली है तो EPS राशि निकालने की अनुमति नहीं मिलती। ऐसे मामलों में कर्मचारी को 58 वर्ष की आयु के बाद मासिक पेंशन का लाभ मिलता है।
क्या पेंशन वाले हिस्से पर भी ब्याज मिलता है?
यह सवाल अक्सर कर्मचारियों के मन में रहता है। विशेषज्ञ के अनुसार EPS खाते में जमा राशि पर कोई ब्याज नहीं मिलता।
ब्याज केवल EPF खाते में जमा राशि पर मिलता है। कर्मचारी का 12 प्रतिशत योगदान और कंपनी के योगदान का एक हिस्सा EPF खाते में जाता है, जिस पर EPFO हर वर्ष ब्याज घोषित करता है।
वहीं EPS फंड एक सामूहिक पेंशन पूल की तरह काम करता है, जिससे भविष्य में पेंशन का भुगतान किया जाता है।
पुराने PF खाते मर्ज नहीं किए तो क्या नुकसान होगा?
आज कई कर्मचारी अपने करियर में 5 से 6 कंपनियां बदलते हैं, लेकिन सभी PF खातों को मर्ज नहीं करते। यह भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है।
सबसे बड़ा नुकसान यह है कि अलग-अलग खातों में सेवा अवधि बंट जाती है। इससे 5 साल की निरंतर सेवा का लाभ प्रभावित हो सकता है और PF निकासी पर TDS कटने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके अलावा EPS सेवा अवधि भी पूरी तरह नहीं जुड़ पाती, जिससे पेंशन पात्रता प्रभावित हो सकती है। पुराने खातों को ट्रैक करना भी मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नौकरी बदलने पर पुराने PF खाते को नए UAN से लिंक कर ट्रांसफर जरूर कर लेना चाहिए।
क्या 12 प्रतिशत से ज्यादा PF में जमा कर सकते हैं?
यदि कोई कर्मचारी अपनी रिटायरमेंट बचत बढ़ाना चाहता है तो वह वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) का विकल्प चुन सकता है।
VPF के तहत कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 100 प्रतिशत तक योगदान कर सकता है। इस अतिरिक्त राशि पर भी EPF के बराबर ब्याज मिलता है और आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स लाभ भी प्राप्त होता है।
कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान एक साथ निकाल सकते हैं?
नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट की स्थिति में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के योगदान को एक साथ निकाला जा सकता है।
यदि कर्मचारी वर्तमान में नौकरी कर रहा है तो कुछ विशेष परिस्थितियों में दोनों हिस्सों से आंशिक निकासी की अनुमति मिल सकती है। हालांकि इसके लिए EPFO के निर्धारित नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक होता है।
पेंशन की पूरी राशि निकाल ली तो क्या भविष्य में पेंशन मिलेगी?
विशेषज्ञ के अनुसार यदि कर्मचारी 10 साल से कम सेवा अवधि में EPS की पूरी राशि निकाल लेता है तो भविष्य में उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा।
दूसरी ओर 10 साल से अधिक सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी पेंशन राशि नहीं निकाल सकते। उन्हें स्कीम सर्टिफिकेट मिलता है, जिसके आधार पर 58 वर्ष की आयु के बाद नियमित पेंशन शुरू होती है।
इसलिए पेंशन फंड निकालने से पहले दीर्घकालिक लाभ और रिटायरमेंट योजना पर विचार करना जरूरी है।
कंपनी ग्रेच्युटी नहीं दे रही तो क्या करें?
यदि किसी कर्मचारी ने कम से कम पांच साल या उससे अधिक की पात्र सेवा पूरी कर ली है और कंपनी ग्रेच्युटी देने से इनकार कर रही है, तो सबसे पहले लिखित रूप में कंपनी को आवेदन देना चाहिए।
यदि 30 दिन के भीतर भुगतान नहीं होता तो कर्मचारी अपने क्षेत्र के श्रम आयुक्त (Labour Commissioner) कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है।
नियमों के अनुसार दोषी पाए जाने पर कंपनी को ब्याज और जुर्माने के साथ ग्रेच्युटी का भुगतान करना पड़ सकता है।
NewsJagran Analysis
EPFO से जुड़े नियमों की जानकारी न होने के कारण लाखों कर्मचारी अपने अधिकारों का पूरा लाभ नहीं उठा पाते। विशेष रूप से PF खातों को मर्ज न करना, EPS नियमों को न समझना और समय पर ग्रेच्युटी क्लेम न करना भविष्य में आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि नौकरी बदलने के बाद PF ट्रांसफर करना, UAN को सक्रिय रखना और EPS सेवा अवधि का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना हर कर्मचारी के लिए जरूरी है। आने वाले समय में EPFO की डिजिटल सेवाओं के विस्तार से PF निकासी और पेंशन प्रक्रियाएं और आसान हो सकती हैं।
Disclaimer
EPFO नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले EPFO की आधिकारिक वेबसाइट या योग्य वित्तीय सलाहकार से जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।


