महाराष्ट्र में प्याज किसानों की मुश्किलें बढ़ीं, अब केंद्र ने लिया बड़ा फैसला
देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्यों में शामिल महाराष्ट्र में किसानों को इस समय भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है। कई मंडियों में किसानों को प्याज का भाव ₹1 प्रति किलो से भी कम मिला, जबकि किसानों का कहना है कि उत्पादन लागत ही करीब ₹20 प्रति किलो बैठ रही है। ऐसे में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
महाराष्ट्र के नासिक, संभाजीनगर, बीड, पुणे और अहमदनगर जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक जिलों में लगातार गिरती कीमतों के कारण किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी। कई जगहों पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन भी किया और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
इसी बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर प्याज किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। इस बैठक के बाद किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है।
🔸Union Home and Cooperation Minister Amit Shah chairs a high level review meeting regarding issues related to sugarcane and onion producing farmers in the presence of CM Devendra Fadnavis, Union Minister Shivraj Singh Chouhan and Union Minister Pralhad Joshi.
DCM Eknath Shinde,… pic.twitter.com/lxj06qMKfX
— CMO Maharashtra (@CMOMaharashtra) May 27, 2026 NAFED और NCCF अब सीधे किसानों से खरीदेंगी प्याज
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने प्याज खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने पर सहमति जताई है। अब NAFED और NCCF व्यापारियों के माध्यम से नहीं बल्कि सीधे किसानों से प्याज खरीदेंगी।
सरकार का मानना है कि इससे किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी। अभी तक किसान अक्सर व्यापारियों पर निर्भर रहते थे, जिसके कारण उन्हें बहुत कम कीमत मिलती थी।
फडणवीस ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार प्याज खरीद का लक्ष्य 2 लाख टन से बढ़ाकर 10 लाख टन तक करने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो बाजार में किसानों को बड़ा सहारा मिल सकता है।
किसानों को क्यों मिल रहे हैं इतने कम दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार महाराष्ट्र में प्याज का उत्पादन काफी अधिक हुआ है। दूसरी ओर निर्यात की गति धीमी रहने और घरेलू मांग कमजोर होने से मंडियों में सप्लाई बढ़ गई। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा।
कई किसान संगठनों का कहना है कि मंडियों में इतनी खराब स्थिति रही कि ट्रांसपोर्ट, हमाली और अन्य कटौतियों के बाद कुछ किसानों को केवल 50 पैसे प्रति किलो तक का प्रभावी भाव मिला।
कृषि बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक:
- अधिक उत्पादन
- कमजोर निर्यात मांग
- भंडारण की कमी
- बिचौलियों का दबाव
इन कारणों से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
प्याज निर्यात पर नहीं लगेगा प्रतिबंध
बैठक के बाद एक और बड़ी राहत यह मिली कि केंद्र सरकार ने प्याज के निर्यात पर कोई अतिरिक्त शुल्क या प्रतिबंध नहीं लगाने का आश्वासन दिया है।
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई बार प्याज निर्यात पर प्रतिबंध या शुल्क लगाया था। किसानों का कहना था कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज की प्रतिस्पर्धा कमजोर हुई और घरेलू बाजार में दाम टूट गए।
अब सरकार के इस रुख से किसानों और निर्यातकों दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
प्याज बीज निर्यात पर सख्ती की तैयारी
बैठक में प्याज के बीजों के बड़े पैमाने पर निर्यात को लेकर भी चर्चा हुई। महाराष्ट्र सरकार ने मांग की कि प्याज बीजों के निर्यात पर भारी शुल्क लगाया जाए ताकि घरेलू उपलब्धता बनी रहे।
बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने इस मांग पर भी सकारात्मक रुख दिखाया है। इससे आने वाले समय में घरेलू किसानों को गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था में प्याज का कितना महत्व?
महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है। नासिक जिले को देश की प्याज राजधानी भी कहा जाता है। राज्य के लाखों किसान सीधे तौर पर प्याज खेती से जुड़े हुए हैं।
कृषि मंत्रालय और विभिन्न बाजार रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के कुल प्याज उत्पादन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी लगभग 35-40% तक रहती है। ऐसे में प्याज की कीमतों में गिरावट का असर राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
क्या किसानों को अब बेहतर दाम मिलेंगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि NAFED और NCCF बड़े स्तर पर सीधे खरीद शुरू करती हैं तो बाजार में दामों को सहारा मिल सकता है। इससे किसानों को न्यूनतम समर्थन जैसा प्रभाव मिलेगा और बिचौलियों की मनमानी भी कम हो सकती है।
हालांकि कई कृषि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि केवल सरकारी खरीद पर्याप्त नहीं होगी। सरकार को:
- बेहतर स्टोरेज व्यवस्था
- निर्यात नीति में स्थिरता
- प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा
- किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मजबूत करना
जैसे कदम भी उठाने होंगे।
किसानों और बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले से सबसे बड़ा फायदा उन किसानों को हो सकता है जिन्हें वर्तमान में लागत से भी कम दाम मिल रहे हैं। यदि सरकारी एजेंसियां बड़े स्तर पर खरीद करती हैं तो बाजार में कीमतों में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है।
इसके अलावा निर्यात पर प्रतिबंध न लगाने के फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज की मांग भी स्थिर रह सकती है।
FAQs
किसानों को कितना दाम मिल रहा था?
कई मंडियों में किसानों को ₹1 प्रति किलो से भी कम भाव मिला। कटौतियों के बाद कुछ किसानों को करीब 50 पैसे प्रति किलो तक का प्रभावी मूल्य मिला।
NAFED और NCCF क्या करेंगी?
दोनों एजेंसियां अब व्यापारियों की बजाय सीधे किसानों से प्याज खरीदेंगी।
क्या प्याज निर्यात पर प्रतिबंध लगेगा?
फिलहाल सरकार ने आश्वासन दिया है कि प्याज निर्यात पर कोई अतिरिक्त प्रतिबंध या शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
प्याज खरीद लक्ष्य कितना हो सकता है?
सरकार 2 लाख टन की जगह 10 लाख टन तक प्याज खरीदने पर विचार कर सकती है।
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