Highlights
- भारतीय बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ 15.90% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची
- देश में NPA घटकर सिर्फ 0.40% रह गया
- MSME सेक्टर के लिए 2.25 लाख करोड़ रुपये का ट्रेड गारंटी प्रोग्राम शुरू
- जनधन योजना के तहत 58 करोड़ बैंक खाते खोले गए
- मुद्रा योजना में 56 करोड़ लोन मंजूर, 67% लाभ महिलाओं को
नई दिल्ली। भारतीय बैंकिंग सेक्टर ने वित्त वर्ष 2026 में एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ 15.90 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसे अब तक की सबसे तेज वृद्धि दर माना जा रहा है। इसके साथ ही देश में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA) घटकर लगभग समाप्ति की स्थिति में पहुंच गई हैं। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू के अनुसार, देश में एनपीए का स्तर घटकर केवल 0.40 प्रतिशत रह गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय बैंकिंग प्रणाली के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि कुछ वर्षों पहले तक सरकारी बैंकों पर खराब ऋणों का भारी दबाव था। अब स्थिति पूरी तरह बदलती दिखाई दे रही है। मजबूत पूंजी आधार, डिजिटल बैंकिंग, बेहतर रिकवरी तंत्र और सख्त निगरानी के चलते बैंकिंग सेक्टर की स्थिति पहले के मुकाबले काफी मजबूत हुई है।
भारतीय बैंकिंग सेक्टर ने कैसे बदली तस्वीर?
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक और निजी दोनों सेक्टर के बैंक शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में पहली बार बैंकिंग सेक्टर ने इतनी ऊंची वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है।
एक समय ऐसा था जब भारतीय बैंक विशेषकर सरकारी बैंक भारी एनपीए संकट से जूझ रहे थे। बड़े कॉरपोरेट डिफॉल्ट, कमजोर रिकवरी सिस्टम और आर्थिक सुस्ती के कारण बैंकों की बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ गया था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सरकार और रिजर्व बैंक की सख्ती ने हालात बदल दिए।
एनपीए में भारी गिरावट के पीछे ये बड़े कारण
दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) का प्रभाव, बड़े डिफॉल्ट खातों की रिकवरी, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, खराब लोन वितरण पर नियंत्रण, बैंकिंग सेक्टर में पूंजी निवेश, सरकारी बैंकों का मर्जर और सुधार विशेषज्ञों के मुताबिक, कम एनपीए का सीधा फायदा यह होता है कि बैंक ज्यादा आत्मविश्वास के साथ नए लोन जारी कर सकते हैं। इससे अर्थव्यवस्था में निवेश और खपत दोनों बढ़ती हैं।
MSME सेक्टर को मिला 2.25 लाख करोड़ रुपये का सुरक्षा कवच
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्र सरकार ने माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) सेक्टर को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 2.25 लाख करोड़ रुपये का ट्रेड गारंटी प्रोग्राम शुरू किया है।
यह योजना खास तौर पर उन छोटे कारोबारियों और उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो निर्यात, आयात या सप्लाई चेन से जुड़े हैं। पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ी है। ऐसे में MSME सेक्टर को वित्तीय सहायता देना सरकार की प्राथमिकता बन गया है।
MSME सेक्टर के लिए यह योजना क्यों अहम?
भारत की अर्थव्यवस्था में MSME सेक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
MSME सेक्टर:
देश के करोड़ों लोगों को रोजगार देता है, निर्यात में बड़ा योगदान करता है, ग्रामीण और अर्धशहरी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की रीढ़ माना जाता है लेकिन वैश्विक संकट, महंगी फंडिंग और कमजोर मांग के कारण छोटे उद्योगों पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में सरकार का ट्रेड गारंटी प्रोग्राम बैंकों को MSME सेक्टर को अधिक लोन देने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
पूर्वोत्तर राज्यों में 604 करोड़ रुपये के लोन स्वीकृत
एम. नागराजू ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए बताया कि 8,000 लाभार्थियों के लिए 604 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। सरकार का फोकस अब वित्तीय समावेशन को देश के दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाने पर है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि पूर्वोत्तर भारत आने वाले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, कृषि और व्यापार का बड़ा केंद्र बन सकता है। ऐसे में बैंकिंग और वित्तीय पहुंच बढ़ाना विकास के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
जनधन योजना ने बदली बैंकिंग की तस्वीर
सरकार की वित्तीय समावेशन योजनाओं का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। सचिव नागराजू ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 58 करोड़ बैंक खाते खोले गए हैं।
सबसे खास बात यह है कि 32 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं, करोड़ों लोगों को पहली बार बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया, DBT और सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे खातों में पहुंचा, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बैंकिंग तेजी से बढ़ी जनधन योजना को दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजनाओं में गिना जाता है।
मुद्रा योजना में महिलाओं की मजबूत भागीदारी
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत पिछले 12 वर्षों में 56 करोड़ ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से लगभग 67 प्रतिशत लोन महिलाओं को दिए गए हैं।
यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि भारत में महिला उद्यमिता लगातार मजबूत हो रही है। छोटे कारोबार, घरेलू उद्योग, ऑनलाइन व्यापार और स्वरोजगार गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है।
मुद्रा योजना से किन क्षेत्रों को फायदा?
छोटे दुकानदार, स्टार्टअप, घरेलू उद्योग, ग्रामीण व्यापार, महिला स्वयं सहायता समूह, सर्विस सेक्टर विशेषज्ञों का कहना है कि महिला उद्यमियों को आसान फंडिंग मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए आगे क्या?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर एनपीए नियंत्रण में रहता है और क्रेडिट ग्रोथ इसी तरह जारी रहती है तो आने वाले वर्षों में भारतीय बैंकिंग सेक्टर दुनिया के सबसे मजबूत बैंकिंग सिस्टम में शामिल हो सकता है।
हालांकि चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं पश्चिम एशिया संकट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक मंदी का खतरा, निर्यात बाजार में कमजोरी, ब्याज दरों का दबाव इन चुनौतियों के बावजूद भारत की घरेलू मांग और मजबूत बैंकिंग सिस्टम अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकते हैं।
आम लोगों पर क्या असर होगा?
अगर बैंकिंग सेक्टर मजबूत रहता है और एनपीए कम बना रहता है तो इसका फायदा सीधे आम लोगों को मिलेगा।
संभावित फायदे:
- आसान लोन
- कम ब्याज दरों की संभावना
- MSME सेक्टर में रोजगार बढ़ना
- व्यापार को सस्ती फंडिंग
- ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच मजबूत होना
- महिलाओं और छोटे कारोबारियों को अधिक अवसर
निष्कर्ष
भारतीय बैंकिंग सेक्टर फिलहाल मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है। रिकॉर्ड 15.90 प्रतिशत क्रेडिट ग्रोथ और 0.40 प्रतिशत के बेहद कम एनपीए ने यह संकेत दिया है कि बैंकिंग सुधारों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। दूसरी तरफ MSME सेक्टर के लिए 2.25 लाख करोड़ रुपये का ट्रेड गारंटी प्रोग्राम सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसके जरिए वैश्विक संकट के बीच घरेलू कारोबार को सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है।
अगर यही रफ्तार जारी रहती है तो आने वाले वर्षों में भारत की बैंकिंग व्यवस्था वैश्विक स्तर पर एक मजबूत मॉडल के रूप में उभर सकती है।
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