नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कोयला कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) में अपनी हिस्सेदारी बेचने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) के जरिए कंपनी में 2 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की है। इस कदम से सरकार को हजारों करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। कोयले की मांग अभी भी देश की बिजली जरूरतों का सबसे बड़ा आधार बनी हुई है। ऐसे में Coal India में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री को बाजार बेहद करीब से देख रहा है।
क्या है पूरा OFS प्लान?
Government of India announces OFS in Coal India Limited with a base offer of 1% of its equity and an additional 1% Green Shoe Option in case of oversubscription. Floor price fixed at ₹412 per share. OFS opens for non-retail investors on 27 May 2026 and for retail investors on 29… pic.twitter.com/yhDSdr6LRx
— Secretary, DIPAM (@SecyDIPAM) May 26, 2026 निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि सरकार Coal India में OFS लॉन्च कर रही है। इसमें:
- 1% इक्विटी का बेस ऑफर रखा गया है
- ओवरसब्सक्रिप्शन होने पर अतिरिक्त 1% ‘ग्रीन शू ऑप्शन’ उपलब्ध रहेगा
इसका मतलब है कि अगर निवेशकों की मांग ज्यादा रही तो सरकार कुल 2% तक हिस्सेदारी बेच सकती है।
कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, सरकार शुरुआती चरण में 6.16 करोड़ इक्विटी शेयर बेचेगी। यह कंपनी की कुल पेड-अप इक्विटी कैपिटल का 1% हिस्सा है। वहीं, अतिरिक्त 6.16 करोड़ शेयर बेचने का विकल्प भी सुरक्षित रखा गया है। इस तरह कुल ऑफर साइज बढ़कर 12.32 करोड़ शेयर तक पहुंच सकता है।
₹412 रखा गया फ्लोर प्राइस
सरकार ने OFS के लिए फ्लोर प्राइस 412 रुपये प्रति शेयर तय किया है। दिलचस्प बात यह है कि 26 मई 2026 को Coal India का शेयर 455.90 रुपये पर बंद हुआ था। यानी फ्लोर प्राइस बाजार भाव से करीब 10 फीसदी कम रखा गया है।
आमतौर पर OFS में डिस्काउंटेड प्राइस इसलिए रखा जाता है ताकि बड़े निवेशक और रिटेल निवेशक दोनों आकर्षित हों। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कम फ्लोर प्राइस की वजह से इस OFS को अच्छा रिस्पॉन्स मिल सकता है।
कब खुलेगा OFS?
DIPAM सचिव के अनुसार:
- 27 मई 2026 को OFS नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए खुलेगा
- 29 मई 2026 को रिटेल निवेशक आवेदन कर सकेंगे
सरकार ने अपने बयान में कहा कि Coal India लगातार मजबूत ऑपरेशनल और फाइनेंशियल प्रदर्शन कर रही है। कंपनी बेहतर डिविडेंड और स्थिर रिटर्न देने वाली PSU कंपनियों में शामिल रही है।
कर्मचारियों को भी मिलेगा मौका
Coal India की फाइलिंग में कहा गया है कि योग्य कर्मचारियों के लिए 25,000 तक इक्विटी शेयर रिजर्व रखे जा सकते हैं। हालांकि यह संबंधित मंजूरी और OFS गाइडलाइंस की शर्तों पर निर्भर करेगा।
योग्य कर्मचारी अधिकतम 5 लाख रुपये तक के शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं।
सरकार अभी हिस्सेदारी क्यों बेच रही है?
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार का यह कदम केवल विनिवेश (Disinvestment) तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हो सकते हैं:
1. बाजार में PSU शेयरों की मजबूत स्थिति
पिछले कुछ वर्षों में कई सरकारी कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली है। Coal India भी लगातार अच्छा डिविडेंड देने वाली कंपनी रही है। ऐसे में सरकार ऊंचे वैल्यूएशन का फायदा उठाना चाहती है।
2. राजकोषीय दबाव कम करना
सरकार विनिवेश के जरिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना चाहती है ताकि वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखा जा सके।
3. ऊर्जा सेक्टर में निवेश की जरूरत
भारत को अगले कुछ वर्षों में ऊर्जा, रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बड़े निवेश की जरूरत होगी। ऐसे में विनिवेश सरकार के लिए फंड जुटाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।
मिडिल ईस्ट संकट का क्या है कनेक्शन?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। हालांकि बिजली उत्पादन में अब भी कोयले की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।
ऐसे समय में Coal India जैसी कंपनियां भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम हो जाती हैं। सरकार भी यह संदेश देना चाहती है कि देश के पास मजबूत घरेलू ऊर्जा आधार मौजूद है।
हाल के महीनों में Coal India ने रिकॉर्ड उत्पादन और सप्लाई के आंकड़े पेश किए हैं। कंपनी पहले ही कह चुकी है कि बिजली संयंत्रों के लिए पर्याप्त कोयला स्टॉक उपलब्ध है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि OFS के बाद अल्पकाल में शेयर पर दबाव दिख सकता है क्योंकि बड़ी मात्रा में शेयर बाजार में आएंगे। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए Coal India अभी भी डिविडेंड यील्ड के लिहाज से आकर्षक PSU कंपनी मानी जाती है।
कंपनी की सबसे बड़ी ताकतें:
- मजबूत कैश फ्लो
- सरकार समर्थित व्यवसाय
- ऊंचा डिविडेंड
- देश की बिजली जरूरतों में अहम भूमिका
हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना होगा कि भविष्य में ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन का असर कोयला सेक्टर पर पड़ सकता है।
भारत के ऊर्जा सेक्टर में क्यों अहम है Coal India?
Coal India दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनियों में शामिल है। देश की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा अब भी कोयला आधारित प्लांट्स से पूरा होता है। ऐसे में यह कंपनी सिर्फ एक PSU स्टॉक नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है।
सरकार अगले कुछ वर्षों में रिन्यूएबल एनर्जी पर जोर जरूर दे रही है, लेकिन फिलहाल भारत की बेसलोड पावर जरूरतों के लिए कोयले की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है।
निष्कर्ष
Coal India OFS केवल एक साधारण हिस्सेदारी बिक्री नहीं है। यह सरकार की विनिवेश रणनीति, ऊर्जा सुरक्षा और बाजार से फंड जुटाने की बड़ी योजना का हिस्सा माना जा रहा है। फ्लोर प्राइस पर दिए गए डिस्काउंट और कंपनी के मजबूत डिविडेंड रिकॉर्ड की वजह से निवेशकों की इसमें अच्छी रुचि देखने को मिल सकती है।
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