पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत के लिए ओमान एक बड़े रणनीतिक व्यापारिक साझेदार के रूप में उभरता दिख रहा है। भारत और ओमान के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) 1 जून 2026 से लागू होने जा रहा है। ऐसे समय में जब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक मार्गों पर संकट गहरा रहा है, ओमान भारतीय निर्यातकों के लिए एक वैकल्पिक “बैकअप गेटवे” की भूमिका निभा सकता है।
विश्लेषणों के अनुसार, ओमान में करीब 1.2 अरब डॉलर यानी लगभग 11,479 करोड़ रुपये के भारतीय एक्सपोर्ट को खपाने की क्षमता मौजूद है। यह मौका खासतौर पर उन भारतीय कंपनियों के लिए अहम माना जा रहा है जो पश्चिम एशिया में अपने व्यापारिक नेटवर्क को सुरक्षित रखना चाहती हैं।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और LNG इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है।
लेकिन ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव, समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और क्षेत्रीय संघर्षों ने इस रूट को संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में भारत उन विकल्पों की तलाश कर रहा है जो व्यापार और सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाए रख सकें। यही वजह है कि ओमान का महत्व तेजी से बढ़ रहा है।
भारत के लिए ओमान कैसे बन सकता है बड़ा बफर?
ओमान की भौगोलिक स्थिति उसे खाड़ी क्षेत्र में बेहद रणनीतिक बनाती है। यह देश पश्चिम एशिया, अफ्रीका और हिंद महासागर के व्यापारिक मार्गों के बीच एक मजबूत लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट के आसपास अस्थिरता बनी रहती है तो भारत अपने कई एक्सपोर्ट सेक्टरों का फोकस ओमान की ओर मोड़ सकता है। इससे भारतीय कंपनियों को सप्लाई चेन बाधित होने के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।
किन सेक्टरों में भारत को सबसे ज्यादा फायदा?
भारत के कई इंडस्ट्रियल और इंजीनियरिंग सेक्टर ओमान के जरिए बड़ा बाजार हासिल कर सकते हैं।
1. मशीनरी और इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स
भारत पहले से ही इस क्षेत्र में मजबूत स्थिति में है। ओमान में निम्न उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट, कन्वेयर सिस्टम, इलेक्ट्रिकल ट्रांसफॉर्मर, इंसुलेटेड इलेक्ट्रिकल कंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर मशीनरी रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले इलेक्ट्रिकल ट्रांसफॉर्मर का एक्सपोर्ट पूरे स्ट्रेट क्षेत्र में भारत के कुल निर्यात का 7.6 करोड़ डॉलर से अधिक है। इसमें से करीब 2.46 करोड़ डॉलर का हिस्सा अकेले ओमान खरीदता है।
2. जहाज और फ्लोटिंग स्ट्रक्चर
भारत ने खाड़ी क्षेत्र में 24.2 करोड़ डॉलर से अधिक कीमत के जहाज और फ्लोटिंग स्ट्रक्चर एक्सपोर्ट किए। इनमें से लगभग 6 करोड़ डॉलर की खरीद अकेले ओमान ने की।
विशेषज्ञ मानते हैं कि समुद्री लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में इस सेक्टर की मांग और बढ़ सकती है।
3. कॉस्मेटिक्स और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स
ओमान भारतीय FMCG और लाइफस्टाइल ब्रांड्स के लिए भी बड़ा बाजार बनता जा रहा है।
भारत ने इस क्षेत्र को 26.7 करोड़ डॉलर से अधिक के कॉस्मेटिक्स, पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स, प्रोसेस्ड फूड, कपड़े, शॉल, सिरेमिक टाइल्स एक्सपोर्ट किए हैं।
इनमें से लगभग 12.6 करोड़ डॉलर का सामान अकेले ओमान ने खरीदा।
4. फूड और एग्री प्रोडक्ट्स
भारत के कृषि और प्रोसेस्ड फूड सेक्टर के लिए भी ओमान महत्वपूर्ण बाजार बन सकता है। खासतौर पर आम, अमरूद, प्रोसेस्ड फूड, फ्रोजन फिश, मसाले, पैकेजिंग प्रोडक्ट्स जैसे उत्पादों में भारत को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।
पाकिस्तान पर क्यों बढ़ सकता है दबाव?
विश्लेषणों के अनुसार, पाकिस्तान को सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी जोखिम हो सकता है। 2024 में पाकिस्तान ने ओमान को करीब 21.5 करोड़ डॉलर का निर्यात किया था। इनमें से लगभग 49 फीसदी निर्यात ऐसे उत्पादों में है जहां भारतीय कंपनियां सीधी चुनौती दे सकती हैं।
खासतौर पर आम, अमरूद, कृषि उत्पाद जैसी श्रेणियों में भारत की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय उत्पादों की बेहतर सप्लाई क्षमता, मजबूत लॉजिस्टिक्स और FTA का फायदा पाकिस्तान के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
मलेशिया और सिंगापुर की भी बढ़ सकती है चिंता
सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि मलेशिया और सिंगापुर के लिए भी भारतीय निर्यातकों की बढ़ती मौजूदगी चिंता का कारण बन सकती है।
मलेशिया के लिए जोखिम
मलेशिया के सॉफ्ट ड्रिंक कंसंट्रेट, फूड प्रोडक्ट्स जैसे उत्पाद भारतीय कंपनियों से मुकाबले में दबाव महसूस कर सकते हैं।
सिंगापुर के लिए चुनौती
सिंगापुर के इंडस्ट्रियल पंप, मशीनरी पार्ट्स जैसे सेक्टरों में भारतीय निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। कई श्रेणियों में भारतीय निर्यात का स्तर सिंगापुर के करीब पहुंच चुका है।
भारत के लिए रणनीतिक फायदा क्या होगा?
ओमान सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि एक रीजनल री-डिस्ट्रिब्यूशन हब के रूप में भी अहम बन सकता है। इसका मतलब है कि भारत ओमान के जरिए पश्चिम एशिया और अफ्रीका के कई देशों तक अपने उत्पाद आसानी से पहुंचा सकता है।
इससे भारत को तीन बड़े फायदे मिल सकते हैं:
| फायदा | असर |
|---|---|
| सप्लाई चेन सुरक्षा | होर्मुज संकट का असर कम |
| एक्सपोर्ट बढ़ोतरी | नए बाजारों तक पहुंच |
| चीन-पाकिस्तान पर दबाव | क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा में बढ़त |
भारत की बड़ी रणनीति क्या है?
भारत पिछले कुछ वर्षों से मिडिल ईस्ट में लॉजिस्टिक नेटवर्क, पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन विविधीकरण पर तेजी से काम कर रहा है।
ओमान के साथ मजबूत होते व्यापारिक संबंध उसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में भारत अपनी आर्थिक और रणनीतिक मौजूदगी लगातार बढ़ाना चाहता है।
आगे क्या हो सकता है?
यदि होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो ओमान भारत के लिए वैकल्पिक व्यापार मार्ग, लॉजिस्टिक सपोर्ट सेंटर, एक्सपोर्ट हब, रीजनल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के रूप में और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत-ओमान व्यापारिक साझेदारी सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इंजीनियरिंग, फूड, FMCG, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तक तेजी से फैल सकती है।
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