नई दिल्ली। देश में बढ़ती बिजली मांग और भीषण गर्मी के बीच कोयले की कमी को लेकर उठ रही चिंताओं पर सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Ltd.) ने बड़ा बयान दिया है। कंपनी ने साफ कहा है कि देश में फिलहाल कोयले की कोई कमी नहीं है और बिजली संयंत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
कोल इंडिया के अनुसार, गर्मियों में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए कंपनी ने करीब 16.8 करोड़ टन कोयले का ‘बफर स्टॉक’ तैयार रखा है। इसमें बिजली संयंत्रों, खदानों और पारगमन केंद्रों पर उपलब्ध कोयला शामिल है। कंपनी का कहना है कि यह भंडार आने वाले महीनों में बिजली उत्पादन को सुचारु बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।
भारत में हर साल गर्मियों के दौरान बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है। एयर कंडीशनर, कूलर और सिंचाई के लिए बिजली खपत बढ़ने से पावर सेक्टर पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे समय में कोयले की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी अब भी कोयला आधारित तापीय बिजली संयंत्रों से मिलने वाली बिजली पर निर्भर है।
16.8 करोड़ टन का बड़ा बफर स्टॉक
कोल इंडिया ने अपने बयान में बताया कि 24 मई तक उसकी खदानों में 11.35 करोड़ टन कोयला भंडार मौजूद था। इसके अलावा घरेलू कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के पास 23 मई तक 4.76 करोड़ टन का स्टॉक उपलब्ध था। कंपनी ने यह भी बताया कि लगभग 30 लाख टन कोयला विभिन्न माल गोदामों, रेलवे साइडिंग और बंदरगाहों जैसे पारगमन केंद्रों पर रखा गया है। इन सभी को मिलाकर कुल उपलब्ध भंडार करीब 16.8 करोड़ टन तक पहुंच जाता है।
कोल इंडिया के मुताबिक यह भंडार बिजली संयंत्रों की लगभग 19 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। कंपनी ने कहा कि उसने इस बार पहले से तैयारी करते हुए अतिरिक्त स्टॉक तैयार किया है ताकि गर्मियों में किसी तरह की आपूर्ति बाधित न हो।
बिजली की बढ़ती मांग ने बढ़ाई चुनौती
भारत में पिछले कुछ वर्षों में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। तेज गर्मी, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि और शहरीकरण के कारण बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है। पिछले वर्ष जून 2025 में देश में बिजली की अधिकतम मांग 242.77 गीगावाट तक पहुंच गई थी। हालांकि यह सरकार के 277 गीगावाट के अनुमान से कम रही, लेकिन फिर भी यह भारत के पावर सेक्टर के लिए बड़ी चुनौती थी।
इससे पहले मई 2024 में बिजली की अधिकतम मांग 250 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। उस समय देश के कई राज्यों में बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया था। सितंबर 2023 में भी बिजली मांग 243.27 गीगावाट तक पहुंच चुकी थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की बिजली मांग और तेजी से बढ़ सकती है। इलेक्ट्रिक वाहनों, डेटा सेंटरों और बढ़ते औद्योगिक उत्पादन के कारण ऊर्जा जरूरतों में लगातार इजाफा हो रहा है।
क्यों अहम है कोल इंडिया का बयान?
कोल इंडिया देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है और भारत की कुल कोयला आपूर्ति में इसकी हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है। ऐसे में कंपनी का यह बयान बाजार और पावर सेक्टर दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक सप्लाई चेन की चुनौतियों के चलते ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी थी। इसके अलावा कई राज्यों में बढ़ती गर्मी के कारण बिजली खपत में तेज उछाल देखने को मिला, जिससे कोयले की उपलब्धता पर सवाल उठने लगे थे।
कोल इंडिया ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि कंपनी लगातार उत्पादन और आपूर्ति पर नजर बनाए हुए है। रेलवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के साथ समन्वय बढ़ाकर बिजली संयंत्रों तक समय पर कोयला पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
सरकार भी कर रही निगरानी
ऊर्जा मंत्रालय और कोयला मंत्रालय लगातार बिजली संयंत्रों के स्टॉक की निगरानी कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके। सरकार ने कोल इंडिया समेत अन्य कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने, नई खदानों के विकास और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा रेलवे नेटवर्क में सुधार के जरिए कोयले की तेज आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत अभी भी अपनी बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा कोयला आधारित संयंत्रों से पूरा करता है। ऐसे में पर्याप्त कोयला स्टॉक बनाए रखना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
क्या बिजली संकट का खतरा टल गया?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में देश के पास पर्याप्त कोयला भंडार है और निकट भविष्य में बड़े बिजली संकट की संभावना कम दिखाई देती है। हालांकि अगर गर्मी सामान्य से अधिक रही और बिजली मांग अचानक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, तो सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल कोल इंडिया का दावा है कि उसके पास पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और बिजली संयंत्रों को कोयले की सप्लाई नियमित रूप से जारी रहेगी। इससे उद्योगों, राज्यों और आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
(पीटीआई इनपुट के साथ)
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