HDFC Securities Report: क्यों कॉपर को अगला बड़ा कमोडिटी स्टार माना जा रहा है?
नई दिल्ली। पिछले कुछ वर्षों में सोना और चांदी ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता, महंगाई और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने गोल्ड-सिल्वर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। लेकिन अब बाजार की नजर एक ऐसी धातु पर टिक गई है, जिसे आधुनिक अर्थव्यवस्था की “रीढ़” कहा जाता है — कॉपर (Copper)।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज (HDFC Securities) की हालिया रिपोर्ट “Copper: The Next Leg of the Commodity Supercycle” के अनुसार आने वाले वर्षों में कॉपर की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट का दावा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), डेटा सेंटर, पावर ग्रिड अपग्रेड और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग कॉपर को अगली बड़ी कमोडिटी थीम बना सकती है।
हालांकि हाल के दिनों में MCX पर कॉपर में गिरावट देखने को मिली है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लंबी अवधि में इसकी कहानी अभी खत्म नहीं हुई, बल्कि असली तेजी की शुरुआत आगे हो सकती है।
MCX पर कॉपर की मौजूदा स्थिति क्या है?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 26 मई को कॉपर की कीमतों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान कॉपर 0.45% गिरकर 1,361.30 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करता दिखाई दिया।
MCX Copper Price Snapshot
| पैरामीटर | कीमत |
|---|---|
| मौजूदा भाव | ₹1,361.30 प्रति किलोग्राम |
| दिन की गिरावट | ₹6.15 |
| हाई लेवल | ₹1,363.90 |
| लो लेवल | ₹1,358.20 |
| ऑल टाइम हाई | ₹1,450+ (29 जनवरी 2026) |
दिलचस्प बात यह है कि जनवरी में रिकॉर्ड हाई छूने के बाद कॉपर करीब 70 रुपये सस्ता हो चुका है। लेकिन बाजार विशेषज्ञ इसे कमजोरी नहीं, बल्कि संभावित “एंट्री जोन” के तौर पर देख रहे हैं।
आखिर क्या होती है ‘कमोडिटी सुपरसाइकिल’?
कमोडिटी सुपरसाइकिल ऐसा लंबा दौर होता है, जिसमें कई वर्षों तक कच्चे माल और धातुओं की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं। यह स्थिति तब बनती है जब वैश्विक मांग तेजी से बढ़े, सप्लाई सीमित हो, नई उत्पादन क्षमता जल्दी तैयार न हो पाए, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल निवेश बढ़े.
2000 के दशक में चीन की औद्योगिक वृद्धि ने कॉपर और स्टील जैसी कमोडिटी में सुपररैली पैदा की थी। अब एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI और इलेक्ट्रिफिकेशन अगली बड़ी सुपरसाइकिल को जन्म दे सकते हैं।
AI, EV और डेटा सेंटर कैसे बढ़ाएंगे कॉपर की मांग?
आज की डिजिटल और इलेक्ट्रिक दुनिया में कॉपर सबसे अहम धातुओं में गिना जाता है। इसकी वजह इसकी बेहतरीन बिजली संचालित करने की क्षमता है।
1. AI डेटा सेंटर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के कारण दुनिया भर में बड़े डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं। इन डेटा सेंटरों में भारी मात्रा में वायरिंग, हाई पावर सिस्टम, कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसफॉर्मर की जरूरत होती है, जिनमें कॉपर का व्यापक इस्तेमाल होता है।
विश्लेषकों के मुताबिक AI इंफ्रास्ट्रक्चर आने वाले दशक में कॉपर की मांग को नई ऊंचाई पर पहुंचा सकता है।
2. इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV)
एक पारंपरिक पेट्रोल कार की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन में कई गुना ज्यादा कॉपर इस्तेमाल होता है।
EV में कॉपर का इस्तेमाल क्यों ज्यादा होता है?
बैटरी सिस्टम, मोटर, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई वोल्टेज वायरिंग इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक EV ट्रांजिशन कॉपर की वैश्विक मांग का बड़ा स्रोत बन सकता है।
3. पावर ग्रिड और रिन्यूएबल एनर्जी
दुनिया भर में बिजली नेटवर्क को अपग्रेड किया जा रहा है। सोलर, विंड और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में भारी मात्रा में कॉपर इस्तेमाल होता है।
भारत, अमेरिका और यूरोप बड़े स्तर पर पावर ग्रिड मॉडर्नाइजेशन, ट्रांसमिशन नेटवर्क, बैटरी स्टोरेज, स्मार्ट ग्रिड पर निवेश कर रहे हैं।. यही वजह है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले दो दशकों में AI, डिफेंस, EV और एनर्जी ट्रांजिशन सेक्टर कुल कॉपर डिमांड का लगभग 45% हिस्सा बन सकते हैं।
सप्लाई क्यों बन रही है सबसे बड़ी चिंता?
मांग बढ़ने के बावजूद कॉपर की सप्लाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रही।
HDFC Securities की रिपोर्ट के अनुसार 2015 के बाद कोई बड़ा Tier-1 Copper Discovery नहीं हुआ चिली जैसे बड़े उत्पादक देशों में उत्पादन दबाव में है हाई-ग्रेड खदानें कम होती जा रही हैं पानी की कमी और पर्यावरण नियम लागत बढ़ा रहे हैं चिली, जो दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर उत्पादक देश है, वहां उत्पादन लगभग 2003 के स्तर के आसपास पहुंच गया है।
कॉपर उत्पादन महंगा क्यों हो रहा है?
कॉपर उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले सल्फ्यूरिक एसिड की कीमतों में एक साल में 200% से ज्यादा उछाल आया है।
इसका असर खनन कंपनियों की लागत स्मेल्टिंग खर्च, रिफाइनिंग मार्जिन पर पड़ रहा है। जब उत्पादन महंगा होता है और सप्लाई सीमित रहती है, तब लंबी अवधि में कीमतों को सपोर्ट मिलता है।
गोल्ड और सिल्वर के मुकाबले कॉपर अभी भी सस्ता?
रिपोर्ट में Copper-to-Gold Ratio और Copper-to-Silver Ratio को भी अहम संकेत माना गया है।
क्या कहता है यह रेशियो?
जब कॉपर का रेशियो गोल्ड या सिल्वर के मुकाबले बहुत नीचे चला जाता है, तो इसका मतलब हो सकता है कि कॉपर अभी undervalued है बाकी धातुओं के मुकाबले पीछे है आगे इसमें तेज रिकवरी की संभावना बन सकती है मई 2026 में Copper-to-Gold Ratio मल्टी-डिकेड लो पर पहुंच गया, जिसे कई विश्लेषक संभावित तेजी का संकेत मान रहे हैं।
क्या कॉपर निवेश का बड़ा मौका बन सकता है?
कई मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर AI निवेश जारी रहता है EV adoption बढ़ता है ग्लोबल इलेक्ट्रिफिकेशन तेज होती है तो कॉपर अगले 5–10 साल में सबसे मजबूत कमोडिटी थीम बन सकता है। हालांकि निवेशकों को यह भी समझना होगा कि कमोडिटी बाजार बेहद उतार-चढ़ाव वाला होता है।
कौन-कौन से जोखिम बने हुए हैं?
रिपोर्ट में कुछ बड़े जोखिमों का भी जिक्र किया गया है:
1. अमेरिका-ईरान तनाव
अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है तो औद्योगिक मांग प्रभावित हो सकती है।
2. अमेरिकी मंदी
अमेरिका में मंदी आने पर इंडस्ट्रियल मेटल्स की मांग घट सकती है।
3. चीन की कमजोर मांग
चीन दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर उपभोक्ता है। वहां रियल एस्टेट और मैन्युफैक्चरिंग कमजोर रहने पर कीमतों पर दबाव आ सकता है।
4. सप्लाई सरप्लस
International Copper Study Group के अनुसार 2026 और 2027 में कॉपर बाजार में सरप्लस देखने को मिल सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है कॉपर?
भारत तेजी से EV मैन्युफैक्चरिंग, सोलर एनर्जी, पावर इंफ्रा, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन, डेटा सेंटर पर निवेश कर रहा है।
ऐसे में कॉपर की रणनीतिक अहमियत भारत के लिए और बढ़ सकती है। आने वाले वर्षों में सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं भी कॉपर डिमांड को मजबूत सपोर्ट दे सकती हैं।
क्या निवेशकों को कॉपर पर नजर रखनी चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि कॉपर अब केवल एक औद्योगिक धातु नहीं रहा, बल्कि AI और ऊर्जा ट्रांजिशन की पूरी कहानी का अहम हिस्सा बन चुका है। यदि सप्लाई सीमित रहती है AI और EV की मांग तेज रहती है ग्लोबल इलेक्ट्रिफिकेशन जारी रहता है तो आने वाले वर्षों में कॉपर की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है।
हालांकि शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से कई विश्लेषक इसे अगली बड़ी कमोडिटी थीम के रूप में देख रहे हैं।
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