देश में तेजी से बढ़ रहे स्मार्ट मीटर कारोबार के बीच एक बड़ा कॉर्पोरेट सौदा सामने आ सकता है। देशभर में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने वाली प्रमुख कंपनी इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (IntelliSmart Infrastructure) की बिक्री प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस रेस में अडानी ग्रुप की कंपनी समेत चार बड़े खिलाड़ी शामिल हैं। माना जा रहा है कि यह सौदा करीब 400 मिलियन डॉलर यानी लगभग 3770 करोड़ रुपये में हो सकता है।
भारत में बिजली वितरण व्यवस्था को डिजिटल बनाने और लाइन लॉस कम करने के लिए स्मार्ट मीटरिंग पर तेजी से काम हो रहा है। ऐसे में इंटेलीस्मार्ट जैसी कंपनी को खरीदना केवल एक कारोबारी डील नहीं, बल्कि देश के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी रणनीतिक एंट्री माना जा रहा है।
अंतिम दौर में पहुंचीं ये 4 कंपनियां
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की बिक्री प्रक्रिया में दूसरे दौर की बातचीत के लिए चार कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इनमें Adani Energy Solutions, GMR Smart Electricity Distribution, Genus Power Infrastructures, Partners Group शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इन सभी कंपनियों ने अब ड्यू डिलिजेंस यानी कंपनी की वित्तीय, तकनीकी और कानूनी जांच-परख शुरू कर दी है। अंतिम और बाध्यकारी बोलियां जून के मध्य तक जमा होने की संभावना है।
शुरुआती दौर में 10 कंपनियों ने दिखाई थी दिलचस्पी
जानकारी के अनुसार, इंटेलीस्मार्ट को खरीदने में शुरुआती चरण में करीब 10 कंपनियों ने रुचि दिखाई थी। हालांकि, विस्तृत जांच-परख के बाद केवल चुनिंदा कंपनियों को ही अगले दौर में प्रवेश दिया गया। यह दिखाता है कि स्मार्ट मीटरिंग सेक्टर में निवेशकों और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। भारत सरकार भी बिजली वितरण कंपनियों के आधुनिकीकरण और डिजिटल मॉनिटरिंग पर बड़ा फोकस कर रही है।
क्यों खास है यह डील?
अगर यह सौदा अडानी ग्रुप के पक्ष में जाता है, तो यह कंपनी की बिजली वितरण और ट्रांसमिशन कारोबार में पकड़ को और मजबूत कर सकता है। Adani Group पहले से ही बिजली ट्रांसमिशन, वितरण और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में तेजी से विस्तार कर रहा है। स्मार्ट मीटरिंग कारोबार मिलने से उसे बिजली उपभोक्ताओं के डेटा, बिलिंग मैनेजमेंट और डिजिटल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बड़ा फायदा मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्मार्ट मीटर भारत के बिजली सेक्टर का सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी-आधारित बदलाव साबित हो सकते हैं। इससे डिस्कॉम कंपनियों के लाइन लॉस कम होंगे और बिजली चोरी पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
कर्ज के दबाव में हिस्सेदारी बिक्री
इंटेलीस्मार्ट फिलहाल National Investment and Infrastructure Fund और Energy Efficiency Services Limited का संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है। इसमें NIIF की 51% हिस्सेदारी, EESL की 49% हिस्सेदारी है। EESL खुद कई सरकारी कंपनियों का संयुक्त उपक्रम है। इसमें NTPC, Power Finance Corporation, REC Limited, Power Grid Corporation of India शामिल हैं।
31 मार्च 2025 तक EESL पर करीब 6,045 करोड़ रुपये का दीर्घकालिक कर्ज था। माना जा रहा है कि इसी वित्तीय दबाव को कम करने के लिए इंटेलीस्मार्ट में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
क्या करती है इंटेलीस्मार्ट?
साल 2019 में स्थापित इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर देशभर में स्मार्ट मीटर लगाने का काम करती है। कंपनी को विभिन्न राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) से लगभग 2.2 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने के ऑर्डर मिल चुके हैं। अब तक असम में लगभग 6 लाख स्मार्ट मीटर, उत्तर प्रदेश में करीब 5 लाख स्मार्ट मीटर इंस्टॉल किए जा चुके हैं।
सरकार की Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) के तहत आने वाले वर्षों में देशभर में करोड़ों स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। ऐसे में इस सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए बड़े कारोबारी अवसर बन रहे हैं।
भारत में क्यों बढ़ रही स्मार्ट मीटर की मांग?
भारत सरकार बिजली वितरण व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है। स्मार्ट मीटर से रियल टाइम बिजली खपत की जानकारी मिलती है बिलिंग में गड़बड़ी कम होती है, बिजली चोरी रोकने में मदद मिलती है डिस्कॉम का राजस्व बढ़ता है, उपभोक्ताओं को प्रीपेड बिजली विकल्प मिलता है. यही वजह है कि आने वाले वर्षों में स्मार्ट मीटरिंग सेक्टर में हजारों करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिल सकता है।
निवेशकों की नजर इस सेक्टर पर क्यों?
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का बिजली सेक्टर तेजी से डेटा और टेक्नोलॉजी आधारित मॉडल की ओर बढ़ रहा है। स्मार्ट मीटर केवल मीटरिंग डिवाइस नहीं, बल्कि भविष्य के डिजिटल एनर्जी नेटवर्क का आधार बन रहे हैं।
अगर अडानी ग्रुप या कोई अन्य बड़ी कंपनी इंटेलीस्मार्ट को खरीदती है, तो इससे भारत के स्मार्ट ग्रिड और डिजिटल पावर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।
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