अमेरिका में ग्रीन कार्ड नियमों को लेकर ट्रंप प्रशासन के नए रुख ने वहां रह रहे लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीय इंजीनियरों, आईटी प्रोफेशनल्स और रिसर्चर्स के बीच इस फैसले को लेकर भारी असमंजस की स्थिति है। इसी बीच भारतीय टेक कंपनी Zoho के फाउंडर Sridhar Vembu ने अमेरिका में बसे भारतीयों से भावुक अपील करते हुए कहा है कि अब समय आ गया है कि वे अपने भविष्य पर दोबारा विचार करें और भारत लौट आएं।
वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि “वीजा पर अमेरिका में रह रहे भारतीयों से मेरी एक बार फिर अपील है। कृपया अपने घर भारत लौट आएं। आत्मसम्मान सबसे महत्वपूर्ण है।” उनके इस बयान ने भारतीय टेक जगत और प्रवासी समुदाय में नई बहस छेड़ दी है।
Once again, my appeal to Indians in America on a visa. Please come home. Even if you feel it is hardship and sacrifice, self-respect should dictate your course. Let's make Bharat proud 🙏 https://t.co/u1Zgqck6m7
— Sridhar Vembu (@svembu) May 23, 2026 क्या है ट्रंप प्रशासन का नया नियम?
पूरी बहस की शुरुआत अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) द्वारा जारी एक नए पॉलिसी मेमो से हुई। नए नियमों के तहत अब अमेरिका में अस्थायी वीजा पर रह रहे विदेशी नागरिकों को ग्रीन कार्ड आवेदन प्रक्रिया के लिए अपने मूल देश लौटना पड़ सकता है।
अब तक कई H-1B वीजा धारक “Adjustment of Status” प्रक्रिया के जरिए अमेरिका में रहते हुए ही स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे। लेकिन नए बदलाव के बाद इसे कोई गारंटीड अधिकार नहीं माना जाएगा। अब यह पूरी तरह अधिकारियों के विवेक पर निर्भर प्रक्रिया बन गई है।
इसका मतलब यह है कि बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल्स को ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पूरी करने के लिए भारत वापस लौटना पड़ सकता है। अमेरिका में भारतीय टेक कर्मचारियों की विशाल आबादी को देखते हुए यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारतीयों में क्यों बढ़ी चिंता?
अमेरिका में लाखों भारतीय H-1B वीजा पर काम करते हैं। इनमें से बड़ी संख्या आईटी सेक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिसर्च, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में कार्यरत है। कई लोग वर्षों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे देशों के लिए ग्रीन कार्ड बैकलॉग पहले से ही बहुत बड़ा है। ऐसे में यदि लोगों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए वापस अपने देश लौटना पड़े, तो इससे करियर, परिवार, बच्चों की पढ़ाई और नौकरी पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इमिग्रेशन मामलों के जानकार मानते हैं कि इस तरह के बदलाव से विदेशी कर्मचारियों के भीतर असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है। खासकर भारतीय टेक कर्मचारियों के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिकी टेक इंडस्ट्री में भारतीयों की भूमिका काफी मजबूत रही है।
श्रीधर वेम्बू ने क्यों कहा- ‘घर लौट आइए’
Sridhar Vembu लंबे समय से भारत में टैलेंट और रोजगार निर्माण की बात करते रहे हैं। वे ग्रामीण भारत में टेक्नोलॉजी आधारित अवसर बढ़ाने और लोकल इनोवेशन को मजबूत करने के समर्थक रहे हैं।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि भारत लौटने के फैसले को केवल आर्थिक नुकसान या वेतन में कमी के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक आत्मसम्मान और अपने देश के निर्माण में योगदान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
वेम्बू का मानना है कि भारत अब पहले जैसा नहीं रहा। पिछले कुछ वर्षों में देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से मजबूत हुआ है। SaaS, AI, फिनटेक, डीप टेक और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भारत वैश्विक स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भारतीय प्रतिभाओं को विदेशों में अवसर तलाशने के बजाय देश के भीतर नई संभावनाएं तैयार करनी चाहिए।
भारत लौटने की अपील पहली बार नहीं
यह पहली बार नहीं है जब वेम्बू ने प्रवासी भारतीयों से भारत लौटने की अपील की हो। इससे पहले भी उन्होंने कई बार कहा है कि भारत में अब विश्वस्तरीय कंपनियां खड़ी करने का समय आ चुका है।
उन्होंने कई मौकों पर यह भी कहा है कि भारत को केवल “टैलेंट सप्लायर” नहीं बल्कि “प्रोडक्ट और इनोवेशन लीडर” बनना चाहिए। यही वजह है कि उनकी कंपनी Zoho ने बड़े शहरों के बजाय छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में रोजगार मॉडल तैयार करने पर जोर दिया।
क्या सचमुच बदल रहा है अमेरिका का माहौल?
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में इमिग्रेशन नियमों को लेकर लगातार सख्ती देखने को मिली है। H-1B वीजा नियम, वर्क परमिट प्रक्रिया, ग्रीन कार्ड बैकलॉग और विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता जैसे मुद्दे अमेरिकी राजनीति में बड़े चुनावी विषय बन चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी कंपनियां अभी भी भारतीय टैलेंट पर काफी निर्भर हैं, लेकिन नीतिगत अनिश्चितता विदेशी कर्मचारियों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।
कई भारतीय प्रोफेशनल्स अब कनाडा, यूरोप, सिंगापुर और भारत जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं। खासकर रिमोट वर्क और ग्लोबल टेक इकोसिस्टम के विस्तार के बाद अब भारत में रहकर भी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए काम करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है।
भारत के लिए बड़ा अवसर?
जानकार मानते हैं कि यदि बड़ी संख्या में अनुभवी भारतीय प्रोफेशनल्स वापस लौटते हैं, तो इससे भारत के टेक सेक्टर को बड़ा फायदा हो सकता है।
- स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत होगा
- नई कंपनियां और रोजगार पैदा होंगे
- रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा
- ग्लोबल अनुभव भारत के काम आएगा
भारत सरकार भी सेमीकंडक्टर, AI, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही है। ऐसे में विदेशों में काम कर चुके अनुभवी प्रोफेशनल्स देश के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सिर्फ भावनात्मक नहीं, रणनीतिक बहस भी
वेम्बू की अपील केवल भावनात्मक बयान नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत की दीर्घकालिक टेक रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। उनका संदेश यह है कि भारतीय प्रतिभा यदि देश में रहकर काम करे, तो भारत वैश्विक स्तर पर तकनीकी महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
हालांकि कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत को वापस लौटने वाले प्रोफेशनल्स के लिए बेहतर रिसर्च सुविधाएं, उच्च वेतन, वैश्विक स्तर का कार्य वातावरण और स्थिर नीतियां सुनिश्चित करनी होंगी। तभी बड़े स्तर पर “रिवर्स ब्रेन ड्रेन” संभव हो पाएगा।
निष्कर्ष
अमेरिका के नए ग्रीन कार्ड नियमों ने दुनियाभर के प्रवासी समुदाय, खासकर भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। इसी बीच Sridhar Vembu की “घर लौट आइए” वाली अपील ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
अब सवाल केवल नौकरी या वेतन का नहीं, बल्कि भविष्य, पहचान और आत्मसम्मान का भी बन गया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका की नई नीतियां भारतीय टैलेंट के वैश्विक प्रवाह को किस तरह प्रभावित करती हैं और क्या सचमुच बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल्स भारत लौटने का फैसला लेते हैं।
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