पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब दक्षिण एशिया के देशों की खाद्य सुरक्षा पर भी असर डालने लगा है। ईरान के पास स्थित रणनीतिक समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ हार्मुज में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन बाधित होने के डर के बीच नेपाल में रासायनिक खाद का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि नेपाल सरकार ने भारत से तत्काल 80,000 टन रासायनिक उर्वरक खरीदने का फैसला किया है और “इमरजेंसी डिलीवरी” की मांग की है।
नेपाल सरकार का कहना है कि अगर समय रहते खाद की आपूर्ति नहीं हुई तो जून से शुरू होने वाले धान रोपाई सीजन पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव किसानों की आय, फसल उत्पादन और देश की खाद्य व्यवस्था पर देखने को मिलेगा।
नेपाल ने भारत से क्या मांगा?
नेपाल भारत से कुल 80,000 टन रासायनिक खाद खरीदना चाहता है। इसमें शामिल हैं: 60,000 टन यूरिया, 20,000 टन डीएपी (DAP) शुरुआत में नेपाल की योजना करीब 1.5 लाख टन उर्वरक खरीदने की थी, लेकिन सीमित बजट के कारण मात्रा कम करनी पड़ी। नेपाल सरकार अब सरकार-से-सरकार यानी G2G मॉडल के तहत भारत से खाद खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल ने भारत की सरकारी कंपनी नेशनल केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF) से कीमतों का प्रस्ताव मांगा है।
पश्चिम एशिया संकट का नेपाल पर असर
ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर समुद्री सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ हार्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल और केमिकल ट्रेड रूट्स में गिना जाता है। इस रूट से बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्पादों के साथ-साथ उर्वरक से जुड़े कच्चे माल की सप्लाई होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो: वैश्विक उर्वरक कीमतें और बढ़ सकती हैं, सप्लाई में देरी हो सकती है, दक्षिण एशियाई देशों में कृषि लागत बढ़ सकती है नेपाल पहले ही आयात आधारित कृषि व्यवस्था पर निर्भर है। ऐसे में वैश्विक सप्लाई चेन में किसी भी बाधा का असर वहां तेजी से दिखाई देता है।
120 दिनों में सप्लाई का आश्वासन
नेपाल के कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव राम कृष्ण श्रेष्ठ ने कहा है कि भारत से इस सप्ताह कीमतों की सूची मिलने की उम्मीद है। इसके बाद नेपाल औपचारिक ऑर्डर जारी करेगा। उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनी ने भुगतान के 120 दिनों के भीतर डिलीवरी का आश्वासन दिया है। हालांकि नेपाल ने भारत से अनुरोध किया है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए इससे भी कम समय में खाद की आपूर्ति की जाए।
नेपाल सरकार को डर है कि अगर जून से पहले खाद नहीं पहुंची तो धान की खेती प्रभावित हो सकती है।
धान की खेती पर सबसे बड़ा खतरा
नेपाल में जून से धान की रोपाई शुरू हो जाती है। यह देश की सबसे महत्वपूर्ण कृषि गतिविधियों में शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल को केवल धान रोपाई सीजन के दौरान करीब 2.5 लाख टन उर्वरक की जरूरत पड़ती है।
धान नेपाल की खाद्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। देश में कुल अनाज खपत का करीब 67 प्रतिशत हिस्सा चावल का है। इसके अलावा नेपाल में प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक चावल खपत लगभग 137.5 किलोग्राम बताई जाती है।
अगर समय पर खाद उपलब्ध नहीं होती: धान उत्पादन घट सकता है, खाद्य महंगाई बढ़ सकती है, किसानों की आय प्रभावित हो सकती है, नेपाल को ज्यादा खाद्यान्न आयात करना पड़ सकता है
नए ग्लोबल टेंडर में लगेंगे 225 दिन
नेपाल सरकार के सामने सबसे बड़ी समस्या समय की है। अधिकारियों के मुताबिक अगर नए अंतरराष्ट्रीय टेंडर जारी किए जाते हैं तो पूरी प्रक्रिया में कम से कम 225 दिन लग सकते हैं। यही वजह है कि नेपाल ने भारत से सीधे समझौते का रास्ता चुना है।
भारत और नेपाल के बीच पहले भी खाद और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर कई G2G समझौते हो चुके हैं। इस बार भी नेपाल को उम्मीद है कि भारत तेजी से मदद करेगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह डील?
विशेषज्ञों के मुताबिक यह सिर्फ एक व्यापारिक सौदा नहीं बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक महत्व का मामला भी है। भारत लंबे समय से नेपाल का प्रमुख व्यापारिक और कृषि साझेदार रहा है।
अगर भारत समय पर खाद उपलब्ध कराता है तो: नेपाल में भारत की रणनीतिक पकड़ मजबूत होगी, चीन के प्रभाव को संतुलित करने में मदद मिलेगी, दक्षिण एशिया में भारत की सप्लाई क्षमता का संदेश जाएगा इसके अलावा भारतीय उर्वरक कंपनियों को भी निर्यात का अवसर मिल सकता है।
वैश्विक बाजार पर भी नजर
दुनिया भर में उर्वरक बाजार पहले से ही दबाव में है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से खाद की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया था। अब पश्चिम एशिया संकट ने नई चिंता पैदा कर दी है।
अगर समुद्री सप्लाई और प्रभावित होती है तो: यूरिया और डीएपी की कीमतें बढ़ सकती हैं, एशियाई देशों में कृषि लागत बढ़ सकती है, खाद सब्सिडी पर सरकारों का बोझ बढ़ सकता है भारत खुद भी उर्वरक आयात पर काफी हद तक निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
नेपाल में खाद संकट सिर्फ एक पड़ोसी देश की समस्या नहीं बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन और कृषि सुरक्षा से जुड़ा बड़ा संकेत है। धान रोपाई सीजन से पहले नेपाल की भारत पर बढ़ती निर्भरता दिखाती है कि पश्चिम एशिया का तनाव अब सीधे दक्षिण एशिया की खेती और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करने लगा है।
आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि भारत कितनी तेजी से नेपाल को खाद उपलब्ध कराता है और क्या वैश्विक उर्वरक बाजार में हालात और बिगड़ते हैं या नहीं।
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