भारतीय शेयर बाजार में जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही कई बड़े निवेशकों के लिए भारी उतार-चढ़ाव वाली साबित हुई। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में कमजोरी, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं ने बड़े-बड़े दिग्गज निवेशकों की पोर्टफोलियो वैल्यू को झटका दिया। लेकिन इसी गिरावट के बीच एक महिला निवेशक ने ऐसा प्रदर्शन किया कि राधाकिशन दमानी, आशीष कचोलिया और मुकुल अग्रवाल जैसे चर्चित नाम भी पीछे छूट गए।
प्राइमडेटाबेस रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, जहां ज्यादातर हाई-नेटवर्थ निवेशकों की संपत्ति घटी, वहीं वनाजा अय्यर (Vanaja Iyer) ने सिर्फ तीन महीनों में अपनी पोर्टफोलियो वेल्थ को दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा लिया। उनकी कुल होल्डिंग दिसंबर तिमाही के 513.5 करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 के अंत तक 1,123 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। यानी उन्हें करीब ₹609 करोड़ का फायदा हुआ।
बाजार में गिरावट का सबसे ज्यादा असर किन निवेशकों पर पड़ा?
जनवरी-मार्च तिमाही में भारतीय बाजार में तेज करेक्शन देखने को मिला। खासकर स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भारी बिकवाली हुई। इसका असर उन निवेशकों पर ज्यादा पड़ा जिनका पोर्टफोलियो हाई-वोलैटिलिटी वाले शेयरों में केंद्रित था।
हेमेंद्र कोठारी और मुकुल अग्रवाल को इस तिमाही में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। दोनों के पोर्टफोलियो में करीब 26 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। प्राइमडेटाबेस के मुताबिक, हेमेंद्र कोठारी की कुल होल्डिंग 6,032 करोड़ रुपये से घटकर 4,482 करोड़ रुपये रह गई।
उनके प्रमुख निवेशों में शामिल Alkyl Amines Chemicals, Sonata Software और EIH Associated Hotels जैसे शेयरों में तेज गिरावट आई। Sonata Software में लगभग 42 फीसदी की कमजोरी ने उनके पोर्टफोलियो पर बड़ा असर डाला।
इसी तरह जाने-माने निवेशक मुकुल अग्रवाल की पोर्टफोलियो वैल्यू भी 6,248 करोड़ रुपये से घटकर 4,648 करोड़ रुपये रह गई।
किस निवेशक को कितना नुकसान हुआ?
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में प्रमुख निवेशकों की पोर्टफोलियो स्थिति
| निवेशक | मार्च 2026 होल्डिंग (₹ करोड़) | दिसंबर 2025 होल्डिंग (₹ करोड़) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| तेजस त्रिवेदी | 1,165.10 | 1,749.00 | -33.40% |
| हेमेंद्र कोठारी | 4,481.60 | 6,032.80 | -25.70% |
| मुकुल अग्रवाल | 4,647.80 | 6,248.60 | -25.60% |
| मधुसूदन केला | 1,642.80 | 2,084.20 | -21.20% |
| नेमिश शाह | 2,828.00 | 3,507.40 | -19.40% |
| अनुज शेठ | 1,419.40 | 1,731.70 | -18.00% |
| नीरजकुमार बजाज | 97,064.10 | 117,113.70 | -17.10% |
| आशीष कचोलिया | 1,387.40 | 1,669.50 | -16.90% |
| आकाश भंसाली | 5,769.50 | 6,838.80 | -15.60% |
| गोविंदलाल पारिख | 1,732.70 | 2,015.80 | -14.00% |
| सुनील मुंजाल | 15,453.10 | 17,790.20 | -13.10% |
| आशीष धवन | 1,943.40 | 2,220.00 | -12.50% |
| राकेश झुनझुनवाला परिवार | 57,591.40 | 63,676.80 | -9.60% |
| युसुफली कादर | 2,578.40 | 2,751.70 | -6.30% |
| अनिल गोयल | 1,879.50 | 1,946.50 | -3.40% |
गिरावट के बीच दमानी ने कैसे कमाया मुनाफा?
जहां ज्यादातर निवेशकों को नुकसान हुआ, वहीं डीमार्ट के संस्थापक और दिग्गज निवेशक राधाकिशन दमानी ने इस मुश्किल दौर में भी मुनाफा कमाया। उनका पोर्टफोलियो दिसंबर 2025 के 1.68 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 में 1.75 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।
यह करीब 4.4 फीसदी की बढ़ोतरी थी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दमानी का पोर्टफोलियो अपेक्षाकृत स्थिर और मजबूत बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों में केंद्रित है। यही वजह रही कि बाजार में गिरावट के बावजूद उनकी संपत्ति में इजाफा हुआ।
आखिर कौन हैं वनाजा अय्यर, जिन्होंने सबको पीछे छोड़ दिया?
इस तिमाही की सबसे बड़ी चर्चा वनाजा अय्यर रहीं। उन्होंने सिर्फ तीन महीनों में 118.7 फीसदी की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की। उनकी पोर्टफोलियो वैल्यू 513.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,123 करोड़ रुपये हो गई।
यानी उन्होंने करीब ₹609 करोड़ की अतिरिक्त संपत्ति जोड़ी। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह ग्रोथ राधाकिशन दमानी से भी कई गुना ज्यादा रही।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि उनके पोर्टफोलियो में शामिल कुछ चुनिंदा शेयरों में तेज उछाल आया, जिससे उनकी कुल नेटवर्थ में विस्फोटक बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इस तरह की तेजी वाले पोर्टफोलियो में जोखिम भी काफी ज्यादा होता है।
क्यों आई बाजार में इतनी बड़ी गिरावट?
विशेषज्ञों के मुताबिक जनवरी-मार्च तिमाही में बाजार पर कई दबाव एक साथ दिखे: अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ओवरवैल्यूएशन, वैश्विक जियो-पॉलिटिकल तनाव, आईटी और केमिकल सेक्टर में कमजोरी. इन कारणों से कई हाई-वैल्यू पोर्टफोलियो तेजी से नीचे आए।
छोटे निवेशकों को क्या सीख लेनी चाहिए?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ बड़े निवेशकों की होल्डिंग देखकर निवेश करना हमेशा सही रणनीति नहीं होती। कई बार बड़े निवेशकों के पोर्टफोलियो में भी भारी गिरावट आ सकती है।
निवेश से पहले इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है: पोर्टफोलियो diversification रखें, सिर्फ hype वाले शेयरों से बचें, लंबी अवधि की रणनीति अपनाएं, कंपनी के fundamentals जरूर जांचें, risk management को नजरअंदाज न करें.
बाजार में आगे क्या रहेगा ट्रेंड?
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में बाजार में volatility बनी रह सकती है। हालांकि, मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर earnings growth वाली कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
साथ ही, अगर वैश्विक ब्याज दरों में नरमी आती है और विदेशी निवेश वापस लौटता है, तो भारतीय बाजार में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करें।
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