भारत अब पेट्रोल और डीजल के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल आधारित ईंधन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। केंद्र सरकार ने देशभर में E100 यानी 100% एथेनॉल फ्यूल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अगले दो वर्षों में 5000 डिस्पेंसिंग स्टेशन स्थापित करने का रोडमैप तैयार किया है। इस योजना का उद्देश्य न सिर्फ कच्चे तेल के आयात बिल को कम करना है, बल्कि घरेलू एथेनॉल उद्योग और किसानों को भी बड़ा फायदा पहुंचाना है।
सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 4 मई को ऑटोमोबाइल कंपनियों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में पहली बार E100 इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की विस्तृत योजना साझा की। यह भारत में फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) को बढ़ावा देने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्या है E100 और Flex Fuel Vehicle?
E100 ऐसा ईंधन है जिसमें 100% एथेनॉल का उपयोग होता है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। वहीं Flex Fuel Vehicles यानी FFVs ऐसे वाहन होते हैं जो पेट्रोल, एथेनॉल या दोनों के मिश्रण पर चल सकते हैं।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वाहन चालक उपलब्धता के हिसाब से ईंधन चुन सकता है। इससे आयातित कच्चे तेल पर दबाव कम होगा और घरेलू जैव ईंधन उद्योग को मजबूती मिलेगी।
भारत इस समय पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग कर रहा है, लेकिन अब सरकार E100 तक पहुंचने की दिशा में चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है।
अगले एक महीने में शुरू होंगे 150 E100 पंप
सरकार की योजना के अनुसार पहले चरण में दिल्ली, मुंबई, पुणे और नागपुर में अगले एक महीने के भीतर 150 E100 रिटेल आउटलेट शुरू किए जाएंगे।
इसके बाद अगले 6 से 12 महीनों में दिल्ली-NCR, महाराष्ट्र, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद. जैसे बड़े शहरों में E100 नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इस चरण में कुल 500 E100 पंप चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मिड-टर्म टारगेट अगले 24 महीनों में देशभर में 5000 E100 डिस्पेंसिंग स्टेशन शुरू करना है।
ऑटो कंपनियां तैयार, लेकिन लॉन्च अटका
देश की लगभग सभी बड़ी ऑटो कंपनियों ने Flex Fuel Vehicles के प्रोटोटाइप तैयार कर लिए हैं। इनमें शामिल हैं Maruti Suzuki, Hyundai, Tata Motors, Mahindra & Mahindra, Hero MotoCorp, TVS Motor Company.
हालांकि उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि E100 फ्यूल पंपों की कमी और E100 की कीमत को लेकर स्पष्टता न होने के कारण कंपनियों ने अभी तक बड़े स्तर पर FFVs लॉन्च नहीं किए हैं।
भारत का तेल आयात बिल कितना बड़ा?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातक देशों में शामिल है। FY26 में देश का कुल क्रूड ऑयल इम्पोर्ट बिल लगभग ₹10.9 लाख करोड़ रहा। भारत अपनी जरूरत का करीब 85-90% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। यही वजह है कि सरकार एथेनॉल जैसे घरेलू विकल्पों पर तेजी से फोकस कर रही है।
Indian Sugar & Bioenergy Manufacturing Association (ISMA) के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार:
“भारत का लगभग 85-90% कच्चा तेल आयात होता है, जबकि 100% एथेनॉल देश में ही उत्पादित होता है। इससे करोड़ों किसानों और एथेनॉल इकोसिस्टम से जुड़े लोगों को फायदा मिलेगा।”
किसानों को कैसे होगा फायदा?
एथेनॉल उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का, कृषि अपशिष्ट से किया जाता है। ऐसे में E100 नेटवर्क बढ़ने से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शुगर मिलों को नया बाजार मिलेगा, कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार होगा, ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी.
लेकिन सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
सरकार की योजना महत्वाकांक्षी जरूर है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां भी मौजूद हैं।
1. FFV वाहन बेहद कम
भारत में अभी Flex Fuel Vehicles की संख्या बहुत कम है। इसी वजह से E100 की मांग भी नगण्य बनी हुई है।
2. E100 की माइलेज कम
विशेषज्ञों के मुताबिक E100 फ्यूल सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम फ्यूल एफिशिएंसी देता है। यानी वाहन ज्यादा ईंधन खर्च कर सकता है।
3. कीमत सबसे बड़ा मुद्दा
Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) ने सुझाव दिया है कि E100 की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम से कम 30% सस्ती होनी चाहिए। तभी उपभोक्ता इसे अपनाने के लिए तैयार होंगे।
SIAM ने सरकार से टैक्स इंसेंटिव और वित्तीय सहायता देने की भी मांग की है।
इंडियन ऑयल का पायलट क्यों नहीं चला?
Indian Oil Corporation ने पहले पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 400 E100 आउटलेट शुरू किए थे। लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इन पंपों पर फ्यूल की मांग बेहद कम रही।
अधिकारी ने बताया कि FFV वाहन बहुत कम हैं, E100 की माइलेज कम है, ग्राहक इसे आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं मानते. इसी वजह से E100 फिलहाल देश की कुल रिटेल फ्यूल बिक्री का 0.5% भी हिस्सा नहीं बना पाया है।
ब्राजील मॉडल से प्रेरणा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ब्राजील के मॉडल से प्रेरणा ले सकता है। ब्राजील दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां Flex Fuel Vehicles बड़े स्तर पर सफल रहे हैं। वहां एथेनॉल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने के कारण लोग आसानी से पेट्रोल और एथेनॉल के बीच चयन कर पाते हैं।
भारत भी उसी दिशा में बढ़ने की कोशिश कर रहा है।
क्या पेट्रोल सस्ता होगा?
अगर E100 बड़े स्तर पर सफल होता है तो पेट्रोल आयात घट सकता है, विदेशी मुद्रा की बचत होगी, तेल कीमतों के वैश्विक झटकों का असर कम हो सकता है
हालांकि निकट भविष्य में पेट्रोल सस्ता होने की संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर और वाहन नेटवर्क विकसित होने में समय लगेगा।
आने वाले समय में क्या बदल सकता है?
सरकार की योजना सफल रही तो अगले कुछ वर्षों में FFV कारें और बाइक बाजार में तेजी से आएंगी, पेट्रोल पंपों पर E100 उपलब्ध होगा, एथेनॉल उत्पादन बढ़ेगा, किसानों को नया बाजार मिलेगा, तेल आयात पर निर्भरता घटेगी
लेकिन इसके लिए सस्ती कीमत, टैक्स राहत, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्राहकों में भरोसा सबसे जरूरी होंगे।
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