मुंबई: ICICI Prudential Asset Management ने अपने स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) प्लेटफॉर्म के तहत दो नई निवेश रणनीतियों की शुरुआत की है। कंपनी ने मंगलवार को iSIF एक्टिव एसेट अलोकेटर लॉन्ग-शॉर्ट फंड और iSIF इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड लॉन्च करने की घोषणा की। इन दोनों योजनाओं के लिए न्यू फंड ऑफर (NFO) आज से निवेशकों के लिए खुल चुका है और इसमें 2 जून 2026 तक आवेदन किया जा सकेगा।
भारतीय शेयर बाजार में लगातार बढ़ती अस्थिरता, सेक्टोरल रोटेशन और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एसेट मैनेजमेंट कंपनियां अब पारंपरिक निवेश मॉडल से आगे बढ़कर ज्यादा लचीले और डायनामिक निवेश विकल्पों पर जोर दे रही हैं। इसी रणनीति के तहत ICICI Prudential AMC ने लॉन्ग-शॉर्ट पोजिशनिंग और डेरिवेटिव आधारित रिस्क मैनेजमेंट वाले इन दो नए फंड्स को पेश किया है।
क्यों खास माने जा रहे हैं ये नए फंड?
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बाजार में तेजी से बदलाव देखने को मिले हैं। कभी बैंकिंग और PSU शेयरों में रैली देखने को मिलती है तो कभी आईटी और फार्मा सेक्टर बाजार को संभालते हैं। इसी तरह स्मॉलकैप, मिडकैप और लार्जकैप शेयरों में भी लगातार रोटेशन होता रहता है। ऐसे माहौल में केवल पारंपरिक “Buy and Hold” रणनीति हमेशा प्रभावी नहीं रहती।
ICICI Prudential AMC के कार्यकारी निदेशक और CIO S. Naren ने कहा कि बाजारों में एसेट क्लास, सेक्टर्स, स्टाइल और मार्केट कैप के बीच तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में स्थिर एसेट अलोकेशन मॉडल निवेशकों के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि iSIF प्लेटफॉर्म का उद्देश्य निवेशकों को ऐसे लचीले निवेश विकल्प देना है जो बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सकें।
उनके अनुसार ये रणनीतियां केवल इक्विटी निवेश तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि डेरिवेटिव्स, लॉन्ग-शॉर्ट पोजिशनिंग और डायनामिक एसेट अलोकेशन का भी उपयोग करेंगी ताकि जोखिम और रिटर्न के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सके।
iSIF एक्टिव एसेट अलोकेटर लॉन्ग-शॉर्ट फंड क्या है?
यह एक Interval Investment Strategy है, जिसमें निवेश केवल इक्विटी तक सीमित नहीं रहेगा। यह फंड इक्विटी, डेट, इक्विटी डेरिवेटिव्स, डेट डेरिवेटिव्स, InvITs और कमोडिटी डेरिवेटिव्स जैसी विभिन्न परिसंपत्तियों में निवेश करेगा।
इस रणनीति की सबसे बड़ी खासियत इसका डायनामिक एसेट अलोकेशन मॉडल है। यानी बाजार की स्थिति, वैल्यूएशन, ब्याज दरों, महंगाई और वैश्विक संकेतों के आधार पर निवेश का अनुपात बदला जाएगा।
अगर बाजार सस्ता दिखाई देता है तो फंड इक्विटी एक्सपोजर बढ़ा सकता है। वहीं यदि बाजार अत्यधिक महंगा हो जाता है तो जोखिम कम करने के लिए डेट या अन्य सुरक्षित परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ाया जा सकता है।
लॉन्ग-शॉर्ट रणनीति कैसे काम करेगी?
इस फंड में डेरिवेटिव्स के जरिए सीमित शॉर्ट एक्सपोजर भी लिया जा सकेगा। इसका मतलब यह है कि फंड केवल बाजार में तेजी से ही नहीं बल्कि गिरावट से भी लाभ कमाने की कोशिश करेगा।
AMC के अनुसार इस रणनीति में कुल नेट एसेट का 25% तक अनहेज्ड शॉर्ट एक्सपोजर लिया जा सकता है। इसका उद्देश्य बाजार की अस्थिरता के दौरान पोर्टफोलियो को संतुलित रखना है।
iSIF इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड की क्या रणनीति होगी?
यह एक ओपन-एंडेड इक्विटी निवेश रणनीति है जो मुख्य रूप से सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों और इक्विटी आधारित इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करेगी। इसमें भी सीमित शॉर्ट पोजिशनिंग की सुविधा होगी।
यह फंड बाजार पूंजीकरण, सेक्टर और स्टाइल आधारित अवसरों की पहचान करने पर फोकस करेगा। AMC का कहना है कि इस रणनीति के तहत 650 से अधिक कंपनियों को ट्रैक किया जाएगा ताकि बेहतर निवेश अवसरों की पहचान की जा सके।
शेयर चयन किन आधारों पर होगा?
फंड मैनेजमेंट टीम निम्न प्रमुख कारकों के आधार पर कंपनियों का चयन करेगी: कंपनी की वित्तीय स्थिति, बिजनेस मॉडल की मजबूती, उद्योग की संभावनाएं, प्रबंधन की गुणवत्ता, भविष्य की ग्रोथ क्षमता, वैल्यूएशन यानी यह रणनीति केवल तेजी वाले शेयर खरीदने पर निर्भर नहीं रहेगी बल्कि जोखिम और वैल्यूएशन दोनों को ध्यान में रखकर पोर्टफोलियो तैयार करेगी।
कम से कम कितना निवेश करना होगा?
AMC की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक पहली बार निवेश करने वाले निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 10 लाख रुपये तय की गई है। हालांकि जो निवेशक पहले से न्यूनतम निवेश सीमा पूरी कर चुके हैं, वे बाद में केवल 10,000 रुपये से अतिरिक्त निवेश कर सकेंगे।
यह सीमा साफ संकेत देती है कि ये रणनीतियां मुख्य रूप से हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) और बड़े निवेशकों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई हैं।
टैक्स नियम क्या होंगे?
iSIF इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड पर 12.5% की दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (LTCG) दर लागू होगी। इसके लिए न्यूनतम होल्डिंग अवधि 12 महीने तय की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लॉन्ग-शॉर्ट रणनीतियां उन निवेशकों के लिए उपयोगी हो सकती हैं जो बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान भी नियंत्रित जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न चाहते हैं। हालांकि इनमें डेरिवेटिव्स और शॉर्ट पोजिशनिंग शामिल होने के कारण जोखिम पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स की तुलना में अधिक जटिल हो सकता है।
भारतीय निवेशकों में बढ़ रही है वैकल्पिक रणनीतियों की मांग
पिछले दो वर्षों में भारतीय निवेशकों के बीच वैकल्पिक निवेश रणनीतियों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। खासकर तब जब बाजार में अचानक करेक्शन, ब्याज दरों में बदलाव और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव देखने को मिले।
कई निवेशक अब केवल इक्विटी SIP तक सीमित रहने के बजाय मल्टी-एसेट, लॉन्ग-शॉर्ट और हेजिंग आधारित रणनीतियों की तरफ भी रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि AMC कंपनियां अब Specialized Investment Funds (SIFs) जैसे नए ढांचे पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में ऐसे हाइब्रिड और फ्लेक्सिबल निवेश उत्पादों की संख्या और बढ़ सकती है।
निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
हालांकि लॉन्ग-शॉर्ट रणनीतियां बाजार गिरावट के दौरान जोखिम कम करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन ये पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स की तुलना में ज्यादा जटिल होती हैं। निवेशकों को निवेश से पहले निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए: फंड की जोखिम प्रोफाइल समझें, डेरिवेटिव आधारित रणनीतियों का प्रभाव जानें, निवेश अवधि लंबी रखें, केवल उच्च जोखिम क्षमता होने पर निवेश करें, वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें.
निष्कर्ष
ICICI Prudential AMC के ये दोनों नए iSIF फंड भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में बदलती निवेश रणनीतियों का संकेत माने जा रहे हैं। बाजार में लगातार बढ़ती अस्थिरता के बीच डायनामिक एसेट अलोकेशन और लॉन्ग-शॉर्ट रणनीतियों वाले उत्पाद निवेशकों को पारंपरिक निवेश विकल्पों से अलग अनुभव दे सकते हैं।
हालांकि ये रणनीतियां अनुभवी और उच्च जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त मानी जा रही हैं। ऐसे में निवेश से पहले फंड के दस्तावेज, जोखिम कारक और निवेश उद्देश्य को अच्छी तरह समझना जरूरी होगा।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।)


