अमेरिका में चल रहे हाई-प्रोफाइल सिक्योरिटीज और रिश्वतखोरी मामले में आखिरकार गौतम अदाणी और उनके भांजे सागर अदाणी को बड़ी राहत मिल गई है। अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) और अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) दोनों ने उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को बंद करने का फैसला किया है।
यह मामला सिर्फ एक कारोबारी विवाद नहीं था, बल्कि भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक अदाणी ग्रुप की वैश्विक साख, विदेशी निवेशकों के भरोसे और भारत-अमेरिका कारोबारी रिश्तों से भी जुड़ा हुआ था। आरोप थे कि अदाणी ग्रुप ने भारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए सरकारी अधिकारियों को करीब ₹2.5 हजार करोड़ की रिश्वत देने या रिश्वत का वादा करने की कोशिश की।
हालांकि, करीब दो साल तक चले कानूनी संघर्ष के बाद अदाणी ग्रुप ने अमेरिकी सिस्टम में अपनी कानूनी रणनीति के दम पर पूरी बाजी पलट दी। अब मामला समझौते के जरिए खत्म हो चुका है और अमेरिकी अदालतों में चल रही कार्यवाही बंद हो गई है।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) के उन बड़े सोलर और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़ा था, जिन्हें 2022 से 2024 के बीच भारत के कई राज्यों में हासिल किया गया। अमेरिकी एजेंसियों का आरोप था कि इन प्रोजेक्ट्स को हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
SEC का दावा था कि इन प्रोजेक्ट्स के आधार पर अदाणी ग्रुप ने अमेरिकी निवेशकों से पूंजी जुटाई और निवेशकों को पूरी जानकारी नहीं दी गई। इसी वजह से अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों के उल्लंघन का मामला बनाया गया।
Adani US SEC Fraud Case: पूरी टाइमलाइन
2022-2024: ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स का विस्तार
अदाणी ग्रीन एनर्जी ने इस दौरान देशभर में कई बड़े सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट हासिल किए। भारत के ग्रीन एनर्जी सेक्टर में अदाणी ग्रुप तेजी से सबसे बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा।
कंपनी ने विदेशी निवेशकों और ग्लोबल फंड्स से भी भारी निवेश जुटाया। यही बाद में अमेरिकी जांच एजेंसियों की नजर में आया।
मार्च 2024: SEC की जांच शुरू
मार्च 2024 में अमेरिकी SEC ने आरोप लगाया कि अदाणी ग्रुप ने सोलर प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को लगभग ₹2.5 हजार करोड़ की रिश्वत देने या उसका वादा करने की कोशिश की।
SEC ने दावा किया कि अमेरिकी निवेशकों से पैसा जुटाने के दौरान इन तथ्यों का सही तरीके से खुलासा नहीं किया गया। इसके बाद औपचारिक जांच शुरू हुई।
नवंबर 2024: गौतम अदाणी और सागर अदाणी पर मुकदमा
नवंबर 2024 में SEC ने गौतम अदाणी और उनके भांजे सागर अदाणी के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया।
आरोप लगाया गया कि दोनों ने कथित रिश्वत योजना का नेतृत्व किया और सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए सरकारी अधिकारियों को प्रभावित करने की कोशिश की।
इस कार्रवाई के बाद अदाणी ग्रुप के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और विदेशी निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई।
दिसंबर 2024: आपराधिक और सिविल केस जुड़े
12 दिसंबर 2024 को SEC केस और अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा लगाए गए आपराधिक आरोपों को आपस में समन्वित प्रक्रिया के तहत जोड़ दिया गया।
इससे मामला और ज्यादा गंभीर हो गया क्योंकि अब सिर्फ सिविल नहीं बल्कि क्रिमिनल जांच भी चल रही थी।
जनवरी 2026: समन भेजने की तैयारी
जांच आगे बढ़ने के बाद अमेरिकी एजेंसियों ने अदाणी और अन्य आरोपियों को समन भेजने की प्रक्रिया शुरू की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, SEC भारत सरकार को बायपास करके सीधे नोटिस भेजने की तैयारी कर रही थी। इससे कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर भी मामला संवेदनशील बन गया।
सुनवाई में देरी
क्योंकि प्रतिवादी भारत में रह रहे थे, इसलिए अमेरिकी एजेंसियों को कानूनी नोटिस पहुंचाने में काफी दिक्कतें आईं। SEC ने अमेरिकी अदालत को बताया कि भारतीय अधिकारियों से सहयोग लेने में प्रक्रियागत मुश्किलें आ रही हैं। इसी कारण केस लंबा खिंचता गया।
23 जनवरी 2026: अदालत में विशेष अर्जी
23 जनवरी 2026 को SEC ने अदालत में आवेदन देकर अदाणी और अन्य लोगों को कानूनी नोटिस भेजने की अनुमति मांगी। इस खबर के सामने आते ही शेयर बाजार में अदाणी ग्रुप के शेयरों पर दबाव बढ़ गया और बाजार पूंजीकरण में करीब 13 अरब डॉलर की गिरावट देखने को मिली।
जनवरी 2026 के आखिर में: बड़ी कानूनी तैयारी
अदाणी ग्रुप ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वॉल स्ट्रीट के प्रसिद्ध वकील रॉबर्ट गिफा जूनियर को अपनी कानूनी टीम का नेतृत्व सौंपा। यहीं से अदाणी ग्रुप ने आक्रामक कानूनी रणनीति अपनानी शुरू की।
अप्रैल 2026: अमेरिकी अधिकार क्षेत्र को चुनौती
7 अप्रैल 2026 को अदाणी पक्ष ने अदालत में प्री-मोशन लेटर दाखिल किया। इसमें कहा गया कि अमेरिकी एजेंसियां अमेरिकी कानून का गलत तरीके से एक्स्ट्रा-टेरिटोरियल इस्तेमाल कर रही हैं। अदाणी पक्ष का सबसे बड़ा तर्क यही था कि कथित घटनाएं भारत में हुईं, इसलिए SEC का अधिकार क्षेत्र सीमित है।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक यही तर्क बाद में केस कमजोर पड़ने की बड़ी वजह बना।
मई 2026: समझौता और केस खत्म
14 मई 2026 को SEC और अदाणी पक्ष के बीच समझौते की घोषणा हुई। दोनों पक्ष $18 मिलियन (करीब ₹172-173 करोड़) के सेटलमेंट पर सहमत हो गए, जिसके बाद सिविल कानूनी कार्यवाही समाप्त करने का रास्ता साफ हो गया।
किसने कितना भुगतान किया?
गौतम अदाणी: 6 मिलियन डॉलर, सागर अदाणी: 12 मिलियन डॉलर दोनों ने मिलकर कुल 18 मिलियन डॉलर का भुगतान किया।
18 मई 2026: DOJ ने हटाए आपराधिक आरोप
18 मई 2026 को अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अदाणी और सागर अदाणी के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप हमेशा के लिए वापस लेने का फैसला किया। इसके साथ ही न्यूयॉर्क में चल रहा हाई-प्रोफाइल सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड मामला पूरी तरह समाप्त हो गया।
अदाणी ने कैसे पलटी बाजी?
इस पूरे मामले में अदाणी ग्रुप की सबसे बड़ी रणनीति अमेरिकी अधिकार क्षेत्र को चुनौती देना रही।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि:
- आरोपित घटनाएं भारत में हुई थीं
- संबंधित प्रोजेक्ट भारतीय थे
- भारतीय अधिकारियों से जुड़े आरोप थे
- इसलिए अमेरिकी एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र को अदालत में चुनौती दी गई
इसके अलावा अदाणी ग्रुप ने अमेरिका के बड़े कानूनी विशेषज्ञों को शामिल किया और मामला लंबा खिंचने दिया, जिससे SEC और DOJ पर भी दबाव बढ़ा।
क्या अमेरिका में निवेश का मिला फायदा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गौतम अदाणी ने अमेरिका में करीब 10 अरब डॉलर निवेश करने की योजना पेश की है। बताया जा रहा है कि इस निवेश से लगभग 15 हजार नौकरियां पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से ट्रंप प्रशासन ने भी मामले को सुलझाने में रुचि दिखाई। हालांकि आधिकारिक तौर पर अमेरिकी एजेंसियों ने इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है, लेकिन राजनीतिक और कारोबारी हलकों में इस फैसले को बड़े रणनीतिक समझौते के तौर पर देखा जा रहा है।
भारतीय बाजार पर क्या पड़ा असर?
जब SEC जांच की खबर आई थी तब अदाणी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई, विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगाया, मार्केट कैप में अरबों डॉलर की गिरावट दर्ज हुई लेकिन अब केस खत्म होने के बाद अदाणी ग्रुप के शेयरों में तेजी लौट सकती है, विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा, ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को नई रफ्तार मिल सकती है
निष्कर्ष
अमेरिका में अदाणी ग्रुप पर लगे रिश्वतखोरी और सिक्योरिटीज फ्रॉड के आरोप पिछले दो वर्षों में सबसे चर्चित कॉर्पोरेट मामलों में से एक रहे। लेकिन कानूनी रणनीति, समझौते और राजनीतिक-आर्थिक समीकरणों के बीच आखिरकार अदाणी ग्रुप इस संकट से बाहर निकलने में सफल रहा।
अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि केस खत्म होने के बाद अदाणी ग्रुप अपने ग्रीन एनर्जी और अंतरराष्ट्रीय निवेश प्लान्स को कितनी तेजी से आगे बढ़ाता है।
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