पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी का असर अब शेयर बाजार में भी साफ दिखाई देने लगा है। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी OMCs के शेयरों में मंगलवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। खासतौर पर Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited के शेयर शुरुआती कारोबार में 3 फीसदी तक उछल गए।
विश्लेषकों का मानना है कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव कम होगा। पिछले कई महीनों से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू रिटेल प्राइस के बीच अंतर बढ़ने के कारण OMC कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा था। अब कीमतों में वृद्धि से निवेशकों को उम्मीद है कि कंपनियों की कमाई बेहतर हो सकती है।
OMC शेयरों में कितनी तेजी?
मंगलवार के कारोबार में तीनों प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।
| कंपनी | शेयर में तेजी | कारोबार स्तर |
|---|---|---|
| HPCL | 2.86% | ₹369.20 |
| IOC | 2.31% | ₹134.90 |
| BPCL | 2.74% | ₹288.50 |
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और कंपनियां रिटेल कीमतों में समायोजन करती रहती हैं, तो आने वाले दिनों में इन शेयरों में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
पेट्रोल-डीजल कीमतों से क्यों जुड़ी है OMC शेयरों की चाल?
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां सीधे तौर पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री से जुड़ी होती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा हो जाता है लेकिन घरेलू बाजार में कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं, तब कंपनियों का मार्जिन प्रभावित होता है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ग्लोबल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण बीते कुछ समय से कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे माहौल में सरकारी कंपनियों पर उपभोक्ताओं को राहत देने का दबाव रहता है। यही वजह रही कि मार्च तिमाही में कई OMC कंपनियों को लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचना पड़ा।
अब जब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है तो बाजार को लग रहा है कि कंपनियों की अंडर-रिकवरी कम होगी और मुनाफा सुधर सकता है।
IOC के Q4 नतीजों ने भी बढ़ाया भरोसा
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के चौथी तिमाही के नतीजों ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि जनवरी-मार्च 2025-26 तिमाही में उसका स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 56 फीसदी बढ़कर ₹11,377.51 करोड़ पहुंच गया।
एक साल पहले समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹7,264.85 करोड़ था। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में काफी अस्थिरता बनी हुई थी।
कंपनी के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में रिफाइनिंग, पाइपलाइन और मार्केटिंग कारोबार ने रिकॉर्ड प्रदर्शन किया। इससे ऑपरेशनल मजबूती देखने को मिली।
पश्चिम एशिया तनाव का कितना असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर आने वाले महीनों में तेल बाजार पर और दिखाई दे सकता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार और OMC कंपनियों दोनों के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।
हालांकि निवेशकों का मानना है कि मौजूदा समय में OMC कंपनियों के शेयरों में वैल्यू बायिंग देखने को मिल रही है। खासकर तब जब कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आए हैं और पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी से कमाई पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
क्या आगे और बढ़ सकते हैं OMC शेयर?
ब्रोकरेज फर्म्स का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, सरकार अत्यधिक प्राइस कंट्रोल नहीं करती, और कंपनियों का मार्केटिंग मार्जिन सुधरता है, तो IOC, BPCL और HPCL जैसे शेयरों में आगे भी तेजी जारी रह सकती है।
हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि OMC कंपनियों का प्रदर्शन काफी हद तक सरकारी नीतियों, वैश्विक तेल कीमतों और रुपये-डॉलर विनिमय दर पर निर्भर करता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
तेल कंपनियों के शेयरों में तेजी यह संकेत देती है कि बाजार फिलहाल इन कंपनियों की आय में सुधार की उम्मीद कर रहा है। लेकिन ऊर्जा सेक्टर हमेशा वैश्विक घटनाओं से प्रभावित रहता है, इसलिए इसमें उतार-चढ़ाव भी ज्यादा देखने को मिलता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को किसी भी निवेश से पहले कंपनियों की बैलेंस शीट, सरकारी नीतियों और कच्चे तेल के ट्रेंड पर नजर रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
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