Share Market Crash Today
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार सुबह घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी 250 अंक से अधिक गिर गया। इसी बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने ग्लोबल निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इसका सीधा असर शेयर बाजार, बॉन्ड यील्ड और रुपये पर देखने को मिल रहा है।
शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट
सुबह करीब 9:23 बजे बीएसई सेंसेक्स 800.46 अंक यानी 1.06 फीसदी गिरकर 74,437.53 अंक पर कारोबार करता दिखा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 237.60 अंक यानी करीब 1 फीसदी टूटकर 23,405.90 अंक पर पहुंच गया।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 27 लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। सबसे ज्यादा दबाव पावर, ऑटो, बैंकिंग और मेटल सेक्टर में देखने को मिला।
इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
शुरुआती कारोबार में जिन बड़ी कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा टूटे उनमें शामिल हैं:
| कंपनी | गिरावट |
|---|---|
| पावरग्रिड | 3.81% |
| टाटा स्टील | 3% से ज्यादा |
| मारुति सुजुकी | भारी गिरावट |
| बजाज फाइनेंस | दबाव में |
| एचडीएफसी बैंक | कमजोरी |
| महिंद्रा एंड महिंद्रा | गिरावट |
| टाइटन | लाल निशान |
हालांकि आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली। इंफोसिस, टीसीएस और टेक महिंद्रा में शुरुआती बढ़त दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में गिरावट से आईटी कंपनियों को कुछ फायदा होता है क्योंकि उनकी कमाई डॉलर में होती है।
रुपया पहली बार 96 के पार
भारतीय मुद्रा बाजार में भी आज भारी दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में रुपया 0.2 फीसदी टूटकर 96.18 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। इससे पहले रुपये का ऑल टाइम लो 96.1350 था।
यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र है जब रुपये में गिरावट दर्ज की गई है। फरवरी के आखिर में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 5.5 फीसदी कमजोर हो चुका है।
विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए बड़ी चिंता बन जाती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।
क्यों बढ़ी बाजार में घबराहट?
1. ईरान युद्ध का असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बना दिया है। निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की तरफ जा रहे हैं।
2. कच्चे तेल में तेजी
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने से सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।
3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
एफआईआई लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया है।
4. बॉन्ड यील्ड में उछाल
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों का रुझान डॉलर की तरफ बढ़ा है। इसका असर उभरते बाजारों की करेंसी पर पड़ा है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।
संभावित असर:
- पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं
- हवाई यात्रा का किराया बढ़ सकता है
- ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जियां और राशन महंगा हो सकता है
- महंगाई बढ़ने का खतरा
- EMI और ब्याज दरों पर असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर पश्चिम एशिया का तनाव और बढ़ता है तो भारतीय बाजार में आने वाले दिनों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार जानकारों का कहना है कि घबराकर बिकवाली करने से बचना चाहिए। लंबे समय के निवेशकों को मजबूत कंपनियों में निवेश बनाए रखना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक एकमुश्त निवेश से बचें, SIP जारी रखें,आईटी और डिफेंस सेक्टर पर नजर रखें, ज्यादा कर्ज वाली कंपनियों से दूरी रखें
आने वाले दिनों में कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
अब निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, ईरान युद्ध से जुड़ी खबरों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी।
अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन हालात बिगड़ने पर सेंसेक्स और निफ्टी में दबाव जारी रह सकता है।
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