पश्चिम एशिया में जारी तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते खतरे और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन पर दबाव के बीच भारत के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। देश में घरेलू रसोई गैस यानी LPG की सप्लाई बनाए रखने के लिए दो विशाल एलपीजी टैंकर सुरक्षित भारत पहुंच रहे हैं। इनमें से एक जहाज गुजरात के कांडला पोर्ट पर पहुंच चुका है, जबकि दूसरा सोमवार को मंगलौर पोर्ट पहुंचेगा।
इन दोनों जहाजों में कुल 66,427 मीट्रिक टन LPG लाई जा रही है। यह मात्रा इतनी है कि इससे करीब 46.7 लाख घरेलू गैस सिलेंडर भरे जा सकते हैं। ऐसे समय में जब मिडल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, यह भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से बड़ी राहत मानी जा रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इन टैंकरों का सुरक्षित पहुंचना केवल गैस सप्लाई की खबर नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति और समुद्री सप्लाई नेटवर्क की मजबूती का संकेत भी है।
कांडला पहुंचा पहला टैंकर, दूसरा सोमवार को पहुंचेगा
ताजा जानकारी के अनुसार मार्शल आइलैंड के झंडे वाला LPG जहाज ‘सिमी’ लगभग 20,000 टन गैस लेकर गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंच चुका है। जहाज को कांडला पोर्ट की ऑयल जेटी नंबर-1 पर डॉक किया गया है और अनलोडिंग की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।
वहीं, दूसरा विशाल टैंकर ‘एनवी सनशाइन’ 46,427 टन LPG लेकर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह जहाज वियतनाम के ध्वज के तहत संचालित हो रहा है और इसके सोमवार को मंगलौर पोर्ट पहुंचने की उम्मीद है।
इन दोनों जहाजों का समय पर पहुंचना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात बेहद अस्थिर रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक कच्चे तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। भारत समेत कई एशियाई देश ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रूट पर निर्भर हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के करीब 20% तेल व्यापार का रास्ता यही है खाड़ी देशों से आने वाली LPG सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है युद्ध या समुद्री हमलों की स्थिति में सप्लाई तुरंत प्रभावित हो सकती है हाल के दिनों में अमेरिका-ईरान तनाव और समुद्री सुरक्षा खतरे बढ़ने से पूरी दुनिया की नजर इस समुद्री मार्ग पर बनी हुई है।
खतरे के बीच भारत ने कैसे बचाई सप्लाई?
जानकारी के अनुसार ‘सिमी’ ने 13 मई और ‘एनवी सनशाइन’ ने 14 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया था। उसी दौरान ओमान के जलक्षेत्र में भारतीय नाव ‘हाजी अली’ पर हमला हुआ था और वह डूब गई थी। हालांकि सभी 14 भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया।
इन घटनाओं के बावजूद भारतीय पेट्रोलियम मंत्रालय, शिपिंग एजेंसियों और विदेश मंत्रालय के बीच लगातार समन्वय बना रहा। इसी रणनीति की वजह से दोनों LPG टैंकर सुरक्षित भारत की ओर बढ़ते रहे। ऊर्जा सेक्टर से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में किसी भी ऊर्जा आयातक देश के लिए समुद्री लॉजिस्टिक्स सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं।
46.7 लाख सिलेंडर का क्या मतलब है?
अगर घरेलू 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर के हिसाब से गणना करें तो:
- कुल LPG स्टॉक: 66,427 मीट्रिक टन
- कुल वजन: लगभग 6.64 करोड़ किलोग्राम
- संभावित घरेलू सिलेंडर: करीब 46.7 लाख
भारत में हर दिन लगभग 55 लाख घरेलू LPG सिलेंडरों की डिलीवरी होती है। यानी यह खेप देश की लगभग एक दिन की कुल घरेलू डिलीवरी के बराबर मानी जा सकती है। हालांकि यह मात्रा पूरे देश की लंबी अवधि की जरूरत पूरी नहीं कर सकती, लेकिन क्षेत्रीय सप्लाई और इमरजेंसी स्टॉक बनाए रखने के लिहाज से यह बेहद अहम है।
भारत के लिए क्यों बड़ी रणनीतिक राहत है यह खेप?
भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने का सीधा असर भारतीय घरेलू गैस बाजार पर पड़ सकता है। इन टैंकरों के पहुंचने से भारत को कई स्तर पर राहत मिलेगी:
1. इमरजेंसी बफर स्टॉक सुरक्षित रहेगा
भारत लगभग 45 दिनों का रणनीतिक गैस स्टॉक बनाए रखने की कोशिश करता है। लगातार सप्लाई पहुंचने से यह बफर मजबूत बना रहेगा।
2. बॉटलिंग प्लांट्स को राहत
गुजरात, कर्नाटक और आसपास के राज्यों के गैस बॉटलिंग प्लांट कई दिनों तक पूरी क्षमता से काम कर पाएंगे।
3. कालाबाजारी रोकने में मदद
सप्लाई सामान्य रहने से बाजार में कृत्रिम कमी और ब्लैक मार्केटिंग का खतरा घटेगा।
4. कीमतों पर दबाव कम होगा
अगर सप्लाई चेन लगातार चलती रही तो घरेलू LPG कीमतों में अचानक उछाल की संभावना कम रहेगी।
सरकार ने वैकल्पिक देशों से भी शुरू की तैयारी
भारत अब केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहने की रणनीति से धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार अमेरिका और यूरोप समेत दूसरे क्षेत्रों से भी LPG आयात बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
ऊर्जा बाजार के जानकार मानते हैं कि आने वाले समय में भारत:
- अमेरिका से LPG खरीद बढ़ा सकता है
- लंबी अवधि के सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट कर सकता है
- वैकल्पिक समुद्री रूट विकसित कर सकता है
- रणनीतिक ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ा सकता है
यह रणनीति भविष्य में किसी बड़े वैश्विक संकट के दौरान भारत को अधिक सुरक्षित बना सकती है।
सरकार की पैनी नजर, सप्लाई बाधित होने की सूचना नहीं
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में कहीं भी LPG सप्लाई बाधित होने की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। मंत्रालय लगातार राज्यों और तेल कंपनियों के साथ स्थिति की निगरानी कर रहा है।
इसके साथ ही डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) आधारित सिलेंडर डिलीवरी में लगभग 95% तक वृद्धि दर्ज की गई है। इसका उद्देश्य फर्जी डिलीवरी और कालाबाजारी रोकना है। सरकार का दावा है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को किसी तरह की बड़ी परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
क्या आने वाले दिनों में बढ़ सकता है खतरा?
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, LPG आयात महंगा हो सकता है, शिपिंग इंश्योरेंस लागत बढ़ सकती है, भारत का ऊर्जा आयात बिल बढ़ सकता है हालांकि फिलहाल भारत ने स्थिति को संभालने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति अपनाई हुई है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी परीक्षा
मिडल ईस्ट संकट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता से सीधे जुड़ी हुई है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए केवल सस्ता तेल खरीदना ही काफी नहीं, बल्कि सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।
ऐसे समय में दो बड़े LPG टैंकरों का सुरक्षित भारत पहुंचना केवल राहत की खबर नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि भारत अब वैश्विक ऊर्जा संकटों से निपटने के लिए पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तैयार दिख रहा है।
Also Read:


