भारत अब सिर्फ मोबाइल असेंबलिंग तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि दुनिया की बड़ी चिप मैन्युफैक्चरिंग ताकत बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में एक बड़ा कदम तब सामने आया जब Tata Electronics और ASML ने भारत की पहली कमर्शियल सेमीकंडक्टर फैब (Fab) को स्थापित करने के लिए रणनीतिक साझेदारी का ऐलान किया। यह समझौता प्रधानमंत्री Narendra Modi की नीदरलैंड यात्रा के दौरान हुआ, जिसे भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
यह साझेदारी गुजरात के ढोलेरा में बनने वाली 300 mm (12-inch) वेफर फैब्रिकेशन यूनिट को सपोर्ट करेगी। इस प्रोजेक्ट में लगभग 91,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। यह सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि भारत की टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता की दिशा में सबसे अहम परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।
आखिर सेमीकंडक्टर फैब इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
आज दुनिया का लगभग हर आधुनिक उपकरण चिप्स पर निर्भर है। चाहे स्मार्टफोन हो, इलेक्ट्रिक वाहन, AI सर्वर, डिफेंस सिस्टम, मेडिकल उपकरण या डेटा सेंटर — सभी में सेमीकंडक्टर चिप्स की जरूरत होती है। लेकिन अभी तक भारत चिप निर्माण के मामले में विदेशी कंपनियों और देशों पर निर्भर रहा है।
कोविड महामारी और बाद में वैश्विक सप्लाई चेन संकट के दौरान दुनिया ने देखा कि चिप्स की कमी से ऑटोमोबाइल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री तक बुरी तरह प्रभावित हो गई थी। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। यही कारण है कि केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण पर विशेष जोर दे रही है।
ढोलेरा में बनने वाली यह फैब भारत की पहली कमर्शियल 300 mm सेमीकंडक्टर वेफर फैक्ट्री होगी, जो देश को ग्लोबल चिप सप्लाई चेन में जगह दिलाने का प्रयास करेगी।
ASML क्यों है इतनी खास कंपनी?
दुनिया में अगर कोई कंपनी अत्याधुनिक चिप निर्माण मशीनों की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है, तो वह ASML है। नीदरलैंड स्थित यह कंपनी लिथोग्राफी सिस्टम बनाती है, जिनकी मदद से बेहद छोटे और एडवांस सेमीकंडकर्स तैयार किए जाते हैं।
ASML की मशीनों के बिना आधुनिक AI चिप्स और हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर बनाना लगभग असंभव माना जाता है। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी कंपनियां जैसे TSMC, Samsung और Intel भी ASML की तकनीक पर निर्भर हैं।
अब यही कंपनी भारत की पहली कमर्शियल फैब के लिए अपनी उन्नत लिथोग्राफी तकनीक उपलब्ध कराएगी। इससे यह उम्मीद बढ़ गई है कि भारत सिर्फ लो-एंड चिप्स ही नहीं बल्कि भविष्य में एडवांस्ड चिप टेक्नोलॉजी की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है।
ढोलेरा फैब में क्या बनेगा?
इस फैक्ट्री में ऑटोमोबाइल, मोबाइल डिवाइस, AI, इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य हाई-ग्रोथ सेक्टर्स के लिए चिप्स बनाए जाएंगे। भारत में EV सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और हर इलेक्ट्रिक वाहन में बड़ी मात्रा में सेमीकंडक्टर का उपयोग होता है।
इसके अलावा AI और डेटा सेंटर इंडस्ट्री की तेजी से बढ़ती मांग को देखते हुए भविष्य में इस फैब की रणनीतिक अहमियत और बढ़ सकती है। भारत अभी AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा रहा है और ऐसे में घरेलू चिप निर्माण देश की टेक क्षमता को नई दिशा दे सकता है।
भारत की चीन निर्भरता कम करने की कोशिश
यह प्रोजेक्ट सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में वैश्विक चिप सप्लाई चेन काफी हद तक ताइवान, चीन और दक्षिण कोरिया पर केंद्रित है। अमेरिका और यूरोप भी अब सप्लाई चेन को diversify करने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत इसी मौके का फायदा उठाकर खुद को एक वैकल्पिक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ढोलेरा प्रोजेक्ट सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में कई और वैश्विक कंपनियां भारत में निवेश कर सकती हैं।
लोकल टैलेंट और रिसर्च पर भी होगा फोकस
इस साझेदारी का एक बड़ा हिस्सा लोकल स्किल डेवलपमेंट से जुड़ा है। बयान के अनुसार Tata Electronics और ASML मिलकर भारत में lithography-intensive skills विकसित करेंगे। इसका मतलब है कि भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को हाई-एंड चिप निर्माण तकनीक में ट्रेनिंग दी जाएगी।
इसके अलावा रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर भी जोर रहेगा। इससे भारत में हाई-टेक रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
PSMC के साथ भी Tata की बड़ी साझेदारी
Tata Electronics पहले ही ताइवान की Powerchip Semiconductor Manufacturing Corporation (PSMC) के साथ भी समझौता कर चुकी है। इस साझेदारी के जरिए Tata को 28nm, 40nm, 55nm, 90nm और 110nm जैसे प्रोसेस नोड्स की तकनीक तक पहुंच मिलेगी।
ये प्रोसेस नोड्स ऑटोमोबाइल, इंडस्ट्रियल सिस्टम, नेटवर्किंग और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में इस्तेमाल होने वाली चिप्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे होगा फायदा?
यदि यह प्रोजेक्ट समय पर सफलतापूर्वक शुरू हो जाता है तो इसका असर कई स्तरों पर दिखाई दे सकता है:
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी
- हाई-टेक रोजगार बढ़ेंगे
- आयात पर निर्भरता कम होगी
- विदेशी निवेश आकर्षित होगा
- AI और EV सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा
- भारत की रणनीतिक टेक्नोलॉजी क्षमता मजबूत होगी
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में सेमीकंडक्टर उद्योग तेल की तरह ही रणनीतिक महत्व हासिल कर सकता है। ऐसे में भारत की यह पहल लंबी अवधि में बेहद निर्णायक साबित हो सकती है।
क्या भारत ग्लोबल चिप हब बन पाएगा?
यह सवाल अभी पूरी तरह भविष्य पर निर्भर है, लेकिन Tata-ASML जैसी साझेदारियां यह संकेत जरूर देती हैं कि भारत अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है। हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं। चिप निर्माण में भारी पूंजी, अत्याधुनिक तकनीक, स्थिर बिजली-पानी सप्लाई और कुशल मानव संसाधन की जरूरत होती है।
फिर भी अगर सरकार की नीतियां स्थिर रहती हैं और निजी कंपनियों का निवेश जारी रहता है, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अहम खिलाड़ी बन सकता है।
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