भारत सरकार ने कीमती धातुओं के आयात पर निगरानी और नियंत्रण को और कड़ा कर दिया है। अब चांदी की सिल्लियों (Silver Bullion) के आयात को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से चांदी के आयात की स्थिति को “मुक्त” (Free) से बदलकर “प्रतिबंधित” (Restricted) कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अब चांदी का आयात पहले की तुलना में अधिक निगरानी और मंजूरी प्रक्रिया के तहत होगा।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, डॉलर मजबूत हो रहा है और भारत के चालू खाते (Current Account) तथा विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार का उद्देश्य गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करना और सोना-चांदी के आयात के जरिए विदेशी मुद्रा के बड़े बहिर्गमन को रोकना माना जा रहा है।
नई दिल्ली में जारी सरकारी अधिसूचना और विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के निर्देशों के अनुसार सरकार ने केवल चांदी ही नहीं, बल्कि सोने के आयात नियमों को भी काफी सख्त कर दिया है। इससे जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर, बुलियन ट्रेडर्स और निवेशकों पर सीधा असर पड़ सकता है।
आखिर सरकार ने चांदी के आयात पर सख्ती क्यों बढ़ाई?
The Government of India has tightened the policy regarding the import of silver bars, changing their status from 'Free' to 'Restricted' with immediate effect. pic.twitter.com/k4Zyq4W2rO
— ANI (@ANI) May 16, 2026 भारत दुनिया में सोने और चांदी का सबसे बड़ा उपभोक्ता देशों में से एक है। देश में हर साल भारी मात्रा में सोना और चांदी आयात किया जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर सोना-चांदी की ओर भागते हैं। इससे आयात बिल बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये पर दबाव ने सरकार की चिंता बढ़ाई है। भारत पहले से ही ऊर्जा आयात पर भारी खर्च करता है। ऐसे में यदि सोना-चांदी का आयात भी तेजी से बढ़ता है तो इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
सरकार इसी दबाव को कम करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। हाल ही में सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया गया था। इसके अलावा 3 फीसदी IGST पहले से लागू है। अब चांदी के आयात को “Restricted Category” में डालना उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
“मुक्त” से “प्रतिबंधित” होने का क्या मतलब है?
अब तक चांदी की सिल्लियों का आयात “Free Category” में था। यानी निर्धारित नियमों के तहत कंपनियां आसानी से आयात कर सकती थीं। लेकिन अब इसे “Restricted” श्रेणी में डालने का मतलब है कि आयात के लिए अतिरिक्त मंजूरी, दस्तावेज और निगरानी की जरूरत होगी।
इससे सरकार को यह ट्रैक करने में आसानी होगी कि कौन, कितनी और किस उद्देश्य से चांदी आयात कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम अवैध ट्रेडिंग, ओवर-इनवॉइसिंग और speculative imports को रोकने में भी मदद कर सकता है।
सोने के आयात पर भी सरकार की बड़ी सख्ती
सरकार ने केवल चांदी ही नहीं, बल्कि सोने के आयात नियमों को भी कड़ा किया है। DGFT की अधिसूचना के मुताबिक अब “Advance Authorization” (AA) स्कीम के तहत सोने के आयात की अधिकतम सीमा 100 किलो तय कर दी गई है।
इस स्कीम के तहत निर्यातक कंपनियों को ड्यूटी-फ्री सोना आयात करने की अनुमति मिलती है, बशर्ते वे उससे बने उत्पादों का निर्यात करें। लेकिन अब इस प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
पहली बार आवेदन करने वालों के लिए नए नियम
यदि कोई कंपनी पहली बार Advance Authorization के लिए आवेदन करती है तो उसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का फिजिकल इंस्पेक्शन अनिवार्य होगा। संबंधित क्षेत्रीय प्राधिकरण यह जांच करेगा कि:
- यूनिट वास्तव में मौजूद है या नहीं
- उत्पादन क्षमता कितनी है
- संचालन वास्तविक है या सिर्फ कागजी
सरकार का उद्देश्य फर्जी कंपनियों और गलत तरीके से आयात करने वाले नेटवर्क पर रोक लगाना है।
अब निर्यात प्रदर्शन से जुड़ेगा सोने का आयात
सरकार ने भविष्य में सोने के आयात की मंजूरी को निर्यात प्रदर्शन से जोड़ दिया है। नई व्यवस्था के अनुसार यदि किसी कंपनी ने पहले मिले Advance Authorization के तहत तय निर्यात दायित्व का कम से कम 50 फीसदी पूरा नहीं किया है तो उसे अगली मंजूरी नहीं मिलेगी।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ड्यूटी-फ्री आयात का इस्तेमाल केवल वास्तविक निर्यात गतिविधियों के लिए हो, न कि घरेलू बाजार में लाभ कमाने के लिए।
हर 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
निगरानी को और मजबूत करने के लिए सरकार ने अब आयातकों पर रिपोर्टिंग का दबाव भी बढ़ा दिया है। Advance Authorization स्कीम के तहत आयात करने वाली कंपनियों को अब हर पखवाड़े यानी 15 दिन में एक बार प्रदर्शन रिपोर्ट जमा करनी होगी।
यह रिपोर्ट किसी स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा प्रमाणित होना जरूरी होगा। इसमें निम्न जानकारियां देनी होंगी:
- कितना आयात हुआ
- कितना निर्यात हुआ
- स्टॉक की स्थिति
- उत्पादन और उपयोग का विवरण
इससे सरकार को रियल टाइम मॉनिटरिंग में मदद मिलेगी।
भारत का सोना आयात रिकॉर्ड स्तर पर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोने का आयात 24 फीसदी से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि दिलचस्प बात यह रही कि वॉल्यूम यानी वास्तविक मात्रा में गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 721.03 टन रह गई।
इसका मतलब यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं और भारत को समान मात्रा के लिए अधिक विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार के इन फैसलों का असर सीधे तौर पर सर्राफा बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
1. चांदी महंगी हो सकती है
आयात प्रक्रिया सख्त होने और शुल्क बढ़ने से घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
2. ज्वेलरी सेक्टर की लागत बढ़ेगी
रत्न और आभूषण उद्योग को अतिरिक्त अनुपालन और रिपोर्टिंग का खर्च उठाना पड़ेगा।
3. निवेशकों की रणनीति बदल सकती है
यदि कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव आता है तो निवेशक गोल्ड ETF, डिजिटल गोल्ड और अन्य विकल्पों की ओर जा सकते हैं।
4. छोटे कारोबारियों पर दबाव
छोटे बुलियन ट्रेडर्स और ज्वेलर्स के लिए नई compliance requirements चुनौती बन सकती हैं।
क्या सरकार को मिलेगा फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि सरकार गैर-जरूरी आयात पर नियंत्रण करने में सफल रहती है तो इससे:
- चालू खाते का घाटा कम हो सकता है
- विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घट सकता है
- रुपये को स्थिरता मिल सकती है
- अवैध आयात और ट्रेडिंग पर रोक लग सकती है
हालांकि उद्योग जगत का एक वर्ग यह भी मानता है कि अत्यधिक नियंत्रण से स्मगलिंग और अनौपचारिक कारोबार बढ़ने का खतरा भी रहता है।
आगे क्या?
सरकार के हालिया फैसले साफ संकेत देते हैं कि आने वाले महीनों में कीमती धातुओं के आयात पर निगरानी और सख्ती और बढ़ सकती है। यदि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और भू-राजनीतिक तनाव जारी रहता है तो सरकार और कदम उठा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सरकार का फोकस विदेशी मुद्रा बचाने, आयात बिल नियंत्रित करने और बाहरी आर्थिक संतुलन को स्थिर रखने पर है। ऐसे में सोना-चांदी जैसे गैर-जरूरी आयात सरकार की प्राथमिक निगरानी सूची में बने रहेंगे।
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