पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी के बाद आम आदमी को एक और बड़ा झटका लग सकता है। वित्तीय सेवा कंपनी Emkay Global की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले 2 से 3 हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10-10 रुपये प्रति लीटर तक का और इजाफा देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर बढ़ते घाटे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार महंगे हो रहे कच्चे तेल की वजह से यह बढ़ोतरी जरूरी हो सकती है।
शुक्रवार को सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है और कंपनियों को अभी भी प्रति लीटर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में चरणबद्ध तरीके से कीमतें और बढ़ सकती हैं।
क्यों बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई संकट और उत्पादन संबंधी चिंताओं की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, लेकिन अब यह लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। इससे भारतीय तेल कंपनियों की लागत तेजी से बढ़ी है।
Emkay Global की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा कीमतों पर सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल के हर लीटर पर करीब 17 से 18 रुपये तक का नुकसान हो रहा है। यही वजह है कि कंपनियों पर कीमतें बढ़ाने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
57,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है नुकसान
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि तेल कंपनियां कीमतों में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं करती हैं, तो चालू तिमाही में उन्हें 57,000 करोड़ रुपये से 58,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। यह घाटा उस स्थिति में है जब सरकार मार्च में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये की कटौती कर चुकी थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक कंपनियां इस तरह घाटे में ईंधन नहीं बेच सकतीं। यही कारण है कि अगले कुछ हफ्तों में चरणबद्ध तरीके से कीमतों में और बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है।
दो तरीके से बढ़ सकते हैं दाम
Emkay Global ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि तेल कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी दो तरीके से कर सकती हैं—
- एक बार में 10 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी
- या फिर 2 से 3 हफ्तों में धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाना
सरकार और तेल कंपनियां फिलहाल महंगाई और राजनीतिक असर को देखते हुए संतुलित फैसला लेने की कोशिश कर सकती हैं।
महंगाई पर पड़ेगा सीधा असर
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। भारत में ट्रांसपोर्टेशन का बड़ा हिस्सा डीजल पर निर्भर है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है, जिसका असर खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक पर पड़ता है।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि ईंधन, गैस और दूध की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी की वजह से खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) आने वाले महीनों में 0.42 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
दूध के दाम भी बढ़े
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफे से पहले ही देश की बड़ी डेयरी कंपनियां Amul और Mother Dairy दूध के दाम बढ़ा चुकी हैं। दोनों कंपनियों ने हाल ही में दूध की कीमतों में 2-2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने की वजह से आने वाले समय में स्थानीय डेयरी कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं। इसका असर सीधे आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ेगा।
किन चीजों पर पड़ सकता है असर?
अगर पेट्रोल और डीजल के दाम में 10 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी होती है, तो कई सेक्टर्स में महंगाई बढ़ सकती है—
- सब्जियां और फल
- दूध और डेयरी उत्पाद
- FMCG सामान
- ऑनलाइन डिलीवरी
- बस और कैब किराया
- ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स
- एयर टिकट
- सीमेंट और निर्माण सामग्री
ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि डीजल और महंगा होता है, तो फ्रेट रेट भी बढ़ाए जा सकते हैं।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
सरकार के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ तेल कंपनियों का बढ़ता घाटा है, तो दूसरी तरफ महंगाई को नियंत्रण में रखना भी जरूरी है। यदि कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो इसका असर उपभोक्ता खर्च और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार कुछ टैक्स राहत या तेल कंपनियों को वित्तीय सहायता देने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगर लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
आम आदमी पर बढ़ेगा दबाव
पेट्रोल-डीजल, LPG, दूध और रोजमर्रा की चीजों के महंगा होने से आम आदमी का घरेलू बजट लगातार बिगड़ रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है।
यदि आने वाले हफ्तों में तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है, तो देश में महंगाई का दबाव और तेज हो सकता है।
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