भारतीय शेयर बाजार में पिछले कई महीनों से विदेशी निवेशकों (FII/FPI) की लगातार बिकवाली चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है। सितंबर 2024 के बाद से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से भारी रकम निकाली है, जिसका असर सेंसेक्स, निफ्टी, रुपये और बड़े ब्लूचिप शेयरों पर साफ दिखाई दे रहा है।
मार्च 2026 तिमाही के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने बैंकिंग, आईटी, टेलीकॉम, ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी घटाई है। इसमें Reliance Industries, HDFC Bank, Tata Consultancy Services और Infosys जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, डॉलर इंडेक्स की मजबूती, पश्चिम एशिया संकट, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भारतीय बाजार की महंगी वैल्यूएशन विदेशी निवेशकों को मुनाफावसूली के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसका असर भारतीय बाजार की स्थिरता पर भी दिखाई देने लगा है।
भारत से 53 अरब डॉलर निकाल चुके विदेशी निवेशक
मार्केट डेटा के मुताबिक 2024 के आखिर से अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब 53 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। लगातार बिकवाली के कारण:
- रुपये पर दबाव बढ़ा है
- MSCI India Index में कमजोरी आई है
- बैंकिंग और आईटी शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है
- मिडकैप और लार्जकैप दोनों सेगमेंट प्रभावित हुए हैं
सितंबर 2024 से मार्च 2026 के बीच MSCI इंडिया इंडेक्स करीब 8 फीसदी तक गिर चुका है।
सबसे ज्यादा बिकवाली किन शेयरों में हुई?
मार्च 2026 तिमाही में विदेशी निवेशकों ने जिन 10 कंपनियों में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी घटाई, उनमें बैंकिंग और आईटी सेक्टर का दबदबा रहा।
FII Selling Top 10 Stocks List
| कंपनी | बेचे गए शेयर | वैल्यू (करोड़ रुपये) | शेयर में गिरावट |
|---|---|---|---|
| HDFC Bank | 47.95 करोड़ | 41,449 करोड़ | 26.20% |
| Kotak Mahindra Bank | 29.41 करोड़ | 11,729 करोड़ | 19.72% |
| Bharti Airtel | — | 11,287 करोड़ | 15.35% |
| ICICI Bank | 8.18 करोड़ | 10,973 करोड़ | 10.20% |
| Eternal (Zomato Parent) | 35.09 करोड़ | 9,147 करोड़ | 17.65% |
| Infosys | 5.76 करोड़ | 8,112 करोड़ | 22.58% |
| Reliance Industries | 5.54 करोड़ | 7,815 करोड़ | 14.42% |
| Maruti Suzuki | 0.52 करोड़ | 7,409 करोड़ | 26.30% |
| TCS | 2.58 करोड़ | 7,162 crore | 26.43% |
| Larsen & Toubro | 1.74 करोड़ | 6,631 करोड़ | 14.19% |
HDFC Bank में सबसे बड़ी बिकवाली
देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा बिकवाली की। दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच करीब 47.95 करोड़ शेयर बेचे गए जिनकी कुल वैल्यू 41,449 करोड़ रुपये रही।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- बैंकिंग सेक्टर में वैल्यूएशन काफी ऊंचे थे
- ग्लोबल फंड्स सुरक्षित बाजारों की ओर शिफ्ट हुए
- ब्याज दरों और डॉलर मजबूती का असर उभरते बाजारों पर पड़ा
इस दौरान बैंक का शेयर करीब 26% तक टूट गया।
रिलायंस और आईटी शेयर भी दबाव में
भारत की सबसे वैल्यूएबल कंपनी Reliance Industries भी विदेशी बिकवाली से नहीं बच सकी। मार्च तिमाही में एफआईआई ने कंपनी के 5.54 करोड़ शेयर बेच दिए।
वहीं आईटी सेक्टर में Infosys, Tata Consultancy Services जैसी कंपनियों में भी भारी मुनाफावसूली हुई।
आईटी कंपनियों पर दबाव की बड़ी वजह अमेरिकी मंदी की आशंका, टेक खर्च में कमी, डॉलर आधारित आय पर दबाव, विदेशी क्लाइंट्स की कमजोर डिमांड बताई जा रही है।
क्यों हो रही है विदेशी निवेशकों की बिकवाली?
मार्केट एक्सपर्ट्स कई बड़े कारण बता रहे हैं:
1. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी
अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने से विदेशी निवेशकों को वहां सुरक्षित रिटर्न मिल रहा है।
2. डॉलर इंडेक्स मजबूत
डॉलर मजबूत होने पर उभरते बाजारों से पैसा निकलना शुरू हो जाता है।
3. भारत में ऊंची वैल्यूएशन
भारतीय शेयर बाजार लंबे समय तक रिकॉर्ड हाई पर रहा, जिससे विदेशी निवेशकों ने प्रॉफिट बुकिंग शुरू की।
4. पश्चिम एशिया संकट
ईरान-इजरायल तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई।
5. रुपये में कमजोरी
रुपये की गिरावट से विदेशी निवेशकों का वास्तविक रिटर्न घट जाता है।
क्या भारतीय बाजार में और गिरावट आ सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चा तेल महंगा बना रहा, डॉलर मजबूत रहा, अमेरिकी फेड ब्याज दरें कम नहीं करता तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली कुछ समय तक जारी रह सकती है।
हालांकि घरेलू निवेशकों (DII) की मजबूत खरीदारी भारतीय बाजार को बड़ा सहारा दे रही है। SIP निवेश और रिटेल भागीदारी बढ़ने से बाजार में स्थिरता बनी हुई है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार इस समय घबराकर बिकवाली करने के बजाय:
- मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर फोकस रखें
- लंबी अवधि की रणनीति अपनाएं
- एकमुश्त निवेश की बजाय SIP करें
- बैंकिंग और आईटी में धीरे-धीरे खरीदारी करें
क्योंकि बड़ी गिरावट के बाद मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि का अवसर भी बन सकता है।
निष्कर्ष
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने भारतीय बाजार पर दबाव जरूर बढ़ाया है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था अब भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
हालांकि आने वाले महीनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिकी ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की चाल और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगी। फिलहाल रिलायंस, HDFC Bank, TCS, Infosys और ICICI Bank जैसे बड़े शेयरों में FII बिकवाली ने निवेशकों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।
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