भारत में पेट्रोल की कीमतें 16 मई 2026 को भी अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर-रुपया विनिमय दर और राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स के आधार पर अलग-अलग बनी हुई हैं। देश के कई शहरों में आज पेट्रोल के दाम स्थिर रहे, जबकि कुछ शहरों में हल्की बढ़ोतरी और गिरावट देखने को मिली है। सबसे ज्यादा कीमत अभी भी दक्षिण और पूर्वी भारत के कुछ शहरों में बनी हुई है, जबकि दिल्ली, चंडीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में पेट्रोल अपेक्षाकृत सस्ता बना हुआ है।
राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल ₹97.77 प्रति लीटर पर स्थिर रहा। वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत ₹106.68 प्रति लीटर दर्ज की गई। कोलकाता में मामूली बढ़त के साथ रेट ₹108.74 प्रति लीटर तक पहुंच गया। दक्षिण भारत के बड़े शहर हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल अभी भी ₹110 प्रति लीटर के ऊपर बना हुआ है।
देश के प्रमुख शहरों में आज का पेट्रोल रेट
| शहर | पेट्रोल कीमत (प्रति लीटर) | बदलाव |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹97.77 | कोई बदलाव नहीं |
| कोलकाता | ₹108.74 | +₹0.04 |
| मुंबई | ₹106.68 | कोई बदलाव नहीं |
| चेन्नई | ₹103.67 | कोई बदलाव नहीं |
| गुरुग्राम | ₹98.42 | -₹0.05 |
| नोएडा | ₹97.97 | +₹0.19 |
| बेंगलुरु | ₹106.17 | -₹0.04 |
| भुवनेश्वर | ₹104.16 | -₹0.03 |
| चंडीगढ़ | ₹97.27 | कोई बदलाव नहीं |
| हैदराबाद | ₹110.85 | -₹0.04 |
| जयपुर | ₹107.75 | -₹0.22 |
| लखनऊ | ₹97.39 | -₹0.16 |
| पटना | ₹109.06 | +₹0.51 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹110.68 | +₹0.10 |
Source: Good Returns
क्यों अलग-अलग हैं पेट्रोल के दाम?
भारत में पेट्रोल की बेस कीमत लगभग समान रहती है, लेकिन हर राज्य अपना अलग VAT (Value Added Tax) और सेस लगाता है। यही वजह है कि दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहरों में कीमतें कम दिखाई देती हैं, जबकि महाराष्ट्र, बिहार, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में पेट्रोल महंगा मिलता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी पेट्रोल की लागत बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में बदलाव का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है।
पिछले 10 दिनों में कैसा रहा ट्रेंड?
मुंबई में पिछले 10 दिनों के दौरान पेट्रोल की कीमत ₹103.54 से लेकर ₹106.68 प्रति लीटर के बीच रही है। इससे साफ है कि बाजार में लगातार हल्का उतार-चढ़ाव बना हुआ है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल बड़े बदलाव से बच रही हैं और कीमतों में मामूली संशोधन ही देखने को मिल रहा है।
किन कारणों से बढ़ सकती हैं कीमतें?
आने वाले समय में पेट्रोल की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करेंगी। इनमें शामिल हैं:
- कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें
- डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति
- मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव
- केंद्र और राज्य सरकारों का टैक्स स्ट्रक्चर
- अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन की स्थिति
अगर ब्रेंट क्रूड लगातार ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों महंगे हो सकते हैं।
आम लोगों पर क्या असर पड़ता है?
पेट्रोल की कीमत बढ़ने का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से फल, सब्जियां, दूध, FMCG सामान और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं तक की लागत बढ़ जाती है। इसका सीधा असर आम आदमी के मासिक बजट पर पड़ता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर पेट्रोल लंबे समय तक ₹100 प्रति लीटर से ऊपर बना रहता है, तो महंगाई दर पर भी दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि सरकारें पेट्रोल कीमतों को लेकर लगातार समीक्षा करती रहती हैं।
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