महाराष्ट्र के किसानों को राहत, सरकार ने खोला खरीद का रास्ता
देश में प्याज की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। महाराष्ट्र के कई किसान मंडियों में अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर थे। हाल ही में एक किसान की बिक्री रसीद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसमें 25 बोरी प्याज बेचने के बाद भी उसके हाथ लगभग कुछ नहीं बचा। मंडी शुल्क, ढुलाई और तुलाई के खर्च काटने के बाद किसान को केवल 1262 रुपये मिले और आखिर में उससे उल्टा 1 रुपया अतिरिक्त देने की बात कही गई। इस घटना ने पूरे देश में किसानों की हालत को लेकर बहस छेड़ दी।
अब केंद्र सरकार ने इस मामले में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने महाराष्ट्र के सतारा में घोषणा की कि नेफेड (NAFED) किसानों से 12.35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज खरीदेगी। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को तत्काल राहत मिलेगी और बाजार में गिरते दामों से बचाव होगा।
आखिर क्यों टूट गई प्याज की कीमत?
महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्यों में शामिल है। इस साल अच्छी बारिश और बेहतर उत्पादन के कारण बाजार में प्याज की सप्लाई काफी बढ़ गई। लेकिन मांग उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाई। इसका सीधा असर किसानों को मिलने वाले भाव पर पड़ा।
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार कई कारणों ने मिलकर कीमतों को नीचे धकेला:
- उत्पादन सामान्य से ज्यादा रहा
- निर्यात की गति कमजोर रही
- कई राज्यों में स्टॉक पहले से मौजूद था
- कोल्ड स्टोरेज क्षमता सीमित रही
- सरकारी खरीद समय पर शुरू नहीं हुई
इन परिस्थितियों में मंडियों में प्याज की भरमार हो गई और व्यापारियों ने बेहद कम दाम लगाना शुरू कर दिया। किसानों के पास फसल रोकने की सुविधा नहीं होने के कारण वे मजबूरी में नुकसान पर बिक्री करने लगे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई किसान की रसीद
मेरे प्याज उत्पादक किसान बहनों और भाइयों,
प्याज के दामों के बारे में माननीय मुख्यमंत्री श्री @Dev_Fadnavis जी ने इस विषय पर मुझे फोन पर अवगत कराया था।
आज से ही NAFED द्वारा ₹12.35 प्रति किलो की दर से प्याज की खरीद शुरू की जाएगी। हम प्याज खरीदेंगे और किसानों को पूरा सहयोग… pic.twitter.com/DB3jXfizUk
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) May 15, 2026 पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र के एक किसान की प्याज बिक्री रसीद इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुई। रसीद में दिखा कि किसान ने बड़ी मात्रा में प्याज मंडी में बेची, लेकिन सभी खर्च काटने के बाद उसे बेहद मामूली रकम मिली।
इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोला और किसानों की आय को लेकर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछा कि जब शहरों में प्याज 25 से 30 रुपये किलो बिक रही है, तो किसानों को 1 से 2 रुपये किलो का भाव क्यों मिल रहा है।
यही सवाल देश की कृषि व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी को उजागर करता है — खेत और बाजार के बीच मौजूद लंबी सप्लाई चेन।
किसान को कम, ग्राहक को महंगा प्याज क्यों?
यह भारतीय कृषि बाजार की पुरानी समस्या है। किसान से प्याज बेहद कम दाम पर खरीदी जाती है, लेकिन शहरों तक पहुंचते-पहुंचते इसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है।
इसके पीछे कई वजहें हैं:
1. बिचौलियों की लंबी श्रृंखला
किसान से माल खरीदने के बाद कई स्तरों पर व्यापारी, कमीशन एजेंट और थोक विक्रेता जुड़ जाते हैं।
2. कोल्ड स्टोरेज की कमी
प्याज लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक भंडारण जरूरी होता है। छोटे किसानों के पास यह सुविधा नहीं होती।
3. मजबूरी में तुरंत बिक्री
कर्ज और नकदी की जरूरत के कारण किसान फसल रोक नहीं पाते।
4. सरकारी खरीद सीमित
सरकारी एजेंसियां हर किसान तक नहीं पहुंच पातीं। खरीद केंद्रों की संख्या भी सीमित रहती है।
इसी वजह से उपभोक्ता 30 रुपये किलो प्याज खरीदता है, जबकि किसान को उसका बहुत छोटा हिस्सा मिलता है।
NAFED की खरीद से क्या बदलेगा?
National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India की खरीद शुरू होने से बाजार में न्यूनतम समर्थन जैसा माहौल बनेगा। जब सरकार तय कीमत पर खरीद शुरू करती है, तो निजी व्यापारी भी दाम बहुत नीचे नहीं गिरा पाते।
12.35 रुपये प्रति किलो का भाव किसानों की पूरी लागत की भरपाई तो नहीं करता, लेकिन 1-2 रुपये किलो के मुकाबले यह बड़ी राहत मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे:
- किसानों को तुरंत नकद सहायता मिलेगी
- बाजार में दाम स्थिर हो सकते हैं
- मंडियों में घबराहट वाली बिक्री कम होगी
- व्यापारियों की मनमानी पर कुछ रोक लगेगी
अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि खरीद प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि असली किसानों तक फायदा पहुंचे और खरीद में किसी तरह की गड़बड़ी न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर उत्पादन अधिक होने या निर्यात घटने से बाजार भाव टूटते हैं, तो केंद्र सरकार किसानों को अकेला नहीं छोड़ेगी।
मंत्री ने कहा:
“किसान भारतीय अर्थव्यवस्था की आत्मा हैं। हमारी सरकार के लिए किसानों और ग्रामीण गरीबों का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
गन्ना और कपास किसानों को भी दिया भरोसा
सतारा दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने केवल प्याज ही नहीं, बल्कि गन्ना और कपास किसानों के मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और केंद्र मिलकर गन्ना किसानों की समस्याओं का समाधान निकालेंगे।
इसके अलावा उन्होंने “कॉटन मिशन” का भी जिक्र किया। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में कपास उत्पादकों को नई सुविधाएं और सहायता दी जाएगी।
इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब देश के कई हिस्सों में कृषि लागत बढ़ रही है और किसानों की आय दबाव में है।
क्या केवल सरकारी खरीद से समस्या हल हो जाएगी?
कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल अस्थायी सरकारी खरीद लंबे समय का समाधान नहीं है। प्याज किसानों की समस्या हर कुछ वर्षों में दोहराई जाती है।
स्थायी समाधान के लिए जरूरी कदम:
- ग्रामीण कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क
- बेहतर निर्यात नीति
- किसान उत्पादक संगठन (FPO) मजबूत करना
- प्रोसेसिंग उद्योग बढ़ाना
- डिजिटल मंडी नेटवर्क
- सीधे रिटेल चेन से किसानों को जोड़ना
अगर ये सुधार नहीं हुए, तो हर सीजन में किसानों को इसी तरह कीमतों के संकट का सामना करना पड़ सकता है।
महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बना प्याज
महाराष्ट्र में प्याज केवल कृषि फसल नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी है। नासिक, सतारा, अहमदनगर और आसपास के क्षेत्रों में लाखों किसान प्याज उत्पादन पर निर्भर हैं। जब भी कीमतें गिरती हैं, सरकार पर दबाव बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में प्याज खरीद और किसानों को राहत देने के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिका पर लगातार नजर बनी रहेगी।
क्या खुदरा कीमतों में भी असर दिखेगा?
फिलहाल शहरों में प्याज की खुदरा कीमत लगभग 25 से 30 रुपये प्रति किलो बनी हुई है। सरकारी खरीद शुरू होने के बाद थोक बाजार में कुछ स्थिरता आ सकती है, लेकिन तुरंत उपभोक्ता कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है।
हालांकि अगर सरकार बड़े पैमाने पर खरीद जारी रखती है और स्टॉक प्रबंधन बेहतर होता है, तो आने वाले हफ्तों में बाजार संतुलित हो सकता है।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र में प्याज किसानों की बदहाल स्थिति ने एक बार फिर भारतीय कृषि बाजार की कमजोरियों को उजागर किया है। किसान खेत में मेहनत करता है, लेकिन असली कमाई सप्लाई चेन के दूसरे हिस्सों में चली जाती है। ऐसे में NAFED द्वारा 12.35 रुपये प्रति किलो की खरीद किसानों के लिए तत्काल राहत जरूर है, लेकिन दीर्घकालिक सुधार के बिना यह संकट बार-बार लौट सकता है।
अगर सरकार भंडारण, निर्यात और सीधे बाजार पहुंच जैसे ढांचागत सुधारों पर काम करती है, तभी किसानों को उनकी फसल का वास्तविक लाभ मिल पाएगा।
Also Read:


