NSE Skill Development Centre: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंजों में शामिल National Stock Exchange अब युवाओं को फाइनेंशियल मार्केट्स और निवेश की दुनिया से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले स्थित Vignan’s Foundation for Science Technology and Research में जल्द ही एक स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किया जाएगा, जहां छात्रों को ट्रेडिंग, इक्विटी रिसर्च, निवेश और वित्तीय बाजारों से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
यह घोषणा NSE के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी Ashish Kumar Chauhan ने गुरुवार को आयोजित “स्टूडेंट स्किलिंग एंड इन्वेस्टर अवेयरनेस प्रोग्राम” के दौरान की। इस कार्यक्रम का आयोजन विग्नान यूनिवर्सिटी, NSE और Securities and Exchange Board of India के संयुक्त सहयोग से किया गया था।
छात्रों को मिलेगा मार्केट का प्रैक्टिकल ज्ञान
अशिष कुमार चौहान ने कहा कि NSE मुंबई से आने वाले विशेषज्ञ छात्रों को शेयर बाजार और निवेश से जुड़ी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देंगे। इसमें केवल थ्योरी नहीं बल्कि रियल मार्केट बिहेवियर, ट्रेडिंग सिस्टम, रिस्क मैनेजमेंट, इक्विटी रिसर्च और निवेश रणनीतियों की जानकारी भी शामिल होगी।
उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल डिग्री काफी नहीं है। फाइनेंशियल मार्केट्स, डेटा एनालिटिक्स और निवेश की समझ रखने वाले युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यह स्किल सेंटर छात्रों को रोजगार और उद्यमिता दोनों के अवसर प्रदान कर सकता है।
भारत में पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों की संख्या में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। चौहान के अनुसार, 1994 में जहां देश में केवल 10 से 15 लाख निवेशक थे, वहीं अब यह संख्या करीब 13 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ती वित्तीय जागरूकता और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म्स के विस्तार को दर्शाता है।
भारत बना दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शेयर बाजार

कार्यक्रम के दौरान NSE प्रमुख ने भारतीय शेयर बाजार की तेज प्रगति पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि 1994 में भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 3.8 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर करीब 470 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में अमेरिका, चीन और जापान के बाद दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शेयर बाजार बन चुका है। यह उपलब्धि केवल बड़ी कंपनियों की वजह से नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ रहे रिटेल निवेशकों और स्टार्टअप इकोसिस्टम की वजह से भी संभव हुई है।
चौहान ने कहा कि छोटे उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए भी पूंजी जुटाने के नए रास्ते खुले हैं। उन्होंने “NSE Emerge” प्लेटफॉर्म का उदाहरण देते हुए बताया कि इसके जरिए छोटी कंपनियां इक्विटी भागीदारी के माध्यम से निवेश हासिल कर सकती हैं। इससे युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और नई कंपनियों को विस्तार का मौका मिलेगा।
1991 आर्थिक सुधार और हर्षद मेहता घोटाले का भी किया जिक्र
अपने संबोधन में उन्होंने भारत के आर्थिक सुधारों और शेयर बाजार के विकास की यात्रा पर भी बात की। उन्होंने कहा कि 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव आए। इसके बाद एक पारदर्शी और तकनीक आधारित स्टॉक एक्सचेंज सिस्टम की जरूरत महसूस हुई।
उन्होंने 1992 के चर्चित Harshad Mehta Scam का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना ने भारतीय वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता और रेगुलेशन की आवश्यकता को उजागर किया। इसी दौर के बाद NSE जैसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेंज सिस्टम का विस्तार हुआ, जिसने भारतीय बाजार को अधिक संगठित और भरोसेमंद बनाया।
सेबी ने निवेशकों को दी चेतावनी
कार्यक्रम में मौजूद SEBI के कॉरपोरेट फाइनेंस विभाग के चीफ जनरल मैनेजर D Rajesh Kumar ने डिजिटल युग में बढ़ रहे फर्जी निवेश स्कैम्स को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल रहे “जल्दी अमीर बनने” वाले निवेश ऑफर्स से बचना जरूरी है। निवेशकों को केवल SEBI से अधिकृत संस्थानों और रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से ही निवेश करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय साक्षरता आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है, क्योंकि गलत निवेश फैसले लोगों की वर्षों की बचत को प्रभावित कर सकते हैं।
छात्रों के लिए नए करियर विकल्प खुलेंगे
नरसारावपेट सांसद और यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरमैन Lavu Sri Krishna Devarayalu ने कहा कि आने वाले समय में वित्तीय जागरूकता और बाजार की समझ देश की नई नेतृत्व क्षमता तय करेगी।
उन्होंने छात्रों को म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन, डीमैट अकाउंट सर्विसेज और इक्विटी रिसर्च जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि भारत में निवेश संस्कृति तेजी से बढ़ रही है और इसके साथ फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के इन-चार्ज वाइस चांसलर प्रोफेसर के वी कृष्ण किशोर, रजिस्ट्रार प्रोफेसर पी एम वी राव, फैकल्टी सदस्य और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में तेजी से बढ़ रहे रिटेल निवेशकों के दौर में फाइनेंशियल एजुकेशन बेहद जरूरी हो गई है। कोविड महामारी के बाद लाखों नए निवेशक शेयर बाजार से जुड़े हैं, लेकिन उनमें से कई लोगों के पास पर्याप्त वित्तीय ज्ञान नहीं है।
ऐसे में यूनिवर्सिटी स्तर पर स्किल डेवलपमेंट सेंटर की शुरुआत छात्रों को शुरुआती स्तर से ही वित्तीय बाजारों की समझ देने में मदद करेगी। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि जिम्मेदार निवेश संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, भारत में डिजिटल ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए भविष्य में फाइनेंशियल मार्केट स्किल्स की मांग और तेजी से बढ़ सकती है। यही वजह है कि NSE जैसी संस्थाएं अब शिक्षा संस्थानों के साथ मिलकर स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग मॉडल पर जोर दे रही हैं।
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