मुंबई और आसपास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को गुरुवार से महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल-डीजल और सोने की कीमतों में तेजी के बीच अब सीएनजी भी महंगी हो गई है। मुंबई महानगर क्षेत्र में CNG सप्लाई करने वाली Mahanagar Gas Limited ने सीएनजी की कीमत में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी है। नई कीमतें 14 मई 2026 से लागू हो चुकी हैं।
इस बढ़ोतरी के बाद मुंबई में एक किलो CNG की कीमत 82 रुपये से बढ़कर 84 रुपये हो गई है। इसका असर सिर्फ निजी वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऑटो, टैक्सी, कैब और छोटे कमर्शियल वाहनों का किराया भी बढ़ सकता है। ऐसे में आम लोगों के दैनिक सफर का खर्च बढ़ने की आशंका है।
मुंबई में क्यों बढ़ी CNG की कीमत?
महानगर गैस लिमिटेड ने कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण बताए हैं। कंपनी के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का असर गैस बाजार पर दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तीन बड़े फैक्टर गैस कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, एलएनजी और गैस खरीद लागत में बढ़ोतरी, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी इसके अलावा समुद्री सप्लाई रूट्स पर बढ़ते तनाव की वजह से ऊर्जा कंपनियों की लॉजिस्टिक लागत भी बढ़ रही है। यही कारण है कि गैस वितरण कंपनियां धीरे-धीरे अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं।
सिर्फ मुंबई नहीं, दूसरे शहरों पर भी पड़ सकता है असर
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में दूसरे महानगरों में भी CNG और PNG की कीमतें बढ़ सकती हैं। दिल्ली, पुणे, अहमदाबाद, लखनऊ और हैदराबाद जैसे शहरों में भी गैस कंपनियां लागत का आकलन कर रही हैं।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित गैस और ऊर्जा स्रोतों से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हर बढ़ोतरी का असर घरेलू बाजार पर दिखाई देता है।
ऑटो और टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग शुरू
सीएनजी महंगी होने के तुरंत बाद मुंबई के ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों में वाहन संचालन लागत लगातार बढ़ी है।
यूनियनों का तर्क है कि:
- CNG महंगी हो गई
- वाहन मेंटेनेंस खर्च बढ़ा
- स्पेयर पार्ट्स और इंश्योरेंस महंगा हुआ
- ट्रैफिक के कारण ईंधन खपत बढ़ रही है
अगर सरकार या परिवहन विभाग जल्द निर्णय नहीं लेते, तो आने वाले समय में किराया संशोधन की मांग और तेज हो सकती है।
12 लाख से ज्यादा वाहनों पर सीधा असर
Mahanagar Gas Limited के आंकड़ों के अनुसार मुंबई महानगर क्षेत्र में करीब 12 लाख वाहन CNG पर चलते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऑटो और टैक्सी की है।
मुंबई क्षेत्र में CNG वाहनों का अनुमानित आंकड़ा
| वाहन श्रेणी | अनुमानित संख्या |
|---|---|
| ऑटो रिक्शा | 4.7 लाख |
| टैक्सी | 1.6 लाख+ |
| निजी वाहन | करीब 5 लाख |
| अन्य कमर्शियल वाहन | लाखों में |
इसका मतलब है कि कीमत बढ़ने का असर सीधे लाखों परिवारों के मासिक बजट पर पड़ेगा।
निजी वाहन चालकों की जेब पर कितना असर?
अगर कोई व्यक्ति रोजाना 3 से 4 किलो CNG इस्तेमाल करता है, तो महीने का अतिरिक्त खर्च 180 से 250 रुपये तक बढ़ सकता है। वहीं टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए यह बोझ कहीं ज्यादा बड़ा होगा क्योंकि उनकी दैनिक खपत काफी अधिक होती है।
कई कैब ड्राइवरों का कहना है कि पिछले एक साल में सीएनजी की कीमतों में कई बार बदलाव हुआ है, लेकिन किराया उसी अनुपात में नहीं बढ़ा। इससे उनकी कमाई पर दबाव बढ़ रहा है।
पश्चिम एशिया संकट से क्यों जुड़ी है भारत की गैस कीमत?
भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी निर्भर है। पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का युद्ध, तनाव या सप्लाई बाधा सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को प्रभावित करती है।
हाल के हफ्तों में ब्रेंट क्रूड में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया, शिपिंग कॉस्ट बढ़ी, गैस कॉन्ट्रैक्ट महंगे हुए, डॉलर मजबूत हुआ इन सभी कारणों का असर भारत की आयात लागत पर पड़ा है। यही वजह है कि अब पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ गैस की कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है।
क्या आगे और महंगाई बढ़ सकती है?
ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वैश्विक तनाव लंबा चलता है तो आने वाले महीनों में:
- CNG और PNG और महंगी हो सकती है
- सार्वजनिक परिवहन किराया बढ़ सकता है
- लॉजिस्टिक कॉस्ट बढ़ने से सामान महंगे हो सकते हैं
- खाद्य महंगाई पर भी असर पड़ सकता है
यानी यह सिर्फ गैस कीमत बढ़ने की खबर नहीं है, बल्कि व्यापक महंगाई दबाव का संकेत भी माना जा रहा है।
आम लोगों के लिए चिंता क्यों बढ़ी?
मुंबई जैसे शहरों में लाखों मध्यम वर्गीय परिवार पेट्रोल की तुलना में सस्ती होने के कारण CNG वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों से अब CNG और पेट्रोल के बीच का अंतर कम होता जा रहा है।
यही कारण है कि उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ रही है कि अगर वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में रोजमर्रा का सफर और महंगा हो सकता है।
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