भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में लगातार दूसरे सप्ताह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 1 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व $7.794 अरब घटकर $690.693 अरब रह गया। इससे पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में $4.82 अरब की कमी आई थी।
लगातार दो सप्ताह की गिरावट ऐसे समय में आई है जब ईरान-इजरायल तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता ने भारतीय वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और पूंजी प्रवाह पर बढ़ते दबाव का संकेत भी है।
लगातार दूसरे सप्ताह घटा भारत का Forex Reserve
रिजर्व बैंक की ओर से जारी साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक:
| सप्ताह | विदेशी मुद्रा भंडार |
|---|---|
| 27 फरवरी 2026 | $728.494 अरब (ऑल टाइम हाई) |
| पिछला सप्ताह | $698.487 अरब |
| 1 मई 2026 समाप्त सप्ताह | $690.693 अरब |
इस तरह सिर्फ दो सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग $12.6 अरब घट गया।
Foreign Currency Assets में भी बड़ी गिरावट
भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा Foreign Currency Assets (FCA) होता है।
आरबीआई के अनुसार 1 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में FCA में $2.797 अरब की गिरावट दर्ज की गई।
अब FCA घटकर $551.825 अरब रह गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर के मुकाबले यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य मुद्राओं में उतार-चढ़ाव का असर भी FCA वैल्यू पर पड़ता है।
Gold Reserve में भी आई भारी कमी
सिर्फ विदेशी मुद्रा आस्तियां ही नहीं, बल्कि भारत के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार:
- Gold Reserve वैल्यू में $5.021 अरब की कमी
- कुल Gold Reserve घटकर $115.216 अरब
रह गया है।
मार्च 2026 के अंत तक RBI के पास कुल: 880.52 टन सोना मौजूद था।
यह भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 16.7% हिस्सा बनता है।
विदेशी मुद्रा भंडार घटने की बड़ी वजह क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं:
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता
ईरान-इजरायल तनाव
डॉलर में मजबूती
RBI द्वारा रुपये को सपोर्ट करने के लिए हस्तक्षेप
इसी वजह से हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार और रुपये दोनों पर दबाव देखने को मिला है।
RBI क्यों करता है Forex Reserve का इस्तेमाल?
भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कई अहम उद्देश्यों के लिए करता है:
- रुपये को स्थिर रखने के लिए
- आयात भुगतान सुरक्षा के लिए
- वैश्विक संकट के दौरान आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए
- विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत करने के लिए
विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
क्या Forex Reserve में गिरावट चिंता की बात है?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी ऐतिहासिक रूप से काफी मजबूत स्थिति में है।
हालांकि, लगातार गिरावट यह संकेत जरूर देती है कि वैश्विक आर्थिक हालात और पूंजी प्रवाह पर दबाव बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर वैश्विक तनाव लंबा खिंचता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है, तो आने वाले समय में रिजर्व पर और दबाव दिख सकता है।
SDR और IMF Reserve में मामूली बढ़ोतरी
हालांकि, कुछ हिस्सों में हल्की बढ़त भी दर्ज की गई।
आरबीआई के मुताबिक:
- Special Drawing Rights (SDR) में $15 million की बढ़ोतरी
- SDR बढ़कर $18.789 अरब
- IMF रिजर्व में $8 million की बढ़ोतरी
- IMF Reserve अब $4.863 अरब
हो गया है।
भारत के लिए मजबूत Forex Reserve क्यों जरूरी?
भारत दुनिया के सबसे बड़े आयातक देशों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा:
- कच्चा तेल
- गैस
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- रक्षा उपकरण
विदेशों से आयात करता है।
इसी वजह से मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद अहम माना जाता है।
क्या रुपये पर बढ़ सकता है दबाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट जारी रहती है और डॉलर मजबूत बना रहता है, तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, आरबीआई के पास अभी भी पर्याप्त रिजर्व मौजूद है, जिससे वह बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये को सपोर्ट कर सकता है।
क्या Gold Reserve की गिरावट चिंताजनक है?
विशेषज्ञों के अनुसार गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में गिरावट का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि सोना बेचा गया है।
कई बार अंतरराष्ट्रीय गोल्ड कीमतों और डॉलर वैल्यू में बदलाव के कारण भी रिजर्व की वैल्यू घट जाती है।
हालांकि, सोना अब भी भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
आने वाले समय में किन बातों पर रहेगी नजर?
अर्थशास्त्रियों और निवेशकों की नजर अब इन फैक्टर्स पर रहेगी:
ईरान-इजरायल तनाव
डॉलर इंडेक्स
विदेशी निवेशकों का रुख
कच्चे तेल की कीमतें
RBI का बाजार हस्तक्षेप
रुपये की चाल
यही फैक्टर्स आने वाले समय में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की दिशा तय कर सकते हैं।
FAQ
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कितना है?
1 मई 2026 को समाप्त सप्ताह के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $690.693 अरब है।
विदेशी मुद्रा भंडार क्यों घटता है?
डॉलर में उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, RBI हस्तक्षेप और वैश्विक आर्थिक तनाव इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं।
RBI Forex Reserve का इस्तेमाल क्यों करता है?
रुपये को स्थिर रखने, आयात भुगतान सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए।
क्या भारत का Forex Reserve अभी भी मजबूत है?
विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी मजबूत स्तर पर बना हुआ है।
निष्कर्ष
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह आई बड़ी गिरावट ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि, भारत अभी भी दुनिया के मजबूत Forex Reserve वाले देशों में शामिल है, लेकिन वैश्विक तनाव, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली आने वाले समय में भारतीय बाजारों और रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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