देशभर में ईंधन कीमतों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। पेट्रोल के साथ-साथ डीजल की कीमतों पर भी ट्रांसपोर्ट सेक्टर, किसानों और आम लोगों की नजर टिकी रहती है। 9 मई 2026 को जारी ताजा रेट के अनुसार देश के अधिकांश बड़े शहरों में डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
मुंबई में आज डीजल की कीमत ₹90.03 प्रति लीटर दर्ज की गई है। वहीं दिल्ली में डीजल ₹87.67 प्रति लीटर और लखनऊ में ₹87.81 प्रति लीटर बिक रहा है। दूसरी तरफ तिरुवनंतपुरम में डीजल ₹96.48 प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जो देश के बड़े शहरों में सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर-रुपया विनिमय दर और केंद्र व राज्य सरकारों के टैक्स ढांचे का सीधा असर भारत में डीजल की कीमतों पर पड़ता है।
आज भारत में डीजल का ताजा भाव (9 मई 2026)
| शहर | डीजल कीमत (प्रति लीटर) | बदलाव |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹87.67 | कोई बदलाव नहीं |
| कोलकाता | ₹92.02 | कोई बदलाव नहीं |
| मुंबई | ₹90.03 | कोई बदलाव नहीं |
| चेन्नई | ₹92.39 | कोई बदलाव नहीं |
| गुरुग्राम | ₹87.94 | ₹0.16 की गिरावट |
| नोएडा | ₹88.01 | ₹0.03 की बढ़ोतरी |
| बेंगलुरु | ₹90.99 | कोई बदलाव नहीं |
| भुवनेश्वर | ₹92.74 | ₹0.18 की गिरावट |
| चंडीगढ़ | ₹82.45 | कोई बदलाव नहीं |
| हैदराबाद | ₹95.70 | कोई बदलाव नहीं |
| जयपुर | ₹90.38 | ₹0.17 की बढ़ोतरी |
| लखनऊ | ₹87.81 | कोई बदलाव नहीं |
| पटना | ₹91.49 | कोई बदलाव नहीं |
| तिरुवनंतपुरम | ₹96.48 | ₹0.27 की बढ़ोतरी |
मुंबई में आज डीजल का रेट कितना है?
मुंबई में आज डीजल की कीमत: ₹90.03 प्रति लीटर दर्ज की गई है।
दिलचस्प बात यह है कि मुंबई में डीजल की कीमत पिछले 12 महीनों से लगभग स्थिर बनी हुई है। 9 मई 2025 से लेकर 9 मई 2026 तक कीमतों में कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया।
किन शहरों में सबसे महंगा डीजल मिल रहा?
ताजा आंकड़ों के अनुसार:
सबसे महंगा डीजल:
तिरुवनंतपुरम में डीजल की कीमत ₹96.48 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
इसके अलावा:
- हैदराबाद
- भुवनेश्वर
- चेन्नई
- कोलकाता
जैसे शहरों में भी डीजल ₹92 से ₹95 प्रति लीटर के बीच बना हुआ है।
चंडीगढ़ में सबसे सस्ता डीजल क्यों?
आज के रेट के अनुसार चंडीगढ़ में डीजल सबसे सस्ता है, जहां कीमत ₹82.45 प्रति लीटर दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कम स्थानीय टैक्स और अपेक्षाकृत कम VAT मुख्य वजह हैं।
यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में डीजल की कीमतों में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
भारत में डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं?
भारत में डीजल की कीमतें कई बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करती हैं। इनमें:
- अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें
- डॉलर-रुपया विनिमय दर
- केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
- राज्य सरकारों का VAT
- ट्रांसपोर्ट और डीलर कमीशन
शामिल हैं।
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव का असर भारतीय डीजल कीमतों पर भी दिखाई देता है।
डीजल की कीमतें किसानों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को कैसे प्रभावित करती हैं?
भारत में डीजल का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर:
- ट्रक
- बस
- ट्रैक्टर
- कृषि मशीनरी
- माल परिवहन
में किया जाता है।
इसी वजह से डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे ट्रांसपोर्ट लागत और कृषि खर्च पर पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार डीजल महंगा होने से खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
पिछले 1 साल में डीजल की कीमतों में क्या बदलाव हुआ?
मुंबई में डीजल की कीमत पिछले 12 महीनों से लगभग स्थिर बनी हुई है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद तेल कंपनियों ने घरेलू स्तर पर कीमतों को सीमित दायरे में बनाए रखा।
| अवधि | मुंबई डीजल रेट |
|---|---|
| मई 2025 | ₹90.03 |
| मई 2026 | ₹90.03 |
क्या आने वाले महीनों में डीजल और महंगा हो सकता है?
ऊर्जा बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही और पश्चिम एशिया तनाव बढ़ा, तो आने वाले महीनों में डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, सरकार टैक्स एडजस्टमेंट और तेल कंपनियों के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर सकती है।
डीजल, पेट्रोल और CNG में कौन ज्यादा किफायती?
आज बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच कई लोग CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।
| ईंधन | औसत रनिंग कॉस्ट |
|---|---|
| पेट्रोल | सबसे ज्यादा |
| डीजल | मध्यम |
| CNG | सबसे कम |
विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा दूरी तय करने वाले वाहनों के लिए डीजल और CNG अब भी लोकप्रिय विकल्प बने हुए हैं।
भारत में डीजल पर टैक्स कितना असर डालता है?
भारत में डीजल की कीमतों का बड़ा हिस्सा टैक्स से जुड़ा होता है।
केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है जबकि राज्य सरकारें VAT वसूलती हैं। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में डीजल की कीमतें अलग-अलग दिखाई देती हैं।
क्या इलेक्ट्रिक वाहन डीजल की मांग घटा देंगे?
ऑटो सेक्टर एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
हालांकि, भारी ट्रांसपोर्ट और लॉन्ग-डिस्टेंस लॉजिस्टिक्स सेक्टर में डीजल की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार ट्रक और भारी कमर्शियल वाहनों में डीजल की पकड़ निकट भविष्य में पूरी तरह खत्म होने की संभावना कम है।
डीजल खर्च कम करने के आसान तरीके
वाहन की नियमित सर्विस करवाएं
सही टायर प्रेशर बनाए रखें
अनावश्यक वजन न रखें
स्मूद ड्राइविंग करें
इंजन लंबे समय तक चालू न रखें
इन आदतों से माइलेज बेहतर हो सकता है और ईंधन खर्च कम हो सकता है।
FAQ
भारत में सबसे सस्ता डीजल कहां है?
आज के रेट के अनुसार चंडीगढ़ में डीजल सबसे सस्ता है।
सबसे महंगा डीजल किस शहर में है?
ताजा रेट के अनुसार तिरुवनंतपुरम में डीजल सबसे महंगा है।
डीजल की कीमतें हर दिन क्यों बदलती हैं?
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, टैक्स और डॉलर-रुपया विनिमय दर के आधार पर कीमतों में बदलाव होता है।
क्या आने वाले समय में डीजल सस्ता हो सकता है?
अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है और टैक्स में राहत मिलती है, तो डीजल कीमतों में कमी संभव है।
निष्कर्ष
9 मई 2026 को देशभर में डीजल की कीमतों में सीमित बदलाव देखने को मिला है, लेकिन कई शहरों में डीजल अब भी ₹90 प्रति लीटर से ऊपर बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अस्थिरता और टैक्स ढांचे के कारण आने वाले समय में ईंधन कीमतों पर सभी की नजर बनी रहेगी।
डीजल महंगा होने से महंगाई क्यों बढ़ती है?
भारत में माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा ट्रकों और कमर्शियल वाहनों के जरिए होता है, जिनमें मुख्य रूप से डीजल का इस्तेमाल किया जाता है।
इसी वजह से डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सब्जियों, फल, दूध, किराना और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है, जिसका असर धीरे-धीरे आम लोगों तक पहुंचता है।
खासतौर पर कृषि और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में डीजल की बड़ी भूमिका होने के कारण इसकी कीमतों में बदलाव पूरे बाजार को प्रभावित कर सकता है।
भारत पर वैश्विक तेल बाजार का कितना असर पड़ता है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर भारतीय डीजल कीमतों पर भी दिखाई देता है।
अगर वैश्विक सप्लाई प्रभावित होती है, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है या तेल उत्पादक देश उत्पादन घटाते हैं, तो भारत में ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर मजबूत होने पर भारत की आयात लागत और बढ़ जाती है।
डीजल वाहन खरीदने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
अगर आप नया डीजल वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ माइलेज देखकर फैसला न लें।
इन बातों का ध्यान जरूर रखें:
रोजाना ड्राइविंग कितनी है
लंबी दूरी का उपयोग ज्यादा है या नहीं
मेंटेनेंस लागत कितनी होगी
शहर में डीजल वाहनों से जुड़े नियम क्या हैं
भविष्य में resale value कैसी रहेगी
सर्विस और पार्ट्स की उपलब्धता कैसी है
विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा दूरी तय करने वाले लोगों के लिए डीजल वाहन अब भी किफायती साबित हो सकते हैं।
क्या इलेक्ट्रिक ट्रक और बसें डीजल की मांग कम करेंगी?
ऑटो और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक बसों और कमर्शियल वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
हालांकि, भारत में भारी ट्रांसपोर्ट, लॉन्ग-डिस्टेंस लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई सेक्टर फिलहाल डीजल पर काफी हद तक निर्भर है।
इसी वजह से निकट भविष्य में डीजल की मांग पूरी तरह खत्म होने की संभावना कम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार EV इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने के बाद ही बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकता है।
क्या भविष्य में डीजल वाहनों पर सख्ती बढ़ सकती है?
कई बड़े शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए डीजल वाहनों को लेकर नियम लगातार सख्त किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में पुराने डीजल वाहनों पर और सख्ती देखने को मिल सकती है, खासकर महानगरों में।
हालांकि, कमर्शियल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में डीजल की मजबूत जरूरत के कारण इसकी मांग पूरी तरह खत्म होने की संभावना फिलहाल नहीं है।
आने वाले समय में डीजल बाजार पर क्या रहेगी नजर?
ऊर्जा बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में:
- कच्चे तेल की कीमतें
- डॉलर-रुपया विनिमय दर
- पश्चिम एशिया तनाव
- सरकारी टैक्स नीतियां
- वैश्विक सप्लाई चेन
डीजल कीमतों की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएंगी।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ती है, तो भारत में डीजल कीमतों पर भी असर दिखाई दे सकता है।
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