देशभर में पेट्रोल की कीमतों को लेकर लोगों की नजर लगातार बनी हुई है। 9 मई 2026 को जारी ताजा रेट के अनुसार कई बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जबकि कुछ शहरों में मामूली बढ़ोतरी और गिरावट देखने को मिली है।
मुंबई में आज पेट्रोल की कीमत ₹103.54 प्रति लीटर दर्ज की गई। वहीं दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और लखनऊ में ₹94.69 प्रति लीटर बिक रहा है। दूसरी तरफ हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में पेट्रोल ₹107 प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर-रुपया विनिमय दर और केंद्र व राज्य सरकारों के टैक्स ढांचे का सीधा असर भारत में पेट्रोल की कीमतों पर पड़ता है।
आज भारत में पेट्रोल का ताजा भाव (9 मई 2026)
| शहर | पेट्रोल कीमत (प्रति लीटर) | बदलाव |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹94.77 | कोई बदलाव नहीं |
| कोलकाता | ₹105.41 | कोई बदलाव नहीं |
| मुंबई | ₹103.54 | कोई बदलाव नहीं |
| चेन्नई | ₹100.84 | कोई बदलाव नहीं |
| गुरुग्राम | ₹95.48 | ₹0.17 की गिरावट |
| नोएडा | ₹94.90 | ₹0.02 की बढ़ोतरी |
| बेंगलुरु | ₹102.92 | कोई बदलाव नहीं |
| भुवनेश्वर | ₹101.16 | ₹0.19 की गिरावट |
| चंडीगढ़ | ₹94.30 | कोई बदलाव नहीं |
| हैदराबाद | ₹107.50 | ₹0.04 की बढ़ोतरी |
| जयपुर | ₹104.91 | ₹0.19 की बढ़ोतरी |
| लखनऊ | ₹94.69 | कोई बदलाव नहीं |
| पटना | ₹105.23 | कोई बदलाव नहीं |
| तिरुवनंतपुरम | ₹107.48 | ₹0.15 की बढ़ोतरी |
मुंबई में आज पेट्रोल का रेट कितना है?
मुंबई में आज पेट्रोल की कीमत: ₹103.54 प्रति लीटर दर्ज की गई है।
पिछले 10 दिनों में मुंबई में पेट्रोल की कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव देखा गया है। इस दौरान कीमतें ₹103.50 से ₹103.54 प्रति लीटर के बीच बनी रहीं।
किन शहरों में सबसे महंगा पेट्रोल मिल रहा?
ताजा आंकड़ों के अनुसार:
सबसे महंगा पेट्रोल:
हैदराबाद में पेट्रोल की कीमत ₹107.50 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
इसके अलावा:
- तिरुवनंतपुरम
- कोलकाता
- पटना
- जयपुर
जैसे शहरों में भी पेट्रोल ₹100 प्रति लीटर से ऊपर बना हुआ है।
दिल्ली और चंडीगढ़ में क्यों सस्ता है पेट्रोल?
दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहरों में पेट्रोल अपेक्षाकृत सस्ता है। इसके पीछे मुख्य कारण:
- कम राज्य VAT
- बेहतर सप्लाई नेटवर्क
- टैक्स संरचना
- लॉजिस्टिक लागत
माने जाते हैं।
यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
भारत में पेट्रोल की कीमतें कैसे तय होती हैं?
भारत में पेट्रोल की कीमतें कई बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करती हैं। इनमें:
- अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें
- डॉलर-रुपया विनिमय दर
- केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
- राज्य सरकारों का VAT
- ट्रांसपोर्ट और डीलर कमीशन
शामिल हैं।
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलाव का असर भारतीय पेट्रोल कीमतों पर भी दिखाई देता है।
भारत में पेट्रोल पड़ोसी देशों से महंगा क्यों?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में पेट्रोल की कीमतें कई पड़ोसी देशों के मुकाबले ज्यादा हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह टैक्स स्ट्रक्चर है।
भारत में पेट्रोल पर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा भारी टैक्स लगाया जाता है। कई राज्यों में VAT अलग-अलग होने के कारण कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
पिछले 1 साल में पेट्रोल कितना महंगा हुआ?
पिछले एक साल में पेट्रोल की कीमतों में सीमित लेकिन लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण ईंधन बाजार लगातार दबाव में बना हुआ है।
| अवधि | मुंबई पेट्रोल रेट |
|---|---|
| जून 2025 | ₹102 के आसपास |
| सितंबर 2025 | ₹103 के करीब |
| मई 2026 | ₹103.54 |
क्या आने वाले महीनों में पेट्रोल और महंगा हो सकता है?
ऊर्जा बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं और पश्चिम एशिया तनाव बढ़ा, तो आने वाले महीनों में पेट्रोल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, सरकार टैक्स एडजस्टमेंट और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर सकती है।
पेट्रोल, डीजल और CNG में कौन ज्यादा किफायती?
आज बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच कई लोग CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।
| ईंधन | औसत रनिंग कॉस्ट |
|---|---|
| पेट्रोल | सबसे ज्यादा |
| डीजल | मध्यम |
| CNG | सबसे कम |
विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा दूरी तय करने वाले वाहन चालकों के लिए CNG लंबे समय में ज्यादा किफायती विकल्प साबित हो सकता है।
सरकार ईंधन कीमतों को कैसे नियंत्रित करती है?
केंद्र और राज्य सरकारें टैक्स, एक्साइज ड्यूटी और VAT के जरिए ईंधन कीमतों को प्रभावित करती हैं।
इसके अलावा ऑयल मार्केटिंग कंपनियां भी अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के आधार पर कीमतों में बदलाव करती हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों का पेट्रोल मांग पर क्या असर पड़ेगा?
ऑटो सेक्टर एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ सकती है।
हालांकि, भारत में फिलहाल पेट्रोल वाहन सबसे बड़ा बाजार बने हुए हैं और निकट भविष्य में इनकी मांग पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है।
पेट्रोल भरवाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
अधिकृत पेट्रोल पंप से ही ईंधन भरवाएं
मीटर रीडिंग जरूर चेक करें
फ्यूल क्वालिटी पर ध्यान दें
सुबह के समय ईंधन भरवाना बेहतर माना जाता है
कैशबैक और डिजिटल ऑफर चेक करें
FAQ
भारत में सबसे सस्ता पेट्रोल कहां है?
आज के रेट के अनुसार चंडीगढ़ और दिल्ली में पेट्रोल अपेक्षाकृत सस्ता है।
सबसे महंगा पेट्रोल किस शहर में है?
ताजा रेट के अनुसार हैदराबाद में पेट्रोल सबसे महंगा है, जहां कीमत ₹107.50 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
पेट्रोल की कीमतें हर दिन क्यों बदलती हैं?
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, टैक्स और डॉलर-रुपया विनिमय दर के आधार पर कीमतों में बदलाव होता है।
क्या आने वाले समय में पेट्रोल सस्ता हो सकता है?
अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है और टैक्स में राहत मिलती है, तो पेट्रोल कीमतों में कमी संभव है।
निष्कर्ष
9 मई 2026 को देशभर में पेट्रोल की कीमतों में सीमित बदलाव देखने को मिला है, लेकिन कई शहरों में पेट्रोल अब भी ₹100 प्रति लीटर के ऊपर बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अस्थिरता और टैक्स ढांचे के कारण आने वाले समय में ईंधन कीमतों पर सभी की नजर बनी रहेगी।
कच्चे तेल की कीमतों का भारत पर कितना असर पड़ता है?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है।
अगर ब्रेंट क्रूड महंगा होता है या डॉलर मजबूत होता है, तो भारत के लिए तेल आयात लागत बढ़ जाती है। इसका असर धीरे-धीरे पेट्रोल पंपों पर दिखाई देने लगता है।
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया तनाव, वैश्विक सप्लाई संकट और ओपेक देशों के फैसले भारतीय ईंधन बाजार को सीधे प्रभावित करते हैं।
क्या इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल की मांग घटा देंगे?
ऑटो सेक्टर विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
हालांकि, भारत में फिलहाल पेट्रोल वाहन सबसे बड़ा बाजार बने हुए हैं और अगले कई वर्षों तक इनकी मांग मजबूत रहने की संभावना है।
खासतौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में पेट्रोल वाहन अभी भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं क्योंकि वहां EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित है।
इसके अलावा टू-व्हीलर और एंट्री-लेवल कार सेगमेंट में पेट्रोल वाहनों की पकड़ अभी भी काफी मजबूत बनी हुई है।
अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल की कीमतें अलग क्यों होती हैं?
भारत में पेट्रोल की कीमतों में बड़ा अंतर मुख्य रूप से राज्य सरकारों के VAT और स्थानीय टैक्स के कारण देखने को मिलता है।
हर राज्य अपने हिसाब से VAT तय करता है। यही वजह है कि कुछ राज्यों में पेट्रोल सस्ता दिखाई देता है जबकि कुछ राज्यों में कीमतें काफी ज्यादा होती हैं।
इसके अलावा ट्रांसपोर्ट लागत, डीलर कमीशन और स्थानीय लॉजिस्टिक्स खर्च भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली, चंडीगढ़ और नोएडा जैसे शहरों में अपेक्षाकृत कम टैक्स होने के कारण पेट्रोल सस्ता दिखाई देता है।
पेट्रोल खर्च कम करने के आसान तरीके
विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ आसान आदतें अपनाकर वाहन चालक अपने ईंधन खर्च को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
वाहन की नियमित सर्विस करवाएं
सही टायर प्रेशर बनाए रखें
तेज एक्सिलरेशन और अचानक ब्रेक से बचें
ट्रैफिक में लंबे समय तक इंजन चालू न रखें
जरूरत न होने पर अतिरिक्त वजन वाहन में न रखें
स्मूद ड्राइविंग स्टाइल अपनाएं
इन आदतों से वाहन का माइलेज बेहतर हो सकता है और ईंधन की खपत कम हो सकती है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में क्यों शामिल है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में होने वाले बदलाव का असर भारतीय पेट्रोल और डीजल कीमतों पर तेजी से दिखाई देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर वैश्विक स्तर पर सप्लाई प्रभावित होती है या तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन घटाया जाता है, तो भारत में ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
क्या आने वाले समय में पेट्रोल ₹110 पार कर सकता है?
ऊर्जा बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं और डॉलर मजबूत बना रहता है, तो कुछ शहरों में पेट्रोल की कीमतें ₹110 प्रति लीटर के स्तर तक पहुंच सकती हैं।
हालांकि, सरकार टैक्स एडजस्टमेंट और अन्य उपायों के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर सकती है।
क्या CNG और EV पेट्रोल पर निर्भरता कम कर सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता पेट्रोल पर निर्भरता को कुछ हद तक कम कर सकती है।
खासतौर पर टैक्सी, ऑटो और डिलीवरी सेक्टर में CNG तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जबकि शहरी क्षेत्रों में EV वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है।
हालांकि, भारत जैसे बड़े देश में पेट्रोल की मांग निकट भविष्य में पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है।
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