भारत का टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर इस समय एक बड़े मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ सरकार देश में कपास उत्पादन बढ़ाने और “5-F Vision” के जरिए टेक्सटाइल वैल्यू चेन को मजबूत करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर इंडस्ट्री संगठन लगातार कच्चे कपास पर लगने वाली 11% इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग कर रहे हैं।
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) का कहना है कि अगर आयात शुल्क नहीं हटाया गया तो भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री की वैश्विक प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है। इसका असर सिर्फ निर्यात पर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के रोजगार पर भी पड़ सकता है।
मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट एक्सपोर्ट में गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे समय में जब बांग्लादेश, वियतनाम और चीन जैसे देश वैश्विक बाजार में आक्रामक तरीके से अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं, भारतीय उद्योग महंगे कच्चे माल की समस्या से जूझ रहा है।
आखिर विवाद क्या है?
वर्तमान में भारत कच्चे कपास (Raw Cotton) के आयात पर लगभग 11% इंपोर्ट ड्यूटी लगाता है।
इसमें शामिल हैं:
- बेसिक कस्टम ड्यूटी
- एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस
- अन्य चार्ज
इंडस्ट्री का कहना है कि इससे विदेशी कपास महंगा पड़ता है और घरेलू मिलों की लागत बढ़ जाती है।
CITI ने क्या मांग की?
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने सरकार से मांग की है कि:
कच्चे कपास पर लगने वाली 11% इंपोर्ट ड्यूटी तुरंत हटाई जाए।
संस्था का तर्क है कि:
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास सस्ता उपलब्ध है
- भारतीय मिलों को महंगा कच्चा माल खरीदना पड़ रहा है
- इससे प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ रही है
- निर्यात प्रतिस्पर्धा कमजोर हो रही है
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
Gherzi Consulting और International Cotton Advisory Committee (ICAC) की संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि:
अगर इंपोर्ट ड्यूटी हटती है तो भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर को सस्ती कपास मिलेगी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत का टेक्सटाइल सेक्टर फिलहाल कॉस्ट प्रेशर से गुजर रहा है।
भारत के टेक्सटाइल सेक्टर की हालत क्यों चिंता वाली है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े टेक्सटाइल उत्पादकों में शामिल है।
लेकिन हालिया आंकड़े दबाव दिखा रहे हैं।
FY26 में:
टेक्सटाइल और अपैरल एक्सपोर्ट 2.2% गिरकर 35.79 अरब डॉलर पर आ गया।
यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
यह सेक्टर कितना बड़ा है?
टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
PIB के अनुसार: लगभग 4.5 करोड़ लोग सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इस सेक्टर से जुड़े हैं।
यह कृषि के बाद देश का सबसे बड़ा रोजगार देने वाला सेक्टर माना जाता है।
दो मंत्रालयों के बीच मतभेद क्यों?
इस मुद्दे पर सरकार के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आई है।
1. कपड़ा मंत्रालय का पक्ष
कपड़ा मंत्रालय इंपोर्ट ड्यूटी हटाने के पक्ष में है।
उसका मानना है कि:
- सस्ती कपास मिलेगी
- उत्पादन लागत घटेगी
- निर्यात बढ़ेगा
- ग्लोबल कॉम्पटीशन मजबूत होगा
2. कृषि मंत्रालय का पक्ष
कृषि मंत्रालय इस प्रस्ताव को लेकर सतर्क है।
उसे चिंता है कि:
- सस्ती विदेशी कपास आने से
- भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है
- घरेलू कपास की कीमतें दबाव में आ सकती हैं
यही वजह है कि सरकार फिलहाल संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
किसानों पर असर क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादक देशों में शामिल है।
देश के लाखों किसान कपास की खेती पर निर्भर हैं।
सरकार नहीं चाहती कि:
- सस्ते आयात से घरेलू कीमतें गिरें
- किसानों की आय प्रभावित हो
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़े
इंडस्ट्री ने क्या समाधान सुझाया?
Gherzi और ICAC की रिपोर्ट में सिर्फ ड्यूटी हटाने की मांग नहीं की गई, बल्कि बाजार स्थिर रखने के सुझाव भी दिए गए हैं।
Price Stabilisation Fund का सुझाव
रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार को: Cotton Price Stabilisation Fund जैसी योजना बनानी चाहिए।
इसका उद्देश्य क्या होगा?
- मिलों को पीक सीजन में राहत
- Working Capital की समस्या कम करना
- कपास खरीद के लिए सस्ता फाइनेंस उपलब्ध कराना
ब्याज सब्सिडी की भी मांग
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि: 5% ब्याज सब्सिडी दी जा सकती है ताकि टेक्सटाइल मिलों को वित्तीय दबाव कम महसूस हो।
सरकार का 5-F Vision क्या है?
सरकार टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर लंबी रणनीति पर काम कर रही है।
इसे: 5-F Vision कहा जाता है।
5-F का मतलब
Farm → Fibre → Factory → Fashion → Foreign
यानी:
- खेत से रेशा
- रेशे से फैक्ट्री
- फैक्ट्री से फैशन
- और फैशन से विदेशी बाजार
तक पूरी वैल्यू चेन मजबूत करना।
Cotton Productivity Mission क्या है?
हाल ही में केंद्र सरकार ने: Cotton Productivity Mission को मंजूरी दी है। यह मिशन: 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगा।
मिशन का लक्ष्य क्या है?
- कपास उत्पादन बढ़ाना
- गुणवत्ता सुधारना
- किसानों की आय बढ़ाना
- टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मजबूत करना
कितने किसानों को फायदा?
सरकार के अनुसार: लगभग 32 लाख किसानों को इस मिशन से फायदा हो सकता है।
वैश्विक बाजार में भारत की चुनौती
भारत को अब सिर्फ घरेलू उत्पादन नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी देखनी पड़ रही है।
आज:
- वियतनाम
- बांग्लादेश
- चीन
- तुर्की
जैसे देश कम लागत पर टेक्सटाइल एक्सपोर्ट कर रहे हैं।
अगर भारत में कच्चा माल महंगा रहेगा तो भारतीय कंपनियों के लिए मुकाबला कठिन हो सकता है।
क्या सिर्फ ड्यूटी हटाने से समस्या हल हो जाएगी?
विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल इंपोर्ट ड्यूटी हटाना पर्याप्त नहीं होगा।
टेक्सटाइल सेक्टर को जरूरत है:
- बेहतर लॉजिस्टिक्स
- सस्ती बिजली
- आधुनिक मशीनरी
- तेज निर्यात प्रक्रियाएं
- फाइनेंस सपोर्ट
- स्थिर कपास कीमतें
इंडस्ट्री की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
टेक्सटाइल उद्योग को डर है कि अगर लागत लगातार बढ़ती रही तो:
- निर्यात ऑर्डर दूसरे देशों में शिफ्ट हो सकते हैं
- मिलों पर दबाव बढ़ सकता है
- रोजगार प्रभावित हो सकता है
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती
सरकार को अब दो बड़े हितों के बीच संतुलन बनाना है:
1. किसानों की आय बचाना
2. टेक्सटाइल इंडस्ट्री को प्रतिस्पर्धी बनाना
यही वजह है कि फैसला आसान नहीं माना जा रहा।
निष्कर्ष
भारत का टेक्सटाइल सेक्टर सिर्फ एक उद्योग नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा इकोसिस्टम है। कच्चे कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर जारी बहस इस बात का संकेत है कि सरकार को अब किसानों और उद्योग दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाना होगा।
एक तरफ घरेलू कपास उत्पादकों की सुरक्षा जरूरी है, वहीं दूसरी ओर भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री को वैश्विक बाजार में टिकाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आने वाले महीनों में सरकार का फैसला यह तय करेगा कि भारत दुनिया के टेक्सटाइल मार्केट में अपनी स्थिति कितनी मजबूत बना पाता है।
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