देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका-ईरान विवाद के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। इसके बावजूद भारत में आम उपभोक्ताओं को फिलहाल बड़ी राहत मिली हुई है, क्योंकि 8 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केवल मामूली बदलाव दर्ज किया गया।
हालांकि तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनियां पेट्रोल पर करीब ₹14 प्रति लीटर और डीजल पर लगभग ₹18 प्रति लीटर तक का नुकसान झेल रही हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार फिलहाल घरेलू ईंधन कीमतों को स्थिर रखने की रणनीति पर काम करती दिख रही है।
दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं आज के ताजा रेट?
देश के प्रमुख शहरों में 8 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार रहीं:
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹94.77 | ₹87.67 |
| मुंबई | ₹103.50 | ₹90.03 |
| कोलकाता | ₹105.45 | ₹92.02 |
| चेन्नई | ₹100.90 | ₹92.48 |
| अहमदाबाद | ₹94.70 | ₹90.38 |
| हैदराबाद | ₹107.50 | ₹95.70 |
| पटना | ₹105.74 | ₹91.67 |
| बेंगलुरु | ₹102.96 | ₹90.99 |
| लखनऊ | ₹94.57 | ₹87.81 |
कुछ शहरों जैसे बेंगलुरु, पटना, अहमदाबाद और लखनऊ में कीमतों में कुछ पैसों का बदलाव जरूर देखा गया, लेकिन अभी तक कोई बड़ा रेट रिवीजन नहीं हुआ है।
आखिर कैसे तय होते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करती हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमत।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में जब वैश्विक बाजार में क्रूड महंगा होता है, तो उसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ता है।
इसके अलावा कुछ अन्य अहम फैक्टर्स भी कीमतों को प्रभावित करते हैं:
- डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति
- केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
- राज्य सरकारों का VAT
- रिफाइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन लागत
- अंतरराष्ट्रीय जियोपॉलिटिकल तनाव
इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल के रेट अलग होते हैं।
क्यों बढ़ रहा है सरकार पर दबाव?
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। अमेरिका-ईरान टकराव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता के कारण ब्रेंट क्रूड में 3% तक की तेजी देखी गई। WTI क्रूड भी 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बावजूद घरेलू रिटेल कीमतें लंबे समय से स्थिर रखी गई हैं। इससे उनकी मार्केटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में सरकार और तेल कंपनियों के लिए कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल हो सकता है।
LPG सिलेंडर पर क्या असर पड़ा?
घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू गैस सिलेंडर अभी भी ₹913 में मिल रहा है।
हालांकि कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बड़ा उछाल आया है।
- दिल्ली में 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर अब ₹3,071.50
- मुंबई में ₹3,024
बताया जा रहा है कि ईरान संकट शुरू होने के बाद से कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में लगातार तीसरी बार बढ़ोतरी हुई है।
आगे क्या महंगा हो सकता है?
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई प्रभावित होती है, तो भारत में भी पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके असर से सिर्फ वाहन ईंधन ही नहीं बल्कि:
- ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट
- खाद्य महंगाई
- एयरलाइन फ्यूल
- लॉजिस्टिक्स सेक्टर
- इंडस्ट्रियल कॉस्ट
पर भी असर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल सरकार कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन वैश्विक बाजार की दिशा आने वाले दिनों में भारत के ईंधन बाजार की चाल तय करेगी।
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