भारत की प्रमुख मोबिलिटी टेक्नोलॉजी कंपनी KPIT Technologies के को-फाउंडर और चेयरमैन Ravi Pandit का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। कंपनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और इसे भारतीय टेक्नोलॉजी एवं इंडस्ट्री जगत के लिए बड़ी क्षति बताया।
रवि पंडित लंबे समय से भारतीय ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी और क्लीन एनर्जी सेक्टर में अग्रणी आवाज माने जाते थे। उन्होंने न केवल KPIT Technologies को वैश्विक स्तर की मोबिलिटी टेक कंपनी बनाने में अहम भूमिका निभाई, बल्कि देश में ग्रीन एनर्जी और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहल कीं।
चार्टर्ड अकाउंटेंट से ग्लोबल टेक लीडर तक का सफर
रवि पंडित एक गोल्ड मेडलिस्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट थे। उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित MIT Sloan School of Management से भी शिक्षा हासिल की थी। प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म Kirtane & Pandit Chartered Accountants (KPCA) के चेयरमैन के रूप में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने टेक्नोलॉजी आधारित मोबिलिटी सॉल्यूशंस को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन के क्षेत्र में उनकी सोच को उद्योग जगत में काफी सम्मान मिलता था।
ग्रीन हाइड्रोजन और सस्टेनेबिलिटी पर था खास फोकस
रवि पंडित सिर्फ कारोबारी नेता नहीं थे, बल्कि नीति निर्माण और सामाजिक विकास से भी गहराई से जुड़े हुए थे। वह भारत सरकार के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से जुड़े एम्पावर्ड ग्रुप के इकलौते प्राइवेट सेक्टर सदस्य थे।
उन्होंने हाल ही में HRIDAY (Hydrogen Revolution for India’s Development of Agriculture & EnergY) पहल की शुरुआत की थी। इस पहल का मकसद स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के जरिए कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना था।
उनकी सोच साफ थी कि भारत को भविष्य की अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ने के लिए क्लीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी इनोवेशन पर तेजी से काम करना होगा।
शिक्षा, समाज और नीति निर्माण में भी निभाई अहम भूमिका
रवि पंडित कई सामाजिक, शैक्षणिक और नीति संस्थानों से जुड़े रहे। उन्होंने Pune International Centre और Janwani जैसी संस्थाओं की सह-स्थापना की।
इसके अलावा वह Gokhale Institute of Politics and Economics में सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट से भी जुड़े रहे। सामाजिक संगठन Jnana Prabodhini के अध्यक्ष के तौर पर भी उन्होंने काम किया।
उन्होंने Thermax Ltd, World Resources Institute India और Aga Khan Rural Support Programme India के बोर्ड में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
उद्योग जगत में गहरा प्रभाव
रवि पंडित भारतीय उद्योग जगत की एक सम्मानित आवाज थे। वह Mahratta Chamber of Commerce Industries and Agriculture के अध्यक्ष भी रहे। साथ ही उन्होंने Central Electronics Engineering Research Institute की रिसर्च काउंसिल की भी अगुवाई की।
उनके नेतृत्व में KPIT Technologies ने ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रिक वाहन टेक्नोलॉजी और AI आधारित मोबिलिटी सॉल्यूशंस के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई।
किताब के जरिए भी साझा किए विचार
रवि पंडित ने “Leapfrogging to Pole-Vaulting” नामक पुस्तक का सह-लेखन भी किया था। इस किताब में भारत के लिए इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल ट्रांसफॉर्मेशन की जरूरत पर विस्तार से चर्चा की गई है।
उनका निधन भारतीय टेक्नोलॉजी, उद्योग और नीति जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। KPIT Technologies समेत पूरे इंडस्ट्री सेक्टर में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
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