प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत की बदलती आर्थिक और सामरिक ताकत पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि देश अब “आयात प्रधान” नहीं, बल्कि “निर्यात प्रधान” राष्ट्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। प्रयागराज की नई छावनी में आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक सिंपोजियम के समापन समारोह में उन्होंने यह बात कही। मुख्यमंत्री का यह बयान सिर्फ राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि भारत की बदलती आर्थिक संरचना और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता का संकेत भी है।
उन्होंने विशेष रूप से रक्षा निर्यात के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि एक समय भारत जहां मात्र 600 करोड़ रुपये का रक्षा सामान निर्यात करता था, वहीं आज यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 38 हजार से 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह बदलाव भारत की रक्षा नीति, उत्पादन क्षमता और वैश्विक भरोसे में आए परिवर्तन को दर्शाता है।
भारत की बदलती आर्थिक दिशा: आयात से निर्यात की ओर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं रहा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का सक्रिय हिस्सा बन चुका है। “आयात प्रधान” अर्थव्यवस्था से “निर्यात प्रधान” बनने का अर्थ है कि देश अब न केवल अपनी जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा भी कर रहा है।
यह बदलाव कई कारणों से संभव हुआ है:
- मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान
- रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी
- तकनीकी उन्नयन और स्टार्टअप इकोसिस्टम
- निर्यात नीतियों में सुधार
इन सभी ने मिलकर भारत को एक मजबूत निर्यातक देश बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है।
रक्षा निर्यात में क्रांतिकारी उछाल
योगी आदित्यनाथ ने जिस आंकड़े का जिक्र किया, वह केवल संख्या नहीं बल्कि एक बड़े बदलाव की कहानी है। भारत ने पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है।
पहले जहां भारत रक्षा उपकरणों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर था, वहीं अब देश:
- मिसाइल सिस्टम
- ड्रोन टेक्नोलॉजी
- रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम
- आर्मर्ड व्हीकल्स
जैसे उत्पादों का निर्यात कर रहा है।
यह बदलाव भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक उभरती हुई शक्ति बना रहा है।
उत्तर प्रदेश का बढ़ता योगदान: डिफेंस कॉरिडोर का असर
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि राज्य अब रक्षा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि:
- राज्य में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है
- डिफेंस कॉरिडोर के छह नोड्स तेजी से विकसित हो रहे हैं
- बड़े निवेशक रक्षा क्षेत्र में रुचि दिखा रहे हैं
उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) का उद्देश्य राज्य को रक्षा उत्पादन का हब बनाना है। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
निवेशकों के लिए बेहतर माहौल: कानून व्यवस्था और नीतिगत समर्थन
योगी आदित्यनाथ ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार निवेशकों को आकर्षित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में:
- बेहतर कानून व्यवस्था
- उद्योगों के लिए आसान नीतियां
- इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से सुधार
जैसे कदम उठाए गए हैं, जिससे रक्षा क्षेत्र में निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
यह निवेश भविष्य में राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
बदलती युद्ध शैली: साइबर और कम्युनिकेशन बन रहे नए हथियार
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अब युद्ध केवल जल, थल और वायु तक सीमित नहीं रह गया है।
आज के दौर में:
- साइबर अटैक
- कम्युनिकेशन सिस्टम पर नियंत्रण
- डेटा और सूचना युद्ध
जैसे नए आयाम सामने आ चुके हैं।
उन्होंने कहा कि आज “कीबोर्ड भी हथियार बन गया है”, जो यह दर्शाता है कि डिजिटल सुरक्षा और तकनीकी मजबूती कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी है।
शक्ति और शांति का संतुलन
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल वही देश शांति और उदारता का संदेश दे सकता है, जिसके पास शक्ति और सामर्थ्य हो। यह बयान भारत की रक्षा नीति और कूटनीतिक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।
भारत आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां वह:
- अपनी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है
- वैश्विक मंच पर प्रभावी भूमिका निभा रहा है
- और साथ ही शांति का संदेश भी दे रहा है
मानवीय संवेदना: रीता बहुगुणा जोशी के आवास पर शोक

कार्यक्रम के समापन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मंत्री रीता बहुगुणा जोशी के आवास जाकर उनके पति पूरन चंद्र जोशी के निधन पर शोक व्यक्त किया। यह घटना उनके मानवीय पक्ष को भी उजागर करती है, जहां वे राजनीतिक दायित्वों के साथ व्यक्तिगत संवेदनाओं को भी महत्व देते हैं।
निष्कर्ष: भारत की नई पहचान बनता निर्यात
योगी आदित्यनाथ का यह बयान केवल राजनीतिक संदेश नहीं, बल्कि भारत की बदलती आर्थिक और रणनीतिक दिशा का संकेत है। रक्षा निर्यात में तेजी, राज्यों की भागीदारी और बदलती युद्ध रणनीति यह दिखाती है कि भारत अब वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
आने वाले वर्षों में यदि यही रफ्तार बनी रहती है, तो भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि वैश्विक आपूर्ति और सुरक्षा ढांचे में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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